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सूडान में गृह युद्ध भड़का, राष्ट्रपति आवास पर सेना का कब्जा

सूडान में राष्ट्रपति भवन पर सेना का कब्जा, गृह युद्ध की आग भड़की

अफ्रीकी देश सूडान की सेना ने राष्ट्रपति भवन पर कब्जे का ऐलान किया है. तकरीबन दो साल से चल रहे गृहयुद्ध में विद्रोहियों ने राजधानी खार्तूम में राष्ट्रपति आवास पर अधिकार जमा लिया है.  सूडान की सेना अब अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के सदस्यों की तलाश के लिए में महल के आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चला रही है.

सूडान में चल रहे गृहयुद्ध में पिछले दो वर्षों में हजारों लोगों का जान चली गई है. ये जंग सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच चल रही थी. 

खार्तूम में रिपब्लिकन पैलेस पर सेना ने दोबारा कब्जा किया

सूडान की राजधानी खार्तूम में बने राष्ट्रपति आवास, रिपब्लिकन पैलेस से आरएसएफ के सदस्यों को पीछे धकेलते हुए सूडान की सेना ने अपना आधिपत्य जमा लिया है. पिछले दो वर्षों से रिपब्लिकन पैलेस पर आरएसएफ का कब्जा था. रिपब्लिकन पैलेस, नील नदी के किनारे स्थित है और युद्ध शुरू होने से पहले यह सरकार का मुख्यालय था. यह पैलेस अर्धसैनिक बलों का मुख्य गढ़ था, लेकिन अब ‘रिपब्लिकन पैलेस’ पर सेना दोबारा पहुंच गई है. जनरल मोहम्मद हमदान दगालो के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ)’ को खार्तूम से बाहर कर दिया गया है.

पिछले 2 साल से बिगड़े हालात, हमलों से जूझ रहा था सूडान

सूडान में गृहयुद्ध साल 2023 में शुरु हुआ जब जनरल मोहम्मद दगालो के रैपिड सपोर्ट फोर्स ने विद्रोह करते हुए सेना पर करारा वार किया था.आए दिन सूडान में धमाके और हमले किए जा रहे थे. यूएन का आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पिछले 2 सालों में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. राजधानी खार्तूम पर कब्जा करने से सेना अब मध्य सूडान पर कब्जा करने के लिए लड़ाई शुरू कर सकती है, जिससे सेना और आरएसएफ के बीच देश के पूर्व-पश्चिम क्षेत्रीय का विभाजन और तेज हो जाएगा.

सेना और आरएसएफ में क्या है विवाद, जानिए
साल 2019 में सूडान के राष्ट्रपति उमर अल-बशीर के खिलाफ जनता ने विद्रोह कर दिया था. जिसके बाद अक्टूबर 2021 में सेना ने अल-बशीर की सरकार का तख्तापलट कर दिया. सूडान में तख्तापलट के बाद से ही सेना प्रमुख जनरल अब्देल फतेह अल बुरहान देश की कमान संभाल रहे हैं. वहीं अर्द्धसैनिक बल आरएसएफ के प्रमुख हमदान दगालो यानी हेमेदती, सूडान के दूसरे नंबर के नेता हैं.

तख्तापलट के बाद सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच एक समझौता हुआ. समझौते के तहत एक सोवरेनिटी काउंसिल बनी. सेना प्रमुख जनरल बुरहान काउंसिल के अध्यक्ष तो जनरल दगालो उपाध्यक्ष बने. इस काउंसिल ने तय किया कि अक्टूबर 2023 के आखिर में चुनाव कराए जाएंगे पर दोनों जनरल में सहमति नहीं बनने से संघर्ष बढ़ गया. संघर्ष इतना बढ़ गया कि दोनों ने बख्तरबंद गाड़ियां और टैंक एक दूसरे के खिलाफ सड़क पर उतार दिए थे.

सेना की कोशिश है कि आरएसएफ का सेना में विलय हो जाए. लेकिन आरएसएफ विलय का विरोध कर रही है. सूडान की सेना में लगभग तीन लाख सैनिक हैं, जबकि आरएसएफ में एक लाख से ज्यादा जवान हैं. सेना और पैरा-मिलिट्री फोर्स का विलय है गृह युद्ध का कारण बना है.

भारत का ऑपरेशन कावेरी

साल 2023 के अप्रैल महीने में जब सूडान की सेना और आरएसएफ के बीच गृह युद्ध छिड़ा था, तब भारत ने ‘ऑपरेशन कावेरी’ के जरिए वहां फंसे 750 भारतीय नागरिकों को नौसेना और वायुसेना की मदद से सुरक्षित निकाला था. 

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