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ढाका की सड़कों पर उतरी सेना, बांग्लादेश में शेख हसीना की वापसी जल्द?

क्या बांग्लादेश में एक बार फिर से होने वाला है तख्तापलट. क्या यूनुस सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. क्या बांग्लादेश की सत्ता सेना के हाथों में आने वाली है, या फिर दिल्ली में पिछले साल से रह रहीं शेख हसीना की होने वाली है वापसी. ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि ढाका की सड़कों पर अचानक उतर गई है बांग्लादेश की सेना.

बांग्लादेशी आर्मी ने ढाका में तेज कर दी है अपनी गश्त. बताया जा रहा है कि पिछले साल की तरह ही बांग्लादेश की सड़कों पर छात्रों का उग्र आंदोलन शुरु हो सकता है. बांग्लादेश में बढ़ते तनावों के बीच नवगठित छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) ने सेना पर राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया था. इसके बाद सेना ने अपनी गश्त तेज कर दी है. 

ढाका की सड़कों पर उतरी सेना, छात्रों ने लगाया आरोप

पिछले एक साल जल रहा है बांग्लादेश. अगस्त महीने में शेख हसीना के सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद छात्रों के पसंदीदा मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुखिया बनाया गया. लेकिन अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ने के साथ ही अब प्रदर्शनकारी छात्रों की आंखों की किरकिरी बन रहे हैं मोहम्मद यूनुस. जिसके बाद बांग्लादेश में एक बार फिर से बड़े आंदोलन के लिए छात्र सड़कों पर उतरने वाले हैं.

बांग्लादेश में बढ़ते तनावों के बीच नवगठित छात्र-नेतृत्व वाली नेशनल सिटीजन पार्टी ने ढाका विश्वविद्यालय के परिसर में विरोध प्रदर्शन किए. जिसमें एनसीपी ने “सेना समर्थित साजिश” का विरोध करते हुए यह दावा किया कि इस साजिश के तहत प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को अगले चुनावों में भाग लेने का प्रयास किया जा रहा है. शनिवार को प्रतिष्ठित ढाका यूनिवर्सिटी कैंपस में एनसीपी ने विरोध रैलियां कीं, और पार्टी को फिर से बसाने की “सैन्य समर्थित साजिश” को किसी भी कीमत पर नाकाम करने की कसम खाई.

ढाका में सेना की हलचल तेज, सेना ने कहा, एनसीपी का राजनीतिक स्टंट

एनसीपी के आरोप के बाद बांग्लादेशी सेना ने एक बयान जारी कर इसका जवाब दिया. जारी बयान में कहा गया कि “11 मार्च को सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमां ने एनसीपी के दो नेताओं हसनत अब्दुल्ला और सरजिस आलम से शिष्टाचार मुलाकात की, लेकिन यह किसी भी राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं था. सैन्य मुख्यालय ने कहा, एनसीपी के आरोप एक राजनीतिक स्टंट के सिवाय और कुछ नहीं हैं. सारी हास्यास्पद और अपरिपक्व बातें हैं.”

शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव नहीं लड़ने देना चाहती एनसीपी

छात्र संगठन की पार्टी एनसीपी लगातार मांग कर रही है कि शेख हसीना की पार्टी को चुनाव नहीं लड़ने देना है. साथ ही एनसीपी शेख हसीना को फांसी की मांग कर रही है. पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक हसनत अब्दुल्ला ने शनिवार को दावा किया कि “सेना अवामी लीग को फिर से स्थापित करने की कोशिश में लगी है.

अब्दुल्ला के सैकड़ों समर्थकों ने सेना प्रमुख के खिलाफ जमकर नारे लगाए और यह मांग भी की कि शेख हसीना और उनकी पार्टी को सत्ता से बाहर किया जाए. साथ ही उनके ‘सहयोगियों’ को केस के बाद फांसी दिए जाने की मांग की. इससे पहले हसनत अब्दुल्ला ने ये भी सोशल मीडिया पर लिखा कि “भारत के इशारे पर दूसरी अवामी लीग के नाम पर शेख हसीना की अवामी लीग को फिर से बसाने की योजना चल रही है”.

बांग्लादेश में पाकिस्तान के इशारे पर हुई थी आर्मी चीफ को हटाने की साजिश?

समय-समय पर भारत की तारीफ करने वाले और बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान शेख हसीना और उनकी बहन को सुरक्षित ढाका से निकालने वाली आर्मी चीफ वकार उज जमां के तख्तापलट की साजिश का खुलासा हुआ है. बताया जा रहा है कि आर्मी चीफ के खिलाफ पाकिस्तान परस्त सेना के लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान बगावत की तैयारी कर रहे थे. कहा जा रहा है कि बांग्लादेश के आर्मी चीफ की हर एक मीटिंग और प्लानिंग की जानकारी पाकिस्तान से साझा कर रहे थे. इस खुलासे के बाद बांग्लादेश आर्मी चीफ ने लेफ्टिनेंट जनरल रहमान को बांग्लादेश की सैन्य खुफिया डीजीएफआई की निगरानी में रखा गया है.

दरअसल लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान को बांग्लादेश में पाकिस्तान का पसंदीदा मोहरा माना जाता है, जबकि मौजूदा आर्मी चीफ सख्त है और भारत के साथ अच्छे रिश्ते की पैरवी भी कर चुके हैं. ऐसे में पाकिस्तान चाहता है कि वकार उज जमां का तख्तापलट कर दिया जाए. इसके लिए बाकायदा लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान ने बगावत की प्लानिंग की. इस साल की शुरुआत में जनवरी के आसपास फैजुर रहमान ने जमात के नेताओं और पाकिस्तानी राजनयिकों से मुलाकात भी की थी. बांग्लादेश आर्मी चीफ को उनकी इन मीटिंग्स के बारे में जानकारी दी गई थी.

इसके अलावा मार्च के पहले हफ्ते में एक बैठक भी बुलाई थी. लेकिन जनरल वकार को हटाने के समर्थन में वरिष्ठ अधिकारी गायब रहे. इन अधिकारियों ने सेना प्रमुख वकार उज जमां के ऑफिस को लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान की बैठक और प्लानिंग की सूचना दे दी. जिसके बाद आर्मी चीफ ने एक्शन लेते हुए लेफ्टिनेंट जनरल रहमान को बांग्लादेश की सैन्य खुफिया डीजीएफआई की निगरानी में रखने के आदेश दे दिए.

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