रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्क्रैमजेट इंजन संचालित हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करने का दावा किया है. भारत में पहली बार 120 सेकंड के लिए अत्याधुनिक एक्टिव कूल्ड स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर ग्राउंड टेस्ट का प्रदर्शन किया गया है जिसे अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक मिशनों को विकसित करने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने हाल ही में लंबी अवधि की सुपरसोनिक दहन रैमजेट और स्क्रैमजेट इंजन संचालित हाइपरसोनिक तकनीक को विकसित किया है.
हाइपरसोनिक मिसाइल उन्नत हथियारों की एक श्रेणी है, जो मैक-5 से अधिक गति अर्थात ध्वनि की गति से पांच गुना या 5400 किमी प्रति घंटा से अधिक से चलती हैं. इन उन्नत हथियारों में मौजूदा एयर डिफेंस प्रणालियों को बायपास करने और तेज तथा उच्च प्रभाव वाले हमले करने की क्षमता है.
अमेरिका, रूस, भारत और चीन सहित कई देश सक्रिय रूप से हाइपरसोनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं. हाइपरसोनिक वाहनों की कुंजी स्क्रैमजेट हैं. ये हवा में सांस लेने वाले इंजन हैं, जो बिना किसी गतिशील हिस्से का उपयोग किए सुपरसोनिक गति पर दहन को बनाए रखने में सक्षम हैं.
पिछले साल नवंबर के महीने में भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल बनाकर तैयार करने का ऐलान किया था. डीआरडीओ ने ओडिशा के तट से 1500 किलोमीटर से भी दूर मार करने वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल फ्लाइट ट्रायल किया था. इस हाइपरसोनिक मिसाइल को दुश्मन की रडार या फिर एयर-डिफेंस सिस्टम भी डिटेक्ट करने में नाकाम रहती हैं. (हाइपरसोनिक मिसाइल का ट्रायल सफल, चीन से बराबरी का मुकाबला)
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर के ग्राउंड टेस्ट ने कई उल्लेखनीय उपलब्धियां प्रदर्शित की, जो सफल इग्निशन और स्थिर दहन वाले हाइपरसोनिक वाहनों में परिचालन हेतु इस्तेमाल के लिए इसकी क्षमता को प्रदर्शित करती हैं.
स्क्रैमजेट इंजन में इग्निशन ‘तूफान में मोमबत्ती जलाए रखने’ जैसा है. स्क्रैमजेट कॉम्बस्टर में एक अभिनव लौ स्थिरीकरण तकनीक शामिल है, 1.5 किमी प्रति सेकंड से अधिक हवा की गति के साथ कॉम्बस्टर के अंदर निरंतर लौ रखती है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्क्रैमजेट इंजन के सफल ग्राउंड टेस्ट के लिए डीआरडीओ और उद्योग जगत को बधाई दी है. उन्होंने कहा, “यह उपलब्धि अगली पीढ़ी के हाइपरसोनिक मिशनों के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.”
स्क्रैमजेट इंजन का सफल परीक्षण, हाइपरसोनिक-एनजी मिसाइल बनाने में मिलेगी मदद

DRDO demonstrated a cutting-edge Active Cooled Scramjet Combustor ground test for 120 seconds for the first time in India
