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पूर्व-सेना प्रमुख जनरल वीएन शर्मा का निधन, चीन को आंख दिखाने के लिए रखा जाएगा याद

एलएसी पर चीन के खिलाफ पीछे हटने के लिए मजबूर करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री के निर्देश को मानने से इंकार करने वाले देश के पूर्व टॉप मिलिट्री कमांडर जनरल वी एन शर्मा का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. 1988 से 1990 तक थलसेना प्रमुख के पद पर रहने वाले जनरल शर्मा, देश के पहले परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) मेजर सोमनाथ शर्मा के छोटे भाई थे. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय सेना ने जनरल शर्मा के निधन पर संवेदनाएं प्रकट की हैं. 

खास बात है कि जनरल शर्मा, देश की आजादी मिलने के बाद पहले ऐसे थलसेना प्रमुख थे, जिनकी कमीशनिंग 1947 यानी स्वतंत्रता मिलने के बाद हुई थी. इससे पहले के सभी आर्मी चीफ की सेना में नियुक्ति, अंग्रेजों के समय में हुई थी. 

जनरल शर्मा के निधन पर शोक जाहिर करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि “एक प्रतिष्ठित सैन्य नेता के तौर पर, जनरल शर्मा ने अटूट समर्पण, साहस और सम्मान के साथ देश की सेवा की. उन्होंने अपने परिवार, जिसमें उनके बड़े भाई मेजर सोमनाथ शर्मा (परमवीर चक्र) भी शामिल थे, की शानदार विरासत को बहुत ही बेहतरीन ढंग से आगे बढ़ाया.”

पहले परमवीर चक्र विजेता सोमनाथ शर्मा के थे छोटे भाई

बड़े भाई सोमनाथ शर्मा के अलावा, जनरल शर्मा के पिता मेजर जनरल अमरनाथ शर्मा भी आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विस के प्रमुख के तौर पर सेना से रिटायर हुए थे. उनकी एक दूसरे भाई लेफ्टिनेंट जनरल सुरेंद्र नाथ शर्मा, इंजीनियर-इन-चीफ के पद से रिटायर हुए थे. उनकी बहन (डाक्टर) मेजर कमला तिवारी ने भी सेना की मेडिकल कोर (एएमसी) में अपनी सेवाएं दी थी.  

पूर्व थलसेना प्रमुख के निधन पर संवेदनाएं प्रकट करते हुए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल धीरज सेठ ने कहा कि “एक प्रतिष्ठित सैनिक और दूरदर्शी सैन्य नेता, जनरल विश्वनाथ शर्मा ने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया.” जनरल सेठ ने पूरी थलसेना की तरफ से जनरल शर्मा के परिवार को शोक संतप्त संदेश जारी किया. 

थलसेना प्रमुख के तौर पर जनरल शर्मा के कार्यकाल को पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ पहली आर्मी को आंतरिक सुरक्षा में तैनात करने के लिए जाना जाता है. इसके अलावा उसी दौरान, जम्मू कश्मीर में आतंकवाद अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा था.

अरुणाचल प्रदेश में जनरल सुंदरजी के नेतृत्व में चीन के खिलाफ शुरू किया था ‘ऑपरेशन फाल्कन’

आर्मर्ड कोर यानी टैंक रेजीमेंट के अधिकारी रहे जनरल शर्मा को चीन के खिलाफ कड़े रूख के लिए भी जाना जाता है. दरअसल, थलसेना प्रमुख बनने से पहले, जनरल शर्मा ने सेना की पूर्वी कमान (मुख्यालय फोर्ट विलियम, कोलकाता) के कमांडर के तौर पर अपनी सेवाएं दी थी. उसी दौरान, तत्कालीन सेना प्रमुख के सुंदरजी ने अरुणाचल प्रदेश में चीन के खिलाफ ‘ऑपरेशन फाल्कन’ शुरु किया था. क्योंकि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के विवादित सुमद्रांगछू इलाके में घुसपैठ की थी. 1962 की जंग के बाद भारत और चीन की सीमा यहां से पीछे हट गई थी. 

1962 के युद्ध के बाद पहली बार भारतीय सेना ने चीन के खिलाफ मोर्चो खोला था. जवाबी कार्रवाई करते हुए जनरल सुंदरजी और लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने सुमद्रांगछू के करीब जिमीथांग में सेना की एक पूरी ब्रिगेड तैनात कर दी. इसके अलावा सुमद्रांगछू के ठीक सामने एक ऊंची पहाड़ी पर भारतीय सेना ने अपनी तोपों को तैनात किया और हेलीपैड भी तैयार कर लिया. ऐसे में चीन बुरी तरह भन्ना गया था. चीन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि भारतीय सेना इस तरह चीन की पीएलए सेना की कार्रवाई का जवाब दे सकती है. क्योंकि 1962 के युद्ध के बाद, भारतीय सेना ने एक लंबे समय तक चीन की कारगुजारियों को कड़वे घूंट की तरह पिया था. लेकिन ऑपरेशन फाल्कन ने चीन के खिलाफ भारतीय सेना की रणनीति को बदल दिया था.

जनरल सुंदरजी और ले.जनरल शर्मा की आक्रमक नीति देखकर एलएसी से लेकर बीजिंग तक सकते में आ गया और सीधे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी (1984-89) तक शिकायत कर दी.

तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी नाखुश थे सेना की आक्रमक रणनीति से

एलएसी पर चीन से सैन्य विवाद के बीच खुद राजीव गांधी ने अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया. माना जाता है कि सेना के टॉप कमांर्डस ने जनरल सुंदरजी की मौजूदगी में सीमा विवाद पर राजीव गांधी को एक प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया. लेकिन राजीव गांधी ने भारतीय सेना के दावे पर थोड़ा कम ऐतबार किया.

माना जाता है कि जनरल सुंदरजी ने इस्तीफे की धमकी देते हुए साफ कह दिया था कि अगर भारतीय सेना को पीछे हटने के लिए दवाब डाला गया तो, सरकार को किसी दूसरे थलसेना प्रमुख को तलाशना शुरु कर देन चाहिए. 

माना जाता है कि पहले तत्कालीन विदेश मंत्री एन डी तिवारी और फिर राजीव गांधी के बीजिंग दौरे के बाद एलएसी विवाद का कूटनीतिक हल निकाला गया. तब तक जनरल सुंदर जी रिटायर हो गए थे और सरकार ने जनरल शर्मा को नया आर्मी चीफ नियुक्त किया.

जनरल शर्मा के कार्यकाल में हुआ था विवादित आईपीकेएफ को श्रीलंका भेजने का फैसला  

जनरल शर्मा के कार्यकाल में हालांकि, श्रीलंका में शांति सेना (इंडियन पीस कीपिंग फोर्स) भेजना का विवादित फैसला लिया गया था. लेकिन श्रीलंका में बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों के वीरगति को प्राप्त होने के चलते आईपीकेएफ को वापस बुलाने का फैसला लिया गया. जनरल शर्मा के रिटायर होने से ठीक पहले, भारतीय शांति सैनिकों ने स्वदेश लौट ना शुरु कर दिया था. 

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