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इस्लामाबाद नहीं जाएगा ईरानी डेलिगेशन, Peace-Talk होर्मुज की भेंट चढ़ी

अमेरिकी डेलिगेशन की सोमवार को रवानगी से पहले ईरान की ओर से वार्ता पर लगा दिया गया है ब्रेक. ईरान ने कड़े तेवर दिखाते हुए घोषणा की है कि जब तक अमेरिका होर्मुज की नाकेबंदी नहीं हटाता है, तब तक ईरान की ओर से कोई वार्ता नहीं की जाएगी. यानि ईरानी डेलिगेशन के इस्लामाबाद जाने पर बहुत बड़ा सस्पेंस है.

ईरान के अमेरिका के साथ इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार करने के बाद सीजफायर बढ़ने पर संशय है. 22 अप्रैल को अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम खत्म हो रहा है. यानि अगर दोनों देशों में बातचीत नहीं हुए तो एक बार फिर से मिडिल ईस्ट में भयंकर जंग का खतरा मंडरा रहा है.

ईरान का शांति वार्ता से इनकार, पाकिस्तान नहीं भेजेगा डेलिगेशन

रविवार देर रात ईरान ने अपना डेलिगेशन पाकिस्तान भेजने से इनकार कर दिया है. जबकि अमेरिका की ओर से इस्लामाबाद दौरे की पूरी तैयारी कर ली गई है. इस्लामाबाद में वॉशिंगटन-तेहरान के बीच एक बार फिर से बातचीत की जानी है. ईरान के इस फैसले से दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अपने बंदरगाहों पर जारी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया है. ईरान ने अपने ताजा बयान में कहा, “अमेरिका की अत्यधिक मांगें, अवास्तविक अपेक्षाएं, बार-बार रुख बदलना और विरोधाभासी बयानों के कारण हम अपना डेलिगेशन इस्लामाबाद नहीं भेजेंगे. जब तक होर्मुज से अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड नहीं हटेगा, तब तक वार्ता नहीं होगी.”

अमेरिका की बचकानी हरकत, वार्ता से पहले ईरान ने दिखाए तेवर

व्हाइट हाउस ने बताया कि उप राष्ट्रपति जेडी वेंस, इस्लामाबाद वार्ता के लिए जाने वाली डेलिगेशन नेतृत्व कर रहे हैं. वेंस के साथ स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी पाकिस्तान जाने वाले डेलिगेशन में शामिल हैं. आपको बता दें कि ईरान के साथ हुई पहली वार्ता में भी ये तीनों शामिल हुए थे. अपने डेलिगेशन की रवानगी से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को ये धमकी भी दी है कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता है, तो ईरान के पावर प्लांट और पुल ध्वस्त कर दिए जाएंगे.

ट्रंप की धमकी के बीच ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने रविवार को तेहरान में एक उच्च स्तरीय बैठक की. मोहम्मद रजा ने अमेरिका के रुख की आलोचना करते हुए उसे बचकाना और असंगत बताया. कहा, शांतिवार्ता और धमकी साथ-साथ नहीं चल सकते. एक ओर ट्रंप शांति वार्ता को सकारात्मकर बताते हुए दूसरे राउंड की बातचीत के बारे में बोलते हैं, तो वहीं तेहरान को धमका भी रहे हैं.

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