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इस्लामाबाद Talks में तीखी नोंकझोंक, भिड़ गए JD-अराघची

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच चली वार्ता फेल हो गई. 21 घंटों की मीटिंग बेनतीजा रही है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल अपनी शर्तों पर अडिग है, तो वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी डेलिगेशन ने होर्मुज खोलने को लेकर सख्ती बरती है.

इस बातचीत के दौरान ईरान और यूएस के बीच कई मतभेद सामने आए हैं. बातचीत में ईरान और अमेरिका अपने मतभेदों पर किसी सहमति तक नहीं पहुंच पाए हैं.

दुनिया को उम्मीद थी कि रविवार को दोनों देशों में सहमति बन जाएगी, लेकिन मिडिल ईस्ट में शांति होगी. लेकिन वार्ता नहीं की गई. दोनों देशों में होर्मुज के साथ-साथ लेबनान के मुद्दे पर पेंच फंसा हुआ है. ईरान चाहता है कि लेबनान पर फौरन हमले रोके जाएं, लेकिन इस शांति वार्ता के दौरान भी इजरायल थम नहीं रहा. लेबनान पर हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले लगातार किए जा रहे हैं.

ईरान-अमेरिका प्रतिनिधिमंडल में तीखी बहस

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के उन अधिकारियों के साथ सीधी बात की, जिन्हें पश्चिम के प्रति कड़ा रुख रखने के लिए जाना जाता है. इस वार्ता का अहम मकसद ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को पूरी तरह से फिर से खोलना है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है.

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागैर गालिबफ की अगुवाई में ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस वार्ता में शामिल हुए.

व्हाइट हाउस के मुताबिक पहले दिन 15 घंटे की बातचीत हुई. होर्मुज को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है. इस बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच होर्मुज को लेकर तीखी बहस हुई है.

इस्लामाबाद में शांति वार्ता से पहले होर्मुज को लेकर ईरान बिलकुल नहीं झुका है, वहीं अमेरिका भी शर्त मानने के मूड में नहीं दिखा. बैठक में दोनों तरफ से यही संदेश आया. जिससे ये साबित हो गया कि पहले दिन पीस टॉक में कोई नतीजा नहीं निकला. होर्मुज खोलने को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है. ईरान होर्मुज पर पूरा कंट्रोल चाहता है. इसे लेकर उसे कोई भी दूसरा प्रस्ताव मंजूर नहीं है.

किन-किन मुद्दों पर पर हुई बात

ईरान-अमेरिका के बीच कोई सहमति नहीं बनी. बताया जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, ईरान की युद्ध क्षति को लेकर मुआवजा, और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को वापस लेने जैसे अहम मुद्दों पर बात हुई. इस बातचीत में लेबनान पर हो रहे हमलों तो रोकने को लेकर भी ईरान का रुख कड़ा रहा.

ईरान की शर्त है कि वो यूरेनियम संवर्धन को नहीं रोकेगा यानी उसका परमाणु कार्यक्रम जारी रहेगा. वहीं लेबनान पर इजरायली हमले पूरी तरह बंद करने की भी मांग की. ईरान ने साफ कर दिया है कि वो होर्मुज स्ट्रेट पर जहाजों से टोल वसूलता रहेगा. लेकिन अमेरिका चाहता है कि अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग होने के कारण टोल वसूली करना गलत है. साथ ही अमेरिका वहां पेट्रोलिंग भी करना चाहता है. ईरान ने बैठक में अमेरिका से कहा है कि तमाम देशों में उसकी फ्रीज संपत्ति को तुरंत बहाल किया जाए.

आपको बता दें कि यूरोपीय देशों में ईरान के कई लाख करोड़ रूपये सीज हैं, अगर वो पूरा पैसा ईरान को मिल जाए तो वो अपने मुल्क की तस्वीर बदल सकता है. अमेरिका के पास ईरान के 2 बिलियन डॉलर फ्रीज हैं, जबकि दक्षिण कोरिया के पास करीब 7 बिलियन डॉलर फंसे हैं. ब्रिटेन, नीदरलैंड्स, जापान, कतर में भी अरबों डॉलर फ्रीज हैं. ईरान चाहता है कि फौरन प्रतिबंध हटे और संपत्ति रिलीज की जाए.

दरअसल ईरान ने 40 दिनों के युद्ध में हुए अपने नुकसान की भरपाई करना चाहता है.

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