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जयशंकर ने पश्चिमी देशों को धोया, कश्मीर पर यूएन को भी लपेटा

रायसीना डायलॉग में चर्चा करते विदेश मंत्री एस जयशंकर.

दिल्ली में चल रहे ‘रायसीना डायलॉग’ के दूसरे दिन 125 देशों के प्रतिनिधियों के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान के साथ-साथ पश्चिमी देशों के दोहरी मानसिकता पर सवाल खड़े किए.  ‘थ्रोन्स एंड थॉर्न्स: डिफेंडिंग द इंटेग्रिटी ऑफ नेशंस’ सत्र में बोलते हुए एस जयशंकर मे कहा, जिस तरह सरकारें अपने देश में व्यवस्था बनाए रखने के लिए काम करती हैं, उसी तरह वैश्विक स्तर पर भी ऐसा होना चाहिए. जयशंकर ने ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) से जुड़े मामलों में पश्चिम देशों की पाखंडपूर्ण नीति का उदाहरण देते हुए बताया कि “कैसे पाकिस्तान की ओर से भारत की जमीन पर किए गए आक्रमण और घुसपैठ को पश्चिमी देशों ने एक क्षेत्रीय विवाद में बदल दिया.”

पश्चिमी देशों ने कश्मीर की वास्तविकता को तोड़ मरोड़ कर पेश किया: एस जयशंकर

विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विसंगतियां है जिसका हिसाब-किताब होना जरूरी है. इसे समझाने के लिए जयशंकर ने पाकिस्तान का जिक्र किया. एस जयशंकर ने कहा, “दूसरे विश्व व्यवस्था के बाद, किसी दूसरे देश का सबसे लंबे समय तक अवैध कब्जा कश्मीर में देखा गया. जब हम इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र गए, तो आक्रमण को विवाद में बदल दिया गया. हमलावर और पीड़ित को बराबर रखा गया.”

विदेश मंत्री ने कहा, “दोषी पक्ष कौन थे? ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, ब्रिटेन और अमेरिका.”

पश्चिमी देशों ने सुविधानुसार बदला रवैया: जयशंकर

कश्मीर मुद्दे पर पश्चिमी देशों के रुख पर जयशंकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि “भारत के जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सबसे लंबे समय से एक विदेशी ताकत का अवैध कब्जा है. 1947 में भारत की आजादी के दो महीने बाद ही पाकिस्तान ने आक्रमण करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया था. वहीं, चीन ने 1950 और 1960 के दशक में इस इलाके पर कब्जा जमाया.”

विदेश मंत्री ने पश्चिमी देशों ने सुविधानुसार बदले रवैए पर निशाना साधते हुए बताया कि भारत ने जब यूएन में मुद्दा उठाया तो ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, बेल्जियम, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश इस गलतबयानी में शामिल थे. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि “कैसे संयुक्त राष्ट्र में भारत की अपील पर भी दोष समान रूप से मढ़ा गया था. जबकि असली हमलावर तो पाकिस्तान था.”

विदेश मंत्री ने कहा, ”आज हम राजनीतिक हस्तक्षेप की बात करते हैं. पश्चिमी देश दूसरे देशों के बारे में कहते हैं कि वहां लोकतंत्र खतरे में है, लेकिन जब हम उनके यहां के लोकतंत्र की बात करते हैं तो वो कहते हैं कि यह गलत भावना से किया गया हस्तक्षेप है. वैश्विक व्यवस्था का हिसाब-किताब करना बेहद जरूरी है.”

पाकिस्तान का नाम लिए बिना जयशंकर ने कहा रिस्की देश

पाकिस्तान का बिना नाम लिए हुए जयशंकर ने जमकर निशाना साधा. एस जयशंकर पाकिस्तान के लिए ‘रिस्की कंट्री’ (जोखिम भरा देश) शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि “जरूरी नहीं कि अगर कोई देश छोटा हो तो वो जोखिम भरा नहीं हो सकता. जोखिम भरा देश होने के लिए बड़ा होने की जरूरत नहीं है. अगर दुनिया में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नहीं होगी तो कई तरह के खतरे पैदा हो जाएंगे. अगर कोई वैश्विक व्यवस्था नहीं रहेगी तो सिर्फ बड़े देशों को ही फायदा नहीं होगा बल्कि जो देश अतिवादी रुख अपनाएगा, वो अव्यवस्था को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगा.”

तालिबान का नाम लेकर वेस्ट देशों पर जयशंकर ने कसा तंज

अफगानिस्तान पर टिप्पणी करते हुए जयशंकर ने पश्चिमी देशों के विरोधाभासी रवैए का जिक्र किया. जयशंकर ने कहा, “जहां दोहा और ओस्लो प्रक्रियाओं में उन्हीं तालिबान नेताओं का स्वागत किया गया था, जिनकी अब अफगानिस्तान की बिगड़ती स्थिति के लिए निंदा की जा रही है. कैसे तालिबान, जिन्हें कभी चरमपंथी माना जाता था, अब सूट-टाई में हैं. फिर भी उन्हें एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंता के रूप में देखा जाता है.” (https://x.com/MeghUpdates/status/1901865723678597283)

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