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जेएनयू फिर विवादों में, अमेरिकी मेयर की चिट्ठी से बढ़ी टेंशन

By Nalini Tewari

बेहद शर्मनाक है कि भारत के सबसे प्रतिष्ठित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी यानी जेएनयू में लगाए गए हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के लिए आपत्तिजनक नारे. दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद और देशद्रोह के आरोपी शरजील इमाम की देश की सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने जमानत रद्द की तो जेएनयू को जंग का मैदान बनाने की कोशिश की. 

सवाल ये है कि क्या ये प्रदर्शन स्पॉन्सर्ड है. क्या ऐसे प्रदर्शन के जरिए भारत की आतंरिक सुरक्षा को चुनौती दी गई है.  क्या डीपस्टेट एक बार फिर से एक्टिव हो गया है, जिसे भारत की प्रगति और आत्मनिर्भरता रास नहीं आ रही.

सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि दुनिया पर नजर डाली जाए, तो इन दिनों सैन्य ताकत के अलावा आंदोलन के जरिए दुनिया में अशांति फैलाई गई है. उदाहरण, बांग्लादेश, नेपाल, ईरान का देखा जा सकता है. 

बांग्लादेश में प्रदर्शन के दौरान शेख हसीना का तख्तापलट किया गया, नेपाल में जेन ज़ी के नाम पर प्रदर्शन के जरिए सत्ता हिला दी गई, ईरान में सड़कों पर लोग उतरे हुए हैं. ऐसे में क्या कोई ऐसी ताकत है जो भारत में भी आंदोलन को हवा दी जा रही है.

हाल ही में अमेरिका के कुछ सांसदों ने उमर खालिद के लिए आवाज उठाई थी, साथ ही पीएम मोदी के कट्टर विरोधी न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान मामदानी ने भी एक नोट लिखकर कहा था कि उमर खालिद हम लोग आपके बारे में सोच रहे हैं. 

जेएनयू में टुकड़े-टुकड़े के बाद कब्र खुदेगी वाली नारेबाजी

दिल्ली के जेएनयू में छात्रों ने पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ बेहद ही आपत्तिजनक नारों के साथ प्रदर्शन किया है. यह विरोध 2020 में हुए जेएनयू हमले की छठी बरसी, उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने खिलाफ किया गया. 

जेएनयू छात्र संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत न मिलने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की. 

बताया जा रहा है कि जब विवादित नारे लगाए जा रहे थे, उस समय जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश अली और सचिव सुनील मौके पर मौजूद थे. इसके अलावा वामपंथी संगठनों से जुड़े कई छात्र भी वहां एकत्र हुए थे.

नारेबाजी का वीडियो वायरल हुआ है, जिसके बाद बीजेपी में आक्रोश है. 

विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले की जांच में जुट गया है.साथ ही दिल्ली पुलिस ने भी जांच शुरु की है.

बीजेपी में आक्रोश, नारेबाजी लगाने वालों को बताया अर्बन नक्सल

जेएनयू में हुई विवादित नारेबाजी को लेकर बीजेपी भड़क उठी है. बीजेपी 

बीजेपी नेता करनैल सिंह ने कहा, “ये शरारती तत्व देश में अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हमारा देश कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम है ऐसा कुछ नहीं होने वाला है.”

दिल्ली में बीजेपी विधायक हरीश खुराना ने कहा, “ये जो देश विरोधी कार्य कर रहे हैं, उनपर नकेल कसने का समय आ गया है.”

वहीं दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने एक्स पर लिखा, “सांपों के फन कुचले जा रहे हैं तो सपोले बिलबिला रहे हैं. जेएनयू में नक्सलियों, आतंकियों, दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारे लगाने वाले हताश हैं क्योंकि नक्सली खत्म किए जा रहे हैं, आतंकी निपटाए जा रहे हैं और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुका है.”

तो मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “ये बिलकुल गलत है. पहले तो देशद्रोह का काम करेंगे और फिर उनके समर्थन में इस तरह के नारे लगाएंगे.”

सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की है उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उमर खालिद और शरजील इमाम को छोड़कर बाकी 05 आरोपियों को जमानत दे दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ-साफ कहा है कि “उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ सबूत हैं कि वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की ‘साजिश रचने, लामबंदी करने और रणनीतिक दिशा-निर्देश देने में वो शामिल थे, इसलिए जमानत नहीं दी सकती.” 

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा को “शरजील और उमर खालिद 05 साल से जेल में है, इसलिए उन्हें बेल मिल जाए, ये कोई आधार नहीं है. दोनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं.”

उमर दिल्ली दंगा भड़काने का आरोपी, शरजील ने चिकन नेक को अलग करने को कहा था

शरजील इमाम पर देशद्रोह का मुकदमा चल रहा है, क्योंकि उसने ‘चिकेन नेक’ को काटकर नॉर्थ ईस्ट को भारत से अलग करने की बात कही थी. शरजील इमाम के बारे में पुलिस का दावा है कि वह ‘उमर खालिद और अन्य साजिशकर्ताओं के संरक्षण में’ काम कर रहा था. शरजील ने जामिया मिलिया इस्लामिया और आसनसोल में दिए गए अपने भाषणों के जरिए भीड़ को उकसाया और मुस्लिम बहुल शहरों में चक्का जाम करने की अपील की. 

फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए दंगे के मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद पर साजिश रचने का आरोप है. इस मामले में सितंबर 2020 में उमर खालिद को गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद से ही वह गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धाराओं के तहत जेल में बंद है. 

उमर पर आरोप है कि इसने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप जब अपने पहले कार्यकाल के दौरान नई दिल्ली आए थे, उस वक्त इसने दंगे की साजिश रची. ताकि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दिल्ली दंगे का मुद्दा उठाया जा सके.

पुलिस ने उन चैट और मैसेज का भी हवाला दिया है, जिनमें तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा का जिक्र था, और दावा किया है कि हिंसा का समय सीएए मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के इरादे से तय किया गया था. 

क्या विदेश से दी गई जेएनयू प्रदर्शन को हवा?

जेएनयू में आपत्तिजनक नारों वाले प्रदर्शन से कुछ दिन पहले ही न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान मामदानी ने उमर खालिद के पक्ष में बातें कहीं थीं. मामदानी का एक नोट सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था, जिसमें मामदानी ने कहा था कि उमर हम सब आपके बारे में सोच रहे हैं. 

इसके अलावा अमेरिका के आठ डेमोक्रेटिक सांसदों ने भी वॉशिंगटन में तैनात भारतीय राजदूत को एक चिट्ठी लिखकर उमर खालिद की रिहाई की मांग की थी. अमेरिकी सांसदों ने उमर खालिद के मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर भी चिंता जताई थी.

सवाल है कि आखिर उमर खालिद के लिए अमेरिका के पेट में क्यों मरोड़ उठ रही है. क्या जानबूझकर उमर खालिद का नाम लेकर भारत के खिलाफ कोई साजिश रची जा रही है. इस प्रदर्शन के बाद खुफिया एजेंसियां बेहद सतर्क हैं.

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