विदेश मंत्री एस जयशंकर का मानना है कि रूस-यूक्रेन जंग में अब ‘सुई’ युद्ध को बढ़ाने के बजाए वार्ता की तरफ घूम रही है. जयशंकर का ये बयान ऐसे समय में आया है जब शनिवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की पेरिस में अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर रहे थे.
विदेश मंत्री जयशंकर ने दोहा फोरम (कतर) में एक चर्चा के दौरान कहा रूस-यूक्रेन जंग को रोकने के लिए दुनियाभर में भारत को दोनों पक्षों से चर्चा करने पर जोर दिया जा रहा है.
जयशंकर का इशारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले छह महीने में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और जेलेंस्की से लगातार मुलाकात करने को लेकर थी. पीएम मोदी हर मुलाकात में रूस-यूक्रेन जंग का हल बातचीत और डिप्लोमेसी के जरिए करने पर जोर दे रहे हैं. (रविवार से राजनाथ का रूस दौरा, सैन्य सहयोग पर होगी चर्चा)
शनिवार को दोहा में जयशंकर ने कहा कि आज के समय में नए तरीके की डिप्लोमेसी की जरूरत है जो ज्यादा समावेशी हो.
विदेश मंत्री ने कहा कि इस समय दुनियाभर में जो जंग और संघर्ष चल रहे हैं उनमें सभी डिप्लोमेट्स को एक कदम आगे बढ़ाने की सख्त जरूरत है.
जयशंकर ने कहा कि खाड़ी और भूमध्य सागर में चल रहे युद्ध के चलते भारत सहित पूरे ग्लोबल साऊथ में तेल, फर्टिलाइजर और शिपिंग इत्यादि के दाम बढ़ गए हैं.
जयशंकर ने कहा कि 60 और 70 के दशक में यूएन सिक्योरिटी काउंसिल या फिर पश्चिमी देश सभी जंग को सुलझाते थे लेकिन आज के समय में सभी देशों को आगे आना होगा.
ब्रिक्स करेंसी का कोई प्रस्ताव नहीं है
विदेश मंत्री ने साफ तौर से कहा कि ब्रिक्स करेंसी को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है. जयशंकर का बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ब्रिक्स देशों ने ऐसा किया तो समूह के देशों के सामान पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा.
जयशंकर ने चीन, रूस, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे देशों के गठबंधन को अमेरिकी-विरोधी से जुड़ी भ्रांतियों को भी दूर करने की कोशिश की. (ट्रंप की BRICS को धमकी, डॉलर खत्म किया तो भुगतना होगा अंजाम)
रूस-यूक्रेन जंग की सुई वार्ता की तरफ: जयशंकर

Jaishankar speaking at Doha Forum.
