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नेपाल में पूर्व नरेश से डरी सरकार, 77 साल की उम्र में किया नजरबंद

समर्थकों से घिरे नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र.

राजशाही की वापसी और हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर काठमांडू में हो रहे हिंसक प्रदर्शन के बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को नजरबंद कर दिया गया है. माना जा रहा है कि ओली सरकार जल्द ज्ञानेंद्र शाह को गिरफ्तार कर सकती है.

ओली सरकार ने न सिर्फ पूर्व राजा को हाउस अरेस्ट किया है, बल्कि उनकी सुरक्षा को भी हटा दिया गया है. पिछले कुछ दिनों से ज्ञानेंद्र के समर्थक नेपाल की सड़कों पर हैं और हालात शुक्रवार को उस वक्त बिगड़ गए थे, जब पुलिस के साथ झड़प के बाद प्रदर्शनकारियों ने कई इमारतों में आग लगा दी. प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि सड़कों पर नेपाली सेना को उतरना पड़ा.

राजशाही की वापसी के प्रदर्शन पर सख्त ओली सरकार

शुक्रवार को काठमांडू में हुई हिंसक झड़प के बाद ओली सरकार ने सख्ती बरतनी शुरु कर दी है. तमाम प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, साथ ही कैबिनेट बैठक के बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र के साथ-साथ कई बड़े नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है.राजशाही समर्थक स्वगत नेपाल, शेफर्ड लिम्बू और संतोष तामांग को भी हिंसा भड़काने के आरोप में हिरासत में लिया गया है. प्रो-रॉयलिस्ट आंदोलन के प्रमुख समन्वयक नवराज सुबेदी को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है, जबकि मुख्य कमांडर दुर्गा प्रसाई की तलाश जारी है. ओली सरकार ने कहा, हमें खुफिया जानकारी थी कि राजशाही की वापसी का प्रदर्शन हिंसक होने वाला है.

नेपाल में हुए प्रदर्शन में 2 की मौत, 30 से ज्यादा घायल

शुक्रवार को हुई हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल था. नेपाली प्रशासन के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने नौ सरकारी वाहन, छह निजी वाहन और 13 इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया. कई रेस्तरां और सार्वजनिक स्थानों को भी प्रदर्शनकारियों ने नुकसान पहुंचाया गया, वहीं प्रदर्शनकारियों का दावा है कि ओली सरकार ने जानबूझकर प्रदर्शनकारियों को भड़काया और उनपर हवाई फायरिंग के साथ-साथ आंसू गैस के गोले दागे.

हिंसक प्रर्दशनों पर काबू करने के लिए काठमांडू की सड़कों पर सेना को उतारा गया है.

प्रदर्शनकारियों की मांग क्या है?

राजशाही समर्थकों की मांग है कि नेपाल में 1991 का संविधान फिर से लागू किया जाए. देश में संवैधानिक राजशाही दोबारा लागू करके राजशाही और संसदीय लोकतंत्र एक साथ हो. नेपाल में पुराने कानूनों को वापस लाया जाए और देश को फिर से हिंदू राष्ट्र का स्थान दिया जाए. नेपाल में साल 2008 तक एक संवैधानिक राजशाही हुआ करती थी, लेकिन माओवादी आंदोलन और लोकतांत्रिक बदलावों के चलते इसे एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित कर दिया गया. 16 साल पहले नेपाल दुनिया का एकमात्र हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था. 2008 तक ज्ञानेंद्र शाह नेपाल के राजा हुआ करते थे. लेकिन माओवादी आंदोलन के चलते ज्ञानेंद्र शाह को सिंहासन खाली करना पड़ा. नेपाल के इतिहास की बात की जाए तो एक ही राजपरिवार शाह वंश के सदस्यों का शासन रहा, जो कि खुद को प्राचीन भारत के राजपूतों का वंशज मानते थे. शाह वंश ने 1768 से साल 2008 तक 240 साल देश पर शासन किया. 2008 में राजशाही को खत्म कर दिया गया. जिसके बाद पूर्व राजा ज्ञानेंद्र को राजमहल खाली करने को कहा गया. राजमहल खाली करने के बाद कुछ समय के लिए वह नागार्जुन पैलेस में रहे और बाद में आम आदमी की तरह जीवन व्यतीत करने लगे.  

नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता से लोग परेशान, राजशाही की हवा बनने लगी

हाल ही में राजशाही की वापसी की मांग ने जोर पकड़ लिया है. नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र राजनीतिक तौर पर बहुत सक्रिय नहीं थे, लेकिन इसी साल फरवरी में ज्ञानेन्द्र ने कहा था, “समय आ गया है कि हम देश की रक्षा करने और राष्ट्रीय एकता लाने की जिम्मेदारी लें.” जिसके बाद उन्होंने कई राजनीति बयान दिया. कुछ ही दिन पहले जब नेपाल के पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह पोखरा प्रवास से काठमांडू लौटे थे तो उनके स्वागत में एयरपोर्ट पर हजारों लोगों की भीड़ जमा हुई थी. वहां मौजूद लोगों ने नारायणहिटी खाली गर, हाम्रो राजा आउंदै छन के नारे लगाए, जिसका मतलब होता है, राजा का महल खाली करो, हमारे राजा आ रहे हैं’. दरअसल लोग नेपाल में बढ़ती महंगाई से परेशान हैं, साथ ही भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता भी लोगों के असंतुष्टि का कारण है. आंकड़ों पर गौर किया जाए तो साल 2008 से नेपाल में तकरीबन 13 सरकारें बन चुकी हैं. 

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