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जख्मों से उबरा पाकिस्तान, नूर खान एयरबेस पर MbZ का स्वागत

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ऑपरेशन सिंदूर से मिले जख्मों से पाकिस्तान उबरने लगा है. यही वजह है कि पाकिस्तान ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद का स्वागत उस नूर खान एयरबेस पर किया, जिसे ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई) के दौरान भारतीय वायुसेना ने तबाह कर दिया था. ये वही नूर खान बेस है जहां भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के परमाणु कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को तबाह कर न्यूक्लियर-ब्लफ की हेकड़ी निकाल दी थी.

भारत की एयर-स्ट्राइक के बाद 07 महीने तक बंद रहा था नूर खान एयरबेस

अब पाकिस्तान ने यूएई के राष्ट्रपति के भव्य स्वागत का वीडियो जारी किया है जिसमें नूर खान एयरबेस लिखा देखा जा सकता है. पाकिस्तान ने ऐसा इसलिए किया है ताकि दुनिया को दिखा सके कि यहां सब कुछ ठीक है. जबकि हकीकत ये है कि पाकिस्तानी वायुसेना ने इसे बंद करने के लिए कई बार नोटम (नोटिस टू एयरमैन) जारी किया था. लेकिन सात महीने की मरम्मत के बाद रावलपिंडी के करीब पाकिस्तान का ये सामरिक एयरबेस फिर से ऑपरेशन्ल हो गया है.

शुक्रवार को पाकिस्तान ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन ज़ायद का नूर खान एयरबेस पर भव्य स्वागत किया था. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर खुद अगवानी के लिए नूर खान एयरबेस पहुंचे थे.

अमेरिका के परमाणु हथियारों का ‘स्टोरेज’ है नूर खान बेस पर

ये भी माना जाता है कि इस नूर खान एयरबेस पर अमेरिका के परमाणु हथियारों का स्टोरेज था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, भारत ने जब इस कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को बर्बाद किया तो अमेरिका तिलमिला गया और भारत से युद्धविराम का आह्वान किया.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जिस तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दखलअंदाजी करने की कोशिश की, उससे हर कोई हैरान था. खुद पाकिस्तान के एक जाने-माने सिक्योरिटी विशेषज्ञ इम्तियाज गुल ने दावा किया था कि जिस नूर खान एयर बेस पर भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमला किया था, वहां अमेरिका के परमाणु हथियारों का स्टोरज था. यानी पाकिस्तान में अमेरिका अपने परमाणु हथियार रखता है.

ट्रंप प्रशासन को भी इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि भारत, पहलगाम आतंकी हमले का बदला पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को तबाह कर लेगा. यही वजह है कि जो अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, कुछ दिनों पहले तक भारत और पाकिस्तान के विवाद से खुद को अलग रखने की दुहाई दे रहे थे, महज चार दिनों (6/7- 9/10 मई) के दौरान हुई भारत की कार्रवाई से हिल गए और प्रधानमंत्री मोदी को फोन कर सैन्य टकराव बंद करने का आह्वान किया था.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ट्रंप ने इस बात का दावा किया था कि अगर भारत और पाकिस्तान में चल रहा मिलिट्री टकराव नहीं रोका जाता तो ये एक परमाणु युद्ध में तब्दील हो सकता था. हालांकि, भारत ने आधिकारिक तौर से ऐसे किसी भी दावे और ट्रंप के बीच-बचाव से साफ इनकार किया था.  

पीएम मोदी ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर ब्लफ पर किया था प्रहार

ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक तौर से कहा था कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर-ब्लफ को बेनकाब कर दिया गया है. पीएम ने साफ तौर से कुछ नहीं कहा था लेकिन इशारा साफ था कि पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को तबाह करने के बाद पाकिस्तानी सेना के परमाणु हथियार पूरी तरह फुस्स हो गए थे. क्योंकि बिना कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के इन हथियारों को लॉन्च नहीं किया जा सकता था.

पहलगाम हमले के बाद से ही पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों की धौंस दिखा रहा था. भारत के हमले का जवाब देने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और दूसरे नेता, न्यूक्लियर हथियार के इस्तेमाल की बात कर रहे थे. लेकिन 9-10 मई को जब भारत ने नूर खान एयर बेस और किराना हिल्स पर ब्रह्मोस मिसाइल से सटीक निशाना लगाते हुए तबाह किया, पाकिस्तान हुक्मरान घुटनों पर आ गए और ट्रंप के समक्ष मिमियाने लगे.

पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय जीएचक्यू के बेहद करीब नूर खान एयरबेस पाकिस्तान का एक मेजर ऑपरेटिंग बेस है जहां सी-130 जे सुपर हरक्युलिस मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तैनात थे. पाकिस्तान के लिए नूर खान इसलिए एक सामरिक शिकस्त थी क्योंकि, इस बेस का नाम पाकिस्तानी वायुसेना के पूर्व चीफ नूर खान के नाम पर रखा गया था.

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