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बैलिस्टिक मिसाइल की कमी पूरी करेगी प्रलय, महज 60 सेकेंड में कर देगी दुश्मन का नाश

रक्षा क्षेत्र में दुश्मनों पर प्रलय मचाने के लिए भारत के पास आ गई है क्वासी-बैलिस्टिक क्रूज मिसाइल ‘प्रलय’. महजा 60 सेकेंड में दुश्मनों को मिट्टी में मिलाने की क्षमता रखने वाली प्रलय मिसाइल को सफल परीक्षण किया गया है. 

थलसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) ने इस बेहद खास टेक्टिकल मिसाइल का टेस्ट किया है. लगातार दो दिनों तक इस मिसाइल ने अपना लक्ष्य भेदा.

प्रलय बैलिस्टिक क्रूज मिसाइल का दो बार सफल परीक्षण

डीआरडीओ के मुताबिक, “ओडिशा के तट के करीब डा.एपीजे अब्दुल कलाम आईलैंड पर 28 और 29 जुलाई को प्रलय मिसाइल के दो सफल परीक्षण किए गए. ये दोनों यूजर-ट्रायल परीक्षण थे. ऐसे में थलसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किए गए. एक साथ कई वॉर-हेड से लैस, प्रलय मिसाइल को अधिकतम और न्यूनतम रेंज की क्षमता परखने के लिए किया गया.” 

डीआरडीओ के मुताबिक, “मिसाइल ने ठीक वही ट्रेजेक्टरी फॉलो की जैसा की जरूरत थी और अपने लक्ष्य को सटीक भेद दिया.”

सफल परीक्षण के बाद प्रलय बैलिस्टिक मिसाइल थलसेना-वायुसेना के आयुध का हिस्सा बनेगी.

टेक्टिकल मिसाइल है प्रलय, कर्तव्य पथ पर दिखी थी झलक

प्रलय, एक टेक्टिकल मिसाइल है जिसकी रेंज 150-500 किलोमीटर है और दुश्मन के सीमावर्ती कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, रडार प्रणाली, छावनियों और एयरफील्ड को तबाह करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. 

‘नो फर्स्ट यूज’ नीति के चलते, प्रलय मिसाइल का टेस्ट बेहद अहम है. क्योंकि ये मिसाइल, पारंपरिक और बैलिस्टिक मिसाइल के गैप को भरने में मदद करेगी.

इस साल गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर डीआरडीओ ने प्रलय मिसाइल का पहली बार प्रदर्शन किया था. मिसाइल को अशोक लीलैंड ट्रक से लॉन्च किया जा सकता है. ऐसे में मिसाइल को एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है.

ब्रह्मोस और निर्भय मिसाइल श्रेणी में रॉकेट फोर्स का हिस्सा बनेगी प्रलय

प्रलय अब देश की ब्रह्मोस और निर्भय मिसाइल की श्रेणी में रॉकेट फोर्स का हिस्सा बनने जा रही है. रक्षा मंत्रालय ने कुछ महीने पहले ही थलसेना के लिए 250 प्रलय मिसाइलों खरीदन की हरी झंडी दी थी. साथ ही वायुसेना के लिए 120 मिसाइल का ऑर्डर दिया गया है. डीआरडीओ की इस मिसाइल का उत्पादन सरकारी उपक्रम, भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) कर रही हैं.

आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस है प्रलय: राजनाथ सिंह

प्रलय के सफल यूजर-ट्रायल पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, आर्म्ड फोर्सेज और इंडस्ट्री पर शुभकामनाएं दी हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि “ये मिसाइल, आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस है. ऐसे में सशस्त्र सेनाओं को खतरों से निपटने में तकनीकी रुप से बढ़त मिलेगी.” 

परीक्षण के बाद डीआरडीओ के चेयरमैन डा. समीर वी कामत ने कहा कि “इन टेस्ट से प्रलय मिसाइल का सशस्त्र सेनाओं में शामिल होने का रास्ता खुल गया है.”

इसकी विशेषताएँ बनाती हैं खास

‘प्रलय’ जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल करती है, जिससे यह अपने लक्ष्य को बिल्कुल सही जगह पर मार सकती है. इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सके. यह मिसाइल सुपरसोनिक गति से उड़ान भरती है, यानी यह आवाज की गति से भी तेज चलती है. इसका वजन लगभग 5 टन (5000 किलो) है, जिसमें इसका फ्यूल और वॉरहेड शामिल होता है.

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