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हथियारों को सिर्फ Assemble न करें, राजनाथ ने कंपनियों को दिया खुद बनाने पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डिफेंस सेक्टर की प्राइवेट इंडस्ट्री को सलाह दी है कि देश में सिर्फ हथियारों की असेंबली ने करें बल्कि खुद बनाकर तैयार करें. रक्षा मंत्री ने निजी कंपनियों द्वारा तैयार किए जा रहे हथियारों में स्वदेशी कंटेट बढ़ाने को लेकर भी आह्वान किया.

सोमवार को सोसायटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चर्रस (एसआईडीएम) के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ” हमारा उद्देश्य सिर्फ भारत में असेंबल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि सही मायनों में हमें अपने देश के भीतर तकनीक आधारित निर्माण करना होगा. हमें यह सुनिश्चित करना होगा, कि जो भी (विदेश से) टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो, वह दमदार हो और हमारे स्वदेशी इंडस्ट्री को मजबूत बनाने का भी माध्यम बने.”

सेना कर रही हैं स्वदेशी उपकरणों की शिकायत

दरअसल, सशस्त्र सेनाओं की तरफ से ऐसी लगातार शिकायत आ रही हैं कि प्राइवेट कंपनियों के हथियारों में स्वदेशी कंटेंट कम है या फिर विदेशी उपकरण होने के बावजूद स्वदेशी बनाकर पेश किया जा रहा है.

रक्षा मंत्री ने दिया चीन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया का उदाहरण

चीन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कोई भी देश हो, वह आरएंडडी (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) के बिना आगे नहीं बढ़ सकता. राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया में कहीं भी, अगर कोई अच्छी प्रैक्टिस हो रही है, तो उसको अपनाने में हमें पीछे नहीं हटना चाहिए.

खुद मैन्युफैक्चर करें हथियार, राजनाथ की सलाह

राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का भी यही प्रयास है, कि भारत में सैन्य उपकरण सिर्फ असेंबल न हो, बल्कि सही मायने में मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार हो, ताकि हर एक स्क्रू, हर एक सर्किट, हर एक प्लेटफार्म भारत में बने और “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” की भावना को साकार करें.”

सरकारी कंपनियों की तर्ज पर मिलेगा लेवल प्लेइंग फील्ड: राजनाथ

रक्षा मंत्री ने हालांकि, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी कंपनियों की भागीदारी की प्रशंसा की और सरकारी कंपनियों के साथ लेवल प्लेइंग फील्ड प्रदान करने का भरोसा दिया. राजनाथ ने कहा कि पिछले दस वर्षों में हमने जो मेहनत की, उसका परिणाम यह है, कि हमारा स्वदेशी रक्षा उत्पादन, जो 2014 में जहां मात्र 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर रिकॉर्ड 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है. बड़ी बात यह है, कि इसमें से 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान प्राइवेट सेक्टर  से आना, यह दर्शाता है कि आत्मनिर्भर भारत के इस अभियान में निजी उद्योग भी भागीदार बन रहे हैं.

ऑपरेशन सिंदूर में इंडस्ट्री वॉरियर्स की भूमिका सराहनीय

राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय सैनिकों के साथ-साथ, उन सबको भी जाता है, जो पीछे रहकर उस मिशन को सफल बनाने में लगे हुए थे. आप जैसे इंडस्ट्री वॉरियर्स, जिन्होंने इनोवेशन, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर, जी-तोड़ काम किया. वह भी इस जीत के उतने ही हकदार हैं.

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