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जर्मन बोल रहे होते फ्रांसीसी नागरिक, अमेरिका का तंज, वापस मांगी थी स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी

स्रोत: सोशल मीडिया

अमेरिका और फ्रांस में रिश्ते इस कदर खराब हो चुके हैं कि एक दूसरे को दिए गए गिफ्ट भी वापस मांगे जाने लगे हैं. फ्रांस और अमेरिका में ताजा तनातनी उस वक्त देखने को मिली जब फ्रांस ने अमेरिका से स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी वापस मांगी. इसके जवाब में अमेरिका ने कहा, “अगर हम न होते तो आज फ्रांस, जर्मन बोल रहा होता.”

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद यूरोप के साथ अमेरिका के रिश्ते तनावपूर्ण हैं. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एकदूसरे को खास पसंद नहीं करते हैं. इसका उदाहरण मैक्रों का वाशिंगटन दौरा था, जिसमें मैक्रों ने ट्रंप को खुलेआम मीडिया के सामने टोक दिया था, जिससे राष्ट्रपति ट्रंप को खिसियाते हुए देखा गया था.

हम न होते तो फ्रांस बोल रहा होता जर्मन: कैरोलिन लेविट

फ्रांस के एक नेता ने अमेरिका से प्रसिद्ध स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को वापस करने की मांग कर दी है, जिसपर अमेरिका ने तीखा पलटवार किया है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “बिल्कुल नहीं. उस फ्रांसीसी राजनेता को मेरी सलाह होगी कि उन्हें याद दिलाएं कि यह सिर्फ अमेरिका ही वो वजह से है कि फ्रांस के लोग अभी जर्मन नहीं बोल रहे हैं. उन्हें हमारे महान देश का आभारी होना चाहिए.” 

लेविट का कटाक्ष द्वितीय विश्वयुद्ध की तरफ था जब अमेरिकी सेना ने फ्रांस की मदद की थी. जर्मनी की हिटलर सेना फ्रांस पर पूरी तरह कब्जा करने वाली ही थी कि अमेरिका सेना ने यूरोप में पहुंच कर महायुद्ध का रूख पलट दिया. फ्रांस के नॉरमैंडी में लैंडिंग कर अमेरिकी सैनिकों ने एक बेहद ही जोखिम भरी लड़ाई के जरिए जर्मनी को पीछे धकेलने में कामयाबी हासिल की थी.

फ्रांस ने अमेरिका से मांगी स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी 

अमेरिकी सरकार से परेशान फ्रांस के सोशलिस्ट और डेमोक्रेटिक समूह के नेता राफेल ग्लुकसमैन ने टैरिफ लगाने की धमकी देने के लिए डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की थी. राफेल ग्लुकसमैन ने कहा, “मैं उन अमेरिकियों से दो बातें कहना चाहूंगा, पहली यह कि वह जो वैज्ञानिकों को काम से निकाल रहे हैं, अत्याचारियों का साथ दे रहे हैं, वह अब हमारे तोहफे के लायक नहीं है.”

राफेल ने कहा, अमेरिका को अब हमारे द्वारा 1886 में तोहफे में दिया गया ‘स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी’ को वापस कर देना चाहिए. फ्रांस ने इसे आपको एक उपहार के रूप में दिया था, लेकिन आप इसकी कद्र नहीं करते, यह निश्चित ही है कि आप इसे तुच्छ समझते हैं, इसलिए आप इसे वापस कर दीजिए यह अपने घर यानि फ्रांस में ठीक रहेगा.”

क्या है स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का इतिहास

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी का अनावरण 28 अक्तूबर 1886 को न्यूयॉर्क के बंदरगाह में किया गया था, इसे फ्रांस ने अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा के शताब्दी वर्ष को मनाने के लिए उपहार में दिया था.  यह अमेरिका और फ्रांस की दोस्ती का प्रतीक है. यह स्टैच्यू जुलाई 1884 में फ्रांस में बनी थी. पेरिस में सीन नदी के एक छोटे से द्वीप पर इस प्रतिमा की एक छोटी से प्रति लगी हुई है. मूर्ति के मुकुट पर 7 किरणें हैं, जो दुनिया के 7 महाद्वीपों और 7 महासागरों का प्रतीक है.

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