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व्यवस्थित World Order समय की मांग: राजनाथ

मध्य-पूर्व एशिया में बढ़े सैन्य संघर्ष के बीच भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न्यू वर्ल्ड ऑर्डर की जगह व्यवस्थित विश्व व्यवस्था को मौजूदा समय की जरूरत बताई है.  

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूस, चीन के समकक्षों के बीच कहा, हमें ऐसी व्यवस्था की जरूरत है जहां हर व्यक्ति को सम्मान मिले, जहां मतभेद विवाद का रूप न लें और विवाद विनाश और आपदा का कारण ना बनें.

राजनाथ सिंह बोले, आज की असली चुनौती किसी व्यवस्था की अनुपस्थिति नहीं बल्कि स्थापित नियमों पर सिद्धातों पर प्रश्नचिन्ह लगाने की प्रवृति है.

जोर जबर्दस्ती नहीं, संवाद-डिप्लोमेसी का रास्ता सही: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने किर्गिस्तान के दौरे पर सेंट्रल एशिया में चल रहे युद्ध और अनिश्चितताओं पर खुलकर बात की है. बिश्केक में एससीओ के सम्मेलन को संबोधित करते हुए  राजनाथ सिंह ने कहा, कि “एससीओ दुनिया की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है इसलिए हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करें.”

डिप्लोमेसी को जरूरत बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा, “हमें डायलॉग और डिप्लोमेसी का रास्ता अपनाते रहना चाहिए न कि जोर जबरदस्ती का. हमें इसे हिंसा और युद्ध का युग नहीं बनने देना है बल्कि शांति और समृद्धि का युग बनाना है.”

महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, “मैं महात्मा गांधी के संदेश को याद दिलाना चाहता हूं कि आँख के बदले आँख पूरी दुनिया को अंधा बना देती है, और हर कार्य से पहले हमें यह याद रखना चाहिए कि वह कार्य एक गरीब और जरूरतमंद के जीवन में क्या बदलाव ला सकता है.”

“हमें ये याद रखना होगा कि शक्ति की अग्नि परीक्षा गरीब और कमजोर के खिलाफ इस्तेमाल करने में नहीं है बल्कि उन लोगों के हित में इस्तेमाल करने में है जो खुद की रक्षा नहीं कर सकते.”

दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं संघर्ष: राजनाथ सिंह

राजनाथ सिंह ने वैश्विक संघर्षों का मुद्दा उठाते हुए है, “आज के समय में दुनिया में एकतरफावाद और संघर्ष तेजी से बढ़ रहे हैं. वैश्विक सहमति कमजोर हो रही है और मतभेद ज्यादा हो गए हैं. यह समय रक्षा और सुरक्षा तंत्र के लिए आत्ममंथन का है. आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ आज सबसे बड़े वैश्विक खतरे बन चुके हैं. इन वैश्विक संघर्षों के समाधान में एससीओ अहम भूमिका निभा सकता है.”

राजनाथ सिंह ने शंघाई सहयोग संगठन यानि एससीओ की तारीफ करते हुए कहा, आत्म केंद्रित होते देशों के बीच एससीओ एकता और सहयोग का प्रतीक है.

आपको बता दें कि शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एक यूरेशियाई राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी. इसका मुख्यालय बीजिंग, चीन में है. एससीओ के सदस्य देशों में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं, जो क्षेत्रीय स्थिरता और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हैं.

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