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सत्ता पर मोदी की पकड़ हुई कमजोर: World मीडिया

Modi with NDA (coalition) partners.

By Akansha Singhal

भारत के आम चुनावों के नतीजों पर टकटकी लगाए बैठे इंटरनेशनल मीडिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर टिप्पणी की है. चुनाव से पहले ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारत-विरोधी एजेंडा शुरु कर दिया था. मोदी सरकार पर अल्पसंख्यक विरोधी होने, गरीबी और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर कटाक्ष किए गए थे. जैसे ही मोदी सरकार की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और गठबंधन सरकार की तरफ बढ़ने लगे, वर्ल्ड मीडिया ने मोदी की ‘अजेय-छवि’ को झटका और ‘ओवर-कॉन्फिडेंस’ को हेडलाइन बनाया है. 

बीबीसी

प्रधानमंत्री (कार्यवाहक) नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार को स्पष्ट बहुमत न मिलने और विपक्ष का मजबूत प्रदर्शन भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाता है.

नए कार्यकाल में मोदी सरकार को बिना स्पष्ट बहुमत के काम करना होगा, जो राजनीतिक स्थिरता और नीतिगत निर्णयों के लिए एक चुनौती हो सकती है.

न्यूयॉर्क टाइम्स

नरेंद्र मोदी की अजेय छवि को इस चुनाव में करारा झटका लगा है, जहां उनकी पार्टी भाजपा ने अपेक्षित लैंडस्लाइड जीत नहीं हासिल की.

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने बहुमत तो हासिल कर लिया, लेकिन भाजपा को दर्जनों सीटों का नुकसान हुआ, जिससे उसकी निर्भरता गठबंधन सहयोगियों पर बढ़ गई है.

नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला है, जो केवल एक अन्य भारतीय नेता ने हासिल किया है, लेकिन इस बार उन्हें सहयोगी दलों की मदद की जरूरत होगी.

मोदी की ब्रांड शक्ति अब चरम पर हो चुकी है.

चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी दलों में खुशी की लहर दौड़ गई, जिन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र को बचाने का प्रयास बताया.

मोदी को अब अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिए गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना होगा, जो उनके हिंदू-राष्ट्रवादी विचारधारा से सहमत नहीं हो सकते हैं.

मोदी के कार्यकाल में भारत ने वैश्विक मंच पर नई ऊंचाइयां हासिल की हैं और अपने बुनियादी ढांचे को उन्नत किया है, लेकिन उनके शासन में अल्पसंख्यकों का हाशिए पर जाना और असहमति पर सख्त रुख भी देखा गया है.

मुख्य विपक्षी दल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, जिसे पहले कमजोर माना जा रहा था, ने इस चुनाव में रोजगार, सामाजिक न्याय और मोदी सरकार की धनी उद्योगपतियों के साथ नजदीकी जैसे मुद्दों पर हमला कर अपना प्रभाव बढ़ाया है.

सीएनएन

भारत के चुनाव परिणाम मोदी के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है, जिन्होंने इस साल के चुनाव में 400 सीटों की सुपर-मेजोरिटी जीतने का संकल्प लिया था.

मोदी ने पिछले दो चुनावों में भाजपा के लिए सरल बहुमत हासिल कर अपनी पार्टी को एक चुनावी ताकत में बदल दिया था.

भारत के विपक्ष ने, जिसे चुनावों और कई विश्लेषकों द्वारा काफी हद तक खारिज कर दिया गया था, इस परिणाम को मोदी की विभाजनकारी शैली की अस्वीकृति के रूप में प्रस्तुत किया है.

आरटी (रशिया टूडे)

भारत की विदेश नीति में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा. भारत की विदेश नीति पर इसका असर कम पड़ता है कि कौन सी पार्टी सत्ता में आई है. ये इसलिए क्योंकि भारत की विदेश नीति राष्ट्रीय हितों पर निर्भर करती है. 

शिन्हुआ (चीन)

चीन ने शुक्रवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी चुनावी जीत की बधाई दी. चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यह घोषणा की। प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन-भारत के स्थिर संबंधों और क्षेत्र और विश्व के शांति और विकास के लिए उपयोगी हैं. 

ग्लोबल टाइम्स

भारत और चीन के संबंधों में कोई सुधार नहीं आएगा. भारत में आर्थिक सुधार भी अब तेजी से नहीं हो पाएगा. 

अलजजीरा (अरब देश)

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी पारी कठिन हो सकती है, जब उनकी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पहली बार दस वर्षों से सत्ता में आने के बाद सीधे बहुमत को हासिल नहीं कर पाई.

द डॉन (पाकिस्तान)

चुनाव ने मोदी को आईना दिखा दिया है. ओपिनियन लेख के जरिए लिखा गया कि जिन लोगों को डर था कि मोदी को एक और प्रचंड बहुमत मिलने वाला है, उन्हें सुखद आश्चर्य हुआ है

भले ही मोदी का सत्ता से जाना अभी दूर है लेकिन कुछ हफ्ते पहले की तुलना में अब यह करीब दिख रहा है. एक दशक पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी के पश्चिमी समकक्ष उनका आदर-सत्कार करते रहे हैं. आने वाले समय में भी मोदी का आक्रामक आचरण और रवैया शायद नहीं बदलेगा. लेकिन चुनाव में उनकी कम सीटें दिल्ली में आरएसएस की पकड़ के अंत की शुरुआत हो सकती है.’ 

अब से मोदी एक कमजोर नेता बन जाएंगे, अमित शाह का भी यह आखिरी पड़ाव ही है. भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के अगले पांच सालों तक शासन करने की उम्मीद है. लेकिन, मौजूदा रुझानों को देखते हुए, यह इससे आगे नहीं जा पाएगा. 

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