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ईरान में आपसी खींचतान, होर्मुज के भंवर में फंसा अमेरिका

होर्मुज के भंवर में फंसे सुपर पावर अमेरिका के सारे दांव उल्टे पड़ गए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ भले ही ये दावा करें कि होर्मुज नाकेबंदी सफल रही लेकिन दुनिया जानती है कि आईआरजीसी के सामने ये फेल रही है. वहीं अब ऑपरेशन फ्रीडम का भी यही हाल है. यूरोप ने अमेरिका से पल्ला झाड़ ही लिया है, तो होर्मुज की जंग में अमेरिका का निकलना मुश्किल हो रहा है.

अमेरिकी नौसेना ने ईरान की मिलिशिया आईआरजीसी के कब्जे से होर्मुज को मुक्त कराने के लिए उनकी फास्ट अटैक बोट्स को मार गिराने का दावा किया. लेकिन ईरान की ओर से कहा गया कि अमेरिका ने जिस बोट को निशाना बनाया उसमें आम लोग सवार थी. वो बोट आईआरजीसी की नहीं बल्कि सिविल बोट थी. ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि इन हमलों में पांच मासूम नागरिकों की जान चली गई.

अमेरिका ने ऑयल टैंकर और दूसरे कार्गो जहाजों को सुरक्षित होर्मुज पार कराने के लिए ऑपरेशन फ्रीडम लॉन्च किया,  लेकिन 5 मई यानी मंगलवार को एक भी जहाज होर्मुज पार नहीं कर पाया. ये तब है जब 24 घंटे पहले ही अमेरिका की सेंट्रल कमान यानी सेंटकॉम के कमांडर जनरल ब्रैड कूपर ने ओमान की खाड़ी में यूएस नेवी के जंगी बेड़े की ऑपरेशनल तैयारियों की खुद समीक्षा की थी.

वहीं ईरान में भी बहुत खींचतान जारी है. राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान जिन्हें तेहरान का उदारवादी नेता माना जाता है, उनपर कट्टरपंथी आईआरजीसी हावी होने की कोशिश में है. जिसके बाद राष्ट्रपति पेजेश्कियान के सलाहकार ने कड़े शब्दों में विरोध किया है और आईआरजीसी चीफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर निशाना साधा है. हाल ही में ऐसी रिपोर्ट भी सामने आई थी कि ईरान में मतभेद इतने बढ़ चुके हैं कि राष्ट्रपति और संसद के स्पीकर गालीबाफ ने अराघची को हटाने की सिफारिश तक कर दी थी.

अमेरिका ने ईरान की सिविल बोट पर किया हमला, भड़का तेहरान

अमेरिका ने होर्मुज नाकेबंदी के बाद ऑपरेशन फ्रीडम लॉन्च किया है. अमेरिका रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, ऑपरेशन फ्रीडम पूरी तरह से ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से अलग है. इसका उद्देश्य किसी भी तरह से ईरान पर हमला करना नहीं है. बल्कि, होर्मुज स्ट्रेट में फंसे अलग-अलग देशों के ऑयल टैंकर और मर्चेंट शिप्स को सुरक्षित नौवहन है.

लेकिन जिस तरह से पिछले 24-48 घंटों में आईआरजीसी यानी इस्लामिक रेवोल्यूशन कोर की कार्रवाई रही है, उससे ऐसा खतरा बना हुआ है कि ईरान जंग पार्ट-2 की आग कभी भी भड़क सकती है.

आईआरजीसी ने यूएस नेवी के एक जंगी जहाज पर दो मिसाइल दागने का दावा किया था. हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को सरासर गलत बताया. बाद में पता चला कि आईआरजीसी के हमले के कारण यूएई के एक जहाज को भारी नुकसान पहुंचा है. अमेरिकी नाकेबंदी से नाराज आईआरजीसी ने यूएई के फुजेराह बंदरगाह सहित दूसरे इलाकों में एक के बाद एक 19 मिसाइल और ड्रोन दागे थे.

यूएई पर हमलों का ईरानी राष्ट्रपति ने विरोध किया

आईआरजीसी की मनमानी को लेकर ईरान के भीतर भी बगावत के सुर भड़कने लगे हैं. खबर है कि ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने यूएई पर हमलों को लेकर आईआरजीसी का विरोध जताया है.

पेजेश्कियान के मीडिया सलाहकार, मेहदी तबतबई ने अपने एक्स अकाउंट पर पेजेश्कियान के खिलाफ बयान देने वालों की कड़ी आलोचना कर डाली. तबतबई ने लिखा कि “आज देश और समाज में विभाजन, द्वंद और कलह को बढ़ावा देने वाला हर शब्द और कथन युद्धकाल में पीछे से किए गए विषैले वार के समान है. वक्ता चाहे जो भी वेश धारण करे या किसी भी पद पर हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता!”

तबतबई ने आगे लिखा है कि “संगठित पाखंड और अज्ञानता, दोनों समान रूप से नुकसान पहुंचाते हैं.”

माना जा रहा है कि तबतबई ने ये बयान, पेजेश्कियान के धुर-विरोधी माने जाने वाले आईआरजीसी चीफ अहमद वाहिदी और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ लिखा है. क्योंकि पेजेश्कियान और अराघची के बीच तकरार की खबरें पहले भी सामने आ चुकी हैं.

तेहरान के भीतर आईआरजीसी और ईरानी सरकार के बीच तकरार की हकीकत, जो भी हो उसका खामियाजा सभी खाड़ी देशों सहित पूरी दुनिया को उठाना पड़ रहा है. क्योंकि तेल और गैस की आवाजाही पर जबरदस्त असर पड़ रहा है. अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी के चलते पूरी दुनिया में तेल संकट लगातार गहराता जा रहा है.

यूएई में किए गए इन हमलों में भारतीय मूल के तीन नागरिक भी घायल हुए हैं. इन हमलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बर्दाश्त से बाहर बताया है.

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