रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से पहले, रूस की सरकार ने अपने देश की संसद (डूमा) में भारत के साथ एक महत्वपूर्ण सैन्य समझौता को पेश किया है. रेसिप्रोकल एक्सचेंज ऑफ लॉजिस्टिक एग्रीमेंट (आरईओएलएस) नाम के इस करार के तहत दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के क्षेत्र में आ जा सकती हैं.
यह समझौता संयुक्त अभ्यास, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता और अन्य गतिविधियों के लिए दोनों देशों के बीच सैनिकों, युद्धपोतों और विमानों को एक-दूसरे के क्षेत्र में भेजने की अनुमति देता है.
इस समझौते का उद्देश्य भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग को बढ़ाना है, जिससे दोनों देशों को संयुक्त सैन्य अभ्यास, आपदा राहत और अन्य संचालन में समन्वय करने में मदद मिलेगी. यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
अगले हफ्ते, पुतिन का दो दिवसीय (4-5 दिसंबर) भारत दौरा होने जा रहा है. इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को मजबूत होने पर खास जोर दिया जाएगा.
माना जा रहा है कि इस दौरे के दौरान किसी बड़े रक्षा सौदे का ऐलान नहीं किया जाएगा. लेकिन भारत, एस-400 की बाकी बची दो बैटरियों को जल्द सप्लाई करने पर जोर दे सकता है. साथ ही एस-400 की अतिरिक्त मिसाइलों के लिए भी चर्चा होने की संभावना है.
रूस ने दौरे से पहले स्टील्थ फाइटर जेट सु-57 को भी मेक इन इंडिया के तहत भारत में बनाए जाने का ऑफर दिया है. लेकिन इस पर भारत की तरफ से कोई संकेत नहीं दिया गया है.
पुतिन का भारत दौरा, Duma में रूसी सरकार का खास बिल

