पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओजेके में जारी उग्र प्रदर्शनों के बीच शहबाज शरीफ की सरकार इस कदर डरी हुई है, कि उन्होंने अल-जज़ीरा तक को बैन कर दिया है. उस अल जजीरा को जो मुस्लिम देशों की रहनुमाई वाला मीडिया ग्रुप माना जाता है.
पीओके में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के बाद अल जज़ीरा के कई न्यूज प्लेटफॉर्म को पाकिस्तान ने बैन कर दिया है. पीओके में पाकिस्तान के फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर के आदेश के बाद सेना पीओके की आवाज दबाने के लिए कत्ल-ए-आम मचा रही है. इसी की पोल अल जज़ीरा अपने रिपोर्टिंग के माध्यम से कर रहा था.
अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग से नाराज पाकिस्तान ने इस कतर की मीडिया पर रोक लगा दी है. इस्लामाबाद के इस कदम से दोनों देशों के संबंधों में खटास आना तय है. (https://www.instagram.com/reel/DbpDAO-yXy3/?igsh=Mmt6a2dlajNqZnJ0)
पीओजेके में 100 से ज्यादा लोगों की मौत
अल जज़ीरा जिस तरह से पीओके में हो रहे प्रदर्शन को कवर कर रहा था उससे शहबाज शरीफ की सरकार और पाकिस्तान सेना के प्रमुख असीम मुनीर में बौखलाहट है. एक के बाद एक अल जज़ीरा की रिपोर्ट में पाकिस्तानी सेना की हिंसा को दिखाया जा रहा था. इसी बात से नाराज पाकिस्तान का अल जजीरा से मोहभंग हो गया. जबकि अल जज़ीरा को मुस्लिम देशों का हिमायती माना जाता रहा है.
असीम मुनीर ने पीओके के प्रदर्शनों की कवरेज को स्थानीय अखबारों और न्यूज चैनल में रुकवा दिया, लेकिन अल जज़ीरा के माध्यम से देश और विदेशों में पाकिस्तानी सेना की हैवानियत की तस्वीरें सामने आ रही थीं. पाकिस्तान के लोग भी अल जजीरा की रिपोर्ट्स पढ़ रहे थे और शेयर कर रहे थे.
पाकिस्तान के लोगों का कहना है कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पता चल रहा है कि सेना ने पीओके में लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी की है और 100 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिए हैं.
अल जज़ीरा से पाकिस्तान का मन उचाट
पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अल जज़ीरा की रिपोर्टिंग की आलोचना की है और मीडिया संगठन पर चुनावों और वोटिंग प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया है.6t
पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर बयान जारी करते हुए कहा, “हमने मुजफ्फराबाद के कुछ खास पोलिंग स्टेशनों से अल जजीरा की चुनिंदा रिपोर्टिंग पर ध्यान दिया है. सोच-समझकर चुने गए समय और कुछ खास लोगों के पहले से तय बयानों के जरिए, चैनल ने चुनावों और वोटिंग प्रक्रिया को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की है.”
पाकिस्तान ने अल जज़ीरा पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान ने कतर के मीडिया आउटलेट पर ‘येलो जर्नलिज्म’ करने का भी आरोप लगाया. यह शब्द ऐसी रिपोर्टों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें पाठकों को चौंकाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर लिखा जाता है.
पाकिस्तान ने अपने बयान में कहा, “इस तरह की येलो जर्नलिज्म केवल उन बाहरी ताकतों के एजेंडे की पुष्टि करती है जिनका अपना स्वार्थ है और जो इस चुनावी प्रक्रिया को अवैध ठहराने और मुजफ्फराबाद और एजेके के लोगों की इच्छा को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं.
आपको बता दें अल जज़ीरा अरब में बेहद ही लोकप्रिय है. चैनल और वेबसाइट को अल जज़ीरा नंबर 1 होने का दावा करता है. अल जजीरा मीडिया समूह का हेड ऑफिस कतर की राजधानी दोहा में है. अल जज़ीरा साल 1996 को दोहा में लॉन्च हुआ. अल जज़ीरा ग्रुप अरबी और अंग्रेजी में अपने कई चैनलों के माध्यम से खबर प्रसारित करता है. कहा जाता है कि अल जजीरा को कतर की सरकार से फंडिंग मिलती है, लेकिन अल जजीरा आरोपों को बेबुनियाद बताता है.

