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टी-90 टैंक की हॉर्स पावर में बढ़ोत्तरी को मंजूरी, रणभूमि में होगी तेज मूवमेंट

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टी-72 टैंक के बाद भारतीय सेना ने टी-90 ‘भीष्म’ टैंक की शक्ति बढ़ाने का फैसला लिया है. टी-90 टैंक में अब 1000 हॉर्स पावर की बजाए 1350 एचपी के इंजन लगाए जाने की तैयारी है. इस बाबत, रक्षा मंत्रालय ने नए इंजन खरीदने की मंजूरी दे दी.

गुरूवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने कुल आठ सैन्य प्रस्तावों के खरीदने की स्वीकृति (एओएन) दी. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, कुल 54 हजार करोड़ की खरीद को मंजूरी दी गई है. इनमें टी-90 टैंकों के लिए उन्नत इंजन की खरीद को मंजूरी दी गई है.

रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि “1350 हॉर्स-पावर के इंजन इन टैंकों की युद्धक्षेत्र गतिशीलता में बढ़ोतरी होगी. विशेषकर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मूवमेंट तेजी से हो पाएगी, क्योंकि इससे शक्ति-भार अनुपात में वृद्धि होगी.”

इसी महीने की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय ने सेना के टी-72 टैंकों के लिए रूस की रोसोबोरोनएक्सपोर्ट कंपनी से 1000 हॉर्स पावर (एचपी) खरीदने का करार किया था. हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने ये खुलासा नहीं किया था कि इस डील में कितने इंजन शामिल हैं, लेकिन सौदे की कीमत 248 मिलियन डॉलर यानी करीब 2200 करोड़ बताई गई थी.

सेना के टी-90 टैंक को बुलाया जाता है ‘भीष्म’

टी-90 ‘भीष्म’, भारतीय सेना के सबसे एडवांस टैंक में से एक हैं जिन्हें भारत ने रूस की मदद से तैयार किया है. करीब 25 साल पहले, भारत ने कुछ टी-90 टैंक को सीधे रूस से खरीद कर देश में ही असेंबल किया था. अब इन टैंक का निर्माण भारत में ही किया जाता है. नए टी-90 टैंक को एटीजीएम (एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल) से लैस किया गया है ताकि दुश्मन के टैंक को लंबी दूरी पर ही तबाह कर दिया जाए.

सेना ने हालांकि, टी-90 टैंक की संख्या के बारे में कभी खुलासा नहीं किया है लेकिन माना जाता है कि भारतीय सेना के पास 1000 से भी ज्यादा भीष्म टैंक मौजूद हैं.

हाल ही में टी-90 टैंकों ने की थी आर्मर्ड वारफेयर ड्रिल

फरवरी के महीने में सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा में तैनात भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर ने टी-90 (भीष्म) टैंक के जरिए एक महीने की लाइव फायरिंग एक्सरसाइज को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था. कॉम्बैट तैयारियों को परखने के लिए की गई इस आर्मर्ड वारफेयर ड्रिल में टैंक के साथ रियल-टाइम में ड्रोन का इस्तेमाल भी किया गया था.

सिलीगुड़ी कॉरिडोर और नॉर्थ सिक्किम की सुरक्षा का किया गया था ड्रिल

एक्सरसाइज में हाई एल्टीट्यूड वारफेयर क्षमताओं को एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ इंटीग्रेट कर आधुनिक बैटलफील्ड में भी परखा गया. क्योंकि सिलीगुड़ी कॉरिडोर के साथ ही सुकना (दार्जिलिंग) स्थित त्रिशक्ति कोर (33वीं कोर), चीन और भूटान से सटे डोकलाम और नॉर्थ सिक्किम की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संभालती है.

डीएसी ने नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो की खरीद की मंजूरी भी दी

भारतीय नौसेना के लिए वरुणास्त्र टॉरपीडो (लड़ाकू) की खरीद के लिए भी एओएन को डीएसी द्वारा मंजूरी दी गई है. वरुणास्त्र टारपीडो नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित एक स्वदेशी जहाज से प्रक्षेपित होने वाला पनडुब्बी रोधी टारपीडो है. इस टारपीडो की अतिरिक्त मात्रा को शामिल करने से शत्रुओं से उत्पन्न होने वाले पनडुब्बी खतरों के विरुद्ध नौसेना की क्षमता में वृद्धि होगी.

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