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ताइवान का भारत को ऑफर, चीन की मदद से नहीं बन पाएंगे आत्मनिर्भर

चीन और ताइवान में लगातार बढ़ रही टेंशन और अमेरिका के हाथ खींचे जाने की आशंका के बीच ताइवान ने दिया है भारत को बड़ा ऑफर. भारत और चीन के बीच अच्छा व्यापारिक रिश्ता है, ऐसे में चीन पर निर्भरता कम करने के लिए ताइवान ने भारत में निवेश करने की इच्छा जताई है.

चीन का दुश्मन ताइवान, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश करना चाहता है. ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) ने रायसीना डायलॉग में भारत के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करने की बात कही है. ताइवान ने कहा है कि “हमारी मदद से भारत मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर बन सकता है.”

ताइवान के एनएसए ने किया भारत का दौरा

पिछले कुछ महीनों में भारत और चीन के बीच सुधरते रिश्तों के बीच ताइवान के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) सू चिन शू ने कहा है कि ताइवान, “भारत को चीन पर व्यापारिक निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है. ताइवान के एनएसए ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की पैरवी की है, जिससे भारतीय बाजार में ताइवान का निवेश बढ़ेगा और चीन से आयात भी कम होगा.”

ताइवान के एनएसए सू चिन शू ने दिल्ली में आयोजित हुए रायसीना डायलॉग के दौरान कहा कि “भारत की विशाल युवा आबादी और ताइवान की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बना सकते हैं. भारत को अब चीन से आयात करने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक और इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी यानि आईसीटी उत्पादों का उत्पादन खुद करना चाहिए और इसमें ताइवान उसकी मदद कर सकता है. इससे भारत को मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देने का मौका मिलेगा.”

इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में भारत की मदद कर सकता है ताइवान

ताइवान के एनएसए के मुताबिक, “ताइवान दुनिया के कुल सेमीकंडक्टर उत्पादन का 70% करता है और हाईटेक चिप्स का 90% निर्माण करता है. ये चिप्स स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, डाटा सेंटर, लड़ाकू विमान और एआई तकनीक में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं. ताइवान, भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के उत्पादन में सहयोग करने के लिए तैयार है, जिससे भारत को चीन से महंगे आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी.”

हालांकि एनएसए ने इस बात पर जोर दिया कि “भारत में आयात शुल्क बहुत अधिक हैं, जिससे व्यापारिक संभावनाओं पर असर पड़ता है. अगर भारत-ताइवान के बीच एफटीए लागू होता है, तो ताइवान की कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर निवेश करेंगी और इससे भारतीय”उद्योगों को ताइवान से नई तकनीक मिल सकेगी.”

भारत और ताइवान के बीच कैसे रिश्ते हैं? 

भारत, ताइवान का 17वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारतीय बाजार में ताइवान की कंपनियों ने अब तक 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक का निवेश किया है. यह निवेश फुटवियर, मशीनरी, ऑटोमोबाइल, पेट्रोकेमिकल्स और आईसीटी सेक्टर में किया गया है. पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार के सत्ता में आने से ताइवान के साथ कूटनीतिक रिश्तों में मजबूती आई है. पिछले साल अक्टूबर में ताइवान ने मुंबई में आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र (टीईसीसी) खोला है. भारत में ताइपे के कुछ 3 कार्यालय हैं. हालांकि उस वक्त चीन ने मुंबई में ताइपे के खोले गए कार्यालय का विरोध किया था.

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था, “विश्व में केवल एक ही चीन है और ताइवान चीन का अभिन्न अंग है. चीन ताइवान और अन्य देशों के बीच सभी प्रकार के आधिकारिक संपर्क और बातचीत का विरोध करता है.” अब जब भारत और चीन में रिश्ते पटरी पर लौट रहे हैं, तो ताइवान का भारत को दिया ये ऑफर चीन को एक बार फिर अखर सकता है.   

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