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हेगसेथ ने US आर्मी चीफ को निकाला, ईरान में ग्राउंड अटैक को लेकर मतभेद गहराए

ईरान के साथ जारी जंग में पिछड़ी अमेरिकी सेना पर उतरा है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा. ट्रंप के निर्देशों के बाद रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने अमेरिकी आर्मी चीफ रैंडी जॉर्ज समेत 03 बड़े जनरल को बर्खास्त कर दिया है. ईरान जंग एक अहम निर्णायक मोड़ पर है, लेकिन इस बीच आर्मी चीफ को हटाए जाने के बाद अमेरिकी सेना में भारी उथल-पुथल मच गई है. पेंटागन ने टॉप जनरल को हटाए जाने की जानकारी साझा की, लेकिन इसके पीछे वजह क्या रही उसपर चुप्पी साध ली.

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ट्रंप और पीट हेगसेथ, ईरान जंग में सेना की परफॉर्मेंस से नाखुश हैं. क्योंकि अटैक के वक्त ट्रंप ने वेनेजुएला जैसी जीत के बारे में सोचा था. लेकिन ईरान में दांव उल्टा पड़ गया. लगातार ईरान हावी है, और सुपरपावर को ना सिर्फ चुनौती दे रहा है बल्कि भारी नुकसान भी पहुंचा रहा है.  

तत्काल प्रभाव से आर्मी चीफ हटा दिए गए हैं: पेंटागन

पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने आर्मी चीफ की बर्खास्तगी की जानकारी साझा करते हुए सभी को चौंका दिया. शॉन पार्नेल ने कहा- जनरल रैंडी जॉर्ज “तत्काल प्रभाव से आर्मी के 41वें चीफ ऑफ स्टाफ के पद से हटा दिए गए हैं.”

पेंटागन के अधिकारियों ने जॉर्ज की बर्खास्तगी का कोई कारण नहीं बताया. लेकिन ये फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है, जब अमेरिका-इजरायल मिलकर ईरान के साथ युद्ध लड़ रहे हैं.

ट्रंप के रक्षामंत्री हेगसेथ ने रैंडी जॉर्ज के साथ ही आर्मी जनरल डेविड होडने और मेजर जनरल विलियम ग्रीन को भी हटा दिया है.

जबसे ट्रंप प्रशासन सत्ता में आई है और पीट हेगसेथ को रक्षा सचिव बनाया गया है, एक दर्जन से अधिक आर्मी अधिकारी हटाए जा चुके हैं. पिछले फरवरी में में पीट हेगसेथ ने नौसेना की शीर्ष अधिकारी एडमिरल लिसा फ्रैंचेटी और वायु सेना के दूसरे नंबर के प्रमुख जनरल जिम सिल्फे सहित शीर्ष सैन्य नेताओं को हटा दिया था. उसी समय, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तत्कालीन ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल चार्ल्स सीक्यू ब्राउन को भी बर्खास्त कर दिया था.

अमेरिका का काबिल जनरल माने जाते हैं रैंडी जॉर्ज

अमेरिकन आर्मी में आर्मी चीफ का पद अमूमन 4 वर्षों का होता है, और नियम के मुताबिक जनरल जॉर्ज को अभी एक वर्ष और इस पद पर रहना था, क्योंकि उन्होंने अगस्त 2023  में आर्मी चीफ का पद संभाला था. जनरल जॉर्ज की नियुक्ति बाइडेन प्रशासन के दौरान हुई थी.

अमेरिकी थल सेना के चीफ रैंडी जॉर्ज सेना के काबिल अफसर हैं. रैंडी जॉर्ज पहले खाड़ी युद्ध के साथ-साथ इराक और अफगानिस्तान में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

सर्वोच्च पद संभालने से पहले, जॉर्ज ने सेना के उप प्रमुख के रूप में और उससे पहले तत्कालीन रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार के रूप में कार्य किया. और बाद में सेना में वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाएं संभालीं.

पीट हेगसेथ ने अपने सलाहकार को दिया आर्मी चीफ का पद

रैंडी जॉर्ज की बर्खास्तगी के बाद जनरल क्रिस्टोफर ला नीव को नया कार्यवाहक आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया है. ला नीव पिछले साल अक्टूबर में ट्रंप द्वारा अचानक आर्मी के वाइस चीफ ऑफ स्टाफ के पद के लिए नामित किए गए थे. उस समय वो हेगसेथ के टॉप मिलिट्री सलाहकार थे. लानेव दक्षिण कोरिया में आठवीं सेना की कमान संभालने के बाद हेगसेथ के शीर्ष सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने एक साल से भी कम समय तक सेवा की थी.

ला-नेव इससे पहले वाइस चीफ थे और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन का नेतृत्व कर चुके हैं. पेंटागन ने उन्हें ‘अनुभवी और भरोसेमंद’ बताया है, जो प्रशासन की नीतियों को सही तरीके से लागू कर सकते हैं।

ईरान पर हमले को लेकर अमेरिकी सेना में मतभेद?

ईरान के साथ जारी युद्ध के एक अहम मोड़ पर आर्मी चीफ को हटाया जाने को लेकर दावा किया जा रहा है कि जनरल जॉर्ज, अटैक का विरोध कर रहे थे. दावा किया जा रहा है कि पेंटागन के बड़े जनरल में ईरान के साथ युद्ध की प्लानिंग को लेकर सहमति नहीं है. इससे पहले भी

हाल ही में ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमले से नाखुश शीर्ष अमेरिकी अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर खलबली मचा दी थी. अमेरिका के नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) के डायरेक्टर जोसेफ केंट ने ये कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इजरायल और ताकतवर अमेरिकी युद्ध लॉबी के हाथों की ‘कठपुतली’ बने हुए हैं. कैंट ने ये भी कहा था कि ईरान, अमेरिका के लिए कोई खतरा ही नहीं था, और ना ही वो कोई न्यूक्लियर हथियार बना रहा था.”

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