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अमेरिकी टेक कंपनियों पर हमले का फरमान, ईरान के बदले का ऐलान

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की एक धमकी से अमेरिकी टेक कंपनियों में हड़कंप मच गया है. आईआरजीसी की ओर से जारी बयान में चेतावनी दी गई है कि अब ईरान में किसी भी हत्या का जवाब अमेरिकी कंपनियों पर हमला करके दिया जाएगा.

ईरान ने अमेरिका की 18 टॉप कंपनियों को धमकाया है और हमला करने की वॉर्निंग दी है. इस धमकी के बाद खाड़ी देशों में इन कंपनियों के दफ्तर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन जैसे ही धमकी के बारे में कर्मचारियों और उनके परिवारवालों को पता चला, सभी दहशत में हैं.

आईआरजीसी ने अपने बयान में इन टेक कंपनी के कर्मचारियों को फौरन लौट जाने के लिए कहा है, साथ ही निर्देश दिया है कि दफ्तर के एक किलोमीटर के दायरे में न रहें, नहीं तो अमेरिकी सरकार की ओर से जारी अटैक का अंजाम कर्मचारियों को भुगतना पड़ सकता है.

अमेरिकी कंपनियों युद्ध में शामिल, जान बचाने के लिए कर्मचारी छोड़ें वर्कप्लेस: आईआरजीसी

अरब में अमेरिका की 18 टेक कंपनियों को धमकाते हुए ईरान ने कहा है कि “ये कंपनियां ईरान-अमेरिका युद्ध में शामिल हैं. आईआरजीसी ने कहा कि इन कंपनियों के कर्मचारी दफ्तर से दूर रहें. कल रात 8 बजे से हमला करेंगे.”

आईआरजीसी ने कहा, “ईरान में होने वाले किसी भी आतंकी हमले के जवाब में वे चुनिंदा कंपनियों और उनकी यूनिट्स को पूरी तरह तबाह कर देंगे. यह चेतावनी 1 अप्रैल को तेहरान के समयनुसार रात 8 बजे (भारतीय समय रात 10:30 बजे) से लागू मानी जाएगी. इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को सलाह दी जाती है कि अपनी जान बचाने के लिए वे तुरंत अपने दफ्तर या कार्यस्थल छोड़ दें.”

इन कंपनियों को आईआरजीसी ने दी धमकी

ईरान ने जिन कंपनियों को धमकाया है, उनमें डेल, माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, जीई, ओरेकल, सिस्को, मेटा, बोइंग, टेस्ला, इनटेल, आईबीएम, जेपी मोर्गन, हेवलेट पैकार्ड जैसी बड़ी टेक कंपनियां शामिल हैं.

आईआरजीसी ने ओपनएआई, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल का नाम लेकर आरोप लगाया है कि बड़ी आईटी और एआई कंपनियां ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में मदद कर रही हैं. उनका कहना है कि ये कंपनियां सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं बना रहीं, बल्कि हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में भी शामिल हैं. ईरानी सेना का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिकी और इजरायली सेना के साथ मिलकर काम कर रही हैं. और इन कंपनियों का इस्तेमाल बिना पायलट वाले ड्रोन उड़ाने और सटीक निशाना चुनने में किया जा रहा है. 

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह धमकी सच में लागू होती है, तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है.

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