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ईरान बन जाता गाज़ा, बैलिस्टिक मिसाइल के जखीरे ने बचाया

ईरान के हथियारों में अगर सेजल, खैबर शिकन और फतह जैसी घातक बैलिस्टिक मिसाइल न होती तो ईरान की हालात भी गाजा जैसी होती. ये दावा किया है ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने, जो इनदिनों पाकिस्तान की यात्रा पर हैं.

पाकिस्तान में मीडिया से बात करते हुए ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि “यदि हमारे पास आत्मरक्षा के लिए हमारी मिसाइलें नहीं होतीं, तो इजरायल और अमेरिका, ईरान को उसी तरह रौंद देते जैसे गाजा को रौंदा गया, और वे बुजुर्ग हों या युवा, किसी पर भी दया नहीं दिखाते.”

ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल को लेकर पेजेश्कियान का ये बयान इसलिए अहम है क्योंकि अमेरिका-ईरान के बिचौलिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बोल दिया था कि अमेरिका के साथ हुए एमओयू (डील) में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को भी शामिल किया गया है. जबकि, एमओयू के 14 बिंदुओं में ईरान का बैलिस्टिक कार्यक्रम का कोई जिक्र नहीं था. यही वजह है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पेजेश्कियान ने शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ईरान के मिसाइलों को लेकर बड़ा बयान दिया.

हम कतई मिसाइल प्रोग्राम पर किसी से बात नहीं करेंगे: राष्ट्रपति पेजेश्कियान

इस्लामाबाद पहुंचकर पेजेश्कियान ने अमेरिका और इजरायल को जमकर सुनाया. पेजेश्कियान ने कहा कि “वे (अमेरिका और इजरायल) मानवाधिकारों की बात करते हैं. यह एक बड़ा झूठ है…यदि हम अपनी रक्षा करने में सक्षम न होते, तो वे निश्चित रूप से हमारे देश पर दया नहीं दिखाते और हमारी शक्ति को नष्ट कर देते.”

पेजेश्कियान बोले, “हम किसी भी परिस्थिति में अपनी रक्षात्मक (मिसाइल) क्षमताओं पर किसी से भी वार्ता नहीं करेंगे.”

दरअसल, जंग से पहले इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोजेक्ट को लेकर सवाल खड़े किए थे. लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर ईरान अड़ गया और एमओयू में इसका जिक्र नहीं किया गया. परमाणु हथियार ना बनाने को लेकर जरूर ईरान पीछे हट गया.

एमओयू साइन होने के बाद जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के बारे में सवाल किया गया तो ट्रंप ने साफ कर दिया कि खाड़ी के दूसरे देशों के पास भी बैलिस्टिक मिसाइल हैं, ऐसे में ईरान भी बैलिस्टिक मिसाइल रख सकता है.

अक्तूबर 2023 के नरसंहार के बाद इजरायल ने ईरान समर्थित आतंकी संगठन हमास के सफाए के साथ गाजा को पूरी तरह तबाह कर दिया है. इजरायली डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने एयर स्ट्राइक कर गाजा को जमींदोज कर दिया है. करीब 40 हजार लोगों की मौत हो गई है और लाखों लोग बेघर हो गए हैं. यही वजह है कि पेजेश्कियान ने पाकिस्तान में गाजा का भी जिक्र किया.

चीन-रूस मददगार, ईरान ने बढ़ाया बैलिस्टिक मिसाइलों का जखीरा

दरअसल, पिछले कुछ सालों में ईरान ने गुपचुप तरीके से बैलिस्टिक मिसाइलों का एक बड़ा जखीरा तैयार कर लिया था. माना जाता है कि इन मिसाइलों को तैयार करने में चीन और रूस ने मदद की है. जंग के दौरान ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर जिन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, वे इस तरह हैं—

  • फतह मिसाइल– ईरान के जखीरे में कम दूरी की फतह मिसाइल के तीन वर्जन हैं, जिनकी रेंज 300-750 किलोमीटर है.
  •  गदर- 2000 किलोमीटर की रेंज
  • खैबर-शिकन मिसाइल– बैलिस्टिक मिसाइल को कलस्टर म्युनिशन में तब्दील किया, जिसकी रेंज 1500 किलोमीटर है.
  •  खुर्रमशहर– मल्टीपल वॉरहेड वाली मिसाइल (रेंज 2000 किलोमीटर)
  • सेजल – हाइपरसोनिक मिसाइल(रेंज 2000 किलोमीटर से ज्यादा)
  • अज्ञात आईसीबीएम– करीब 4000 किलोमीटर तक मार करने वाली इस इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के बारे में दुनिया को कम जानकारी है. इसका इस्तेमाल युद्ध के दौरान ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिका के डियागो ग्रासिया स्ट्रेटेजिक बेस पर हमले के लिए किया था.

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