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ईरान ने बनाए शाहेद से खतरनाक ड्रोन, US इंटेलिजेंस में खलबली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहे कितनी बार ईरान युद्ध जीतने का दावा करें, लेकिन खुद अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स ने झूठ की पोल खोल दी है. अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बहुत नुकसान झेलने और शीर्ष नेताओं को खोने के बावजूद ईरान तेजी से अपनी सैन्य ताकत दोबारा तैयार कर रहा है.

अमेरिकी खुफिया एजेंसी का मानना है कि ईरान ने चीन-रूस की मदद से ड्रोन उत्पादन फिर शुरू कर दिया है और मिसाइल लॉन्चर भी बचाए रखे हैं. ईरान उम्मीद से जल्दी अपनी सैन्य क्षमताएं फिर से सशक्त बना लेगा.

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के खुलासे के बाद ट्रंप प्रशासन में हड़कंप मच गया है, क्योंकि एक ओर जहां अमेरिकी सेना को इस युद्ध में भारी नुकसान उठाना पड़ा है, तो वहीं बदले में हासिल कुछ नहीं हुआ, सिवाए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई और बाकी शीर्षों के खात्मे की. ईरान वैसे का वैसा खड़ा है और लगातार चुनौती दे रहा है.

ईरान पहले की तरह बन रहा सशक्त, तेजी से बना रहा ड्रोन: अमेरिकी खुफिया एजेंसी

अमेरिका और इजरायल के साथ तकरीबन 40 दिनों के युद्ध के बाद ईरान अपनी सैन्य ताकत को बहुत तेजी से फिर से तैयार कर रहा है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक,  ईरान ने 8 अप्रैल से शुरू हुए छह हफ्ते के युद्धविराम के दौरान ही ड्रोन बनाना दोबारा शुरू कर दिया था. ईरान की सैन्य ताकत उम्मीद से कहीं जल्दी वापस आ रही है.

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, रूस और चीन की मदद से ईरान उम्मीद से जल्दी सैन्य क्षमताएं बहाल कर रहा है. ईरान मिसाइल लॉन्चर, मिसाइल साइट और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को फिर से खड़ा कर रहा है.

खुफिया एजेंसियों की इस रिपोर्ट से अमेरिकी सेना के साथ-साथ ट्रंप प्रशासन भी सकते में है, क्योंकि ट्रंप हर जगह ये दावा कर रहे हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता उन्होंने तोड़कर रख दी है. ईरान की नेवी, एयरफोर्स सब, तबाह कर दी गई है. ईरान को कई वर्ष पीछे भेज दिया गया है. लेकिन ट्रंप की खुद की एजेंसी ने उनके झूठ का पर्दाफाश कर दिया है.

अमेरिका के खिलाफ रूस-चीन बने ईरान के मददगार

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के अधिकारियों का मानना है कि ईरान इतनी तेजी से इसलिए संभल पाया क्योंकि उसे रूस और चीन से मदद मिल रही है. चीन अब भी ईरान को ऐसे पार्ट्स दे रहा है, जिनकी मदद से ईरान अपनी मिसाइलें दुरुस्त कर रहा है.

सिर्फ खुफिया अधिकारियों ने ही नहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी सार्वजनिक तौर पर कहा था कि चीन ईरान को मिसाइल बनाने के पुर्जे दे रहा है.

अमेरिकी रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और एयर डिफेंस क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. अप्रैल की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिका के हमलों के बाद ईरान के करीब आधे मिसाइल लॉन्चर बच गए थे. अब नई रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब दो-तिहाई लॉन्चर अब भी मौजूद हैं. युद्धविराम के दौरान ईरान ने कई दबे हुए लॉन्चरों को निकाल लिया.

ईरान की ड्रोन क्षमता सुरक्षित, सस्ते ड्रोन के आगे अमेरिका की महंगी मिसाइलें पस्त

अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसियों का मानना है कि ईरान के हजारों ड्रोन अब भी सुरक्षित हैं, जो उसकी कुल ड्रोन ताकत का करीब 50% हैं. इसके अलावा ईरान की कई क्रूज मिसाइलें भी बची हुई हैं. इन मिसाइलों के जरिए ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है.

हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने दावा किया था कि अमेरिकी अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने ईरान की 90% डिफेंस क्षमता खत्म कर दी है और वह कई साल तक दोबारा तैयार नहीं हो पाएगा. लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नई रिपोर्ट्स इससे अलग तस्वीर दिखा रही हैं. सूत्रों का कहना है कि ईरान को हुआ नुकसान उसे सिर्फ कुछ महीनों पीछे ले गया है, कई साल नहीं.

अमेरिका असमंजस में ईरान पर अटैक किया जाए या नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं, धमका रहे हैं, अपने सैन्य अधिकारियों के साथ हाईलेवल बैठक कर रहे हैं. इसका कारण सिर्फ यही है कि ट्रंप असमंजस में हैं कि क्या तेहरान पर हमला शुरु किया जाए या नहीं. आशंका इस बात की है कि अगर दोबारा ईरान के साथ युद्ध शुरु किया गया, तो इस बार आईआरजीसी और घातक हो सकती है. क्योंकि खुफिया एजेंसियों की बात अगर सच है तो इस युद्धविराम के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य ताकत और पुख्ता कर ली है. ऐसे में अमेरिका के साथ-साथ खाड़ी देशों के लिए भी ईरान के घातक ड्रोन काल बन सकते हैं.

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