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जयशंकर-रुबियो में बातचीत, ईरान युद्ध पर चर्चा

मिडिल ईस्ट में सैन्य संघर्ष को लेकर भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच बातचीत हुई है. होर्मुज खाड़ी के बाधित होते से दुनियाभर के देश चिंतित हैं, ऐसे में दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ ऊर्जा संबंधी चिंताओं पर चर्चा की है. पश्चिम एशिया संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को लेकर बातचीत हुई, साथ ही भारत-अमेरिका में संपर्क में रहने पर भी सहमति बनी.

ये बातचीत ऐसे वक्त में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध रोकने का दावा करते हुए बातचीत किए जाने की बात कही है, तो वहीं ईरान ने ऐसी किसी भी वार्तालाप से इनकार किया है. दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं. लेकिन सच्चाई एक है कि दुनिया चाहती है कि मिडिल ईस्ट में तबाही अब रुक जानी चाहिए.

संघर्ष और आर्थिक जोखिमों पर हुई बातचीत:  एस जयशंकर

एक्स पर एक पोस्ट में एस जयशंकर ने बताया कि मार्को रुबियो से क्या बातचीत हुई है. जयशंकर ने लिखा, कि “बातचीत क्षेत्र में चल रहे संघर्ष और इसके व्यापक आर्थिक नतीजों पर केंद्रित थी,  जिसमें दोनों पक्षों ने ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के जोखिमों पर भी चर्चा की.”

आपको बता दें कि होर्मुज की खाड़ी के बंद होने और बाल्टिक सागर में रूसी तेल टर्मिनल पर हमले के कारण वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मचा हुआ है. कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं. कई यूरोपीय जहाज भी फंसे हुए हैं, जिन्हें मिसाइलों का हमला झेलना पड़ रहा है. हालात बेहद नाजुक हैं, ऐसे में जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है.

जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच बातचीत की टाइमिंग भी बेहद खास है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ संवाद किए जाने और 05 दिनों के लिए हमले रोके जाने के दावे के बाद भारत-अमेरिका के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है.

ईरानी विदेश मंत्री के संपर्क में जयशंकर, यूरोप के समकक्षों से भी बातचीत

28 फरवरी से अब तक एस जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है. वो भी तब जब ईरान में नेताओं से संपर्क स्थापित बेहद आसानी से नहीं हो रहा. जयशंकर की कूटनीति का असर है कि जब दुनियाभर के जहाज होर्मुज में फंसे हुए हैं, तब भारत के जहाजों को बिना रोकटोक के निकलने दिया जा रहा है. वहीं ईरानी युद्धपोत को भी भारत ने शरण दी हुई है. मार्च के पहले सप्ताह से ही कई ईरानी नौसैनिक भी कोच्चि में ठहरे हुए हैं.

जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल के साथ भी बातचीत की है. दोनों नेताओं के बीच वर्तमान समय में जारी पश्चिम एशियाई तनाव पर बातचीत हुई. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत की जानकारी साझा कर लिखा, ” जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के साथ पश्चिम एशिया विवाद पर काम की बातचीत हुई. संपर्क में रहने पर सहमत हुए.”

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