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दुश्मन के टैंक पर भारी फुंकार, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री के लिए नाग मिसाइल सिस्टम का करार

दुश्मन के टैंक को तबाह करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने सेना की मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री को बेहद खास नाग मिसाइल सिस्टम से लैस करने करने की तैयार कर ली है. इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (एएनवीटी) से करीब 1800 करोड का करार किया है. साथ ही सेना को 5000 लाइट व्हीकल सप्लाई करने के लिए फोर्स मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा से भी एग्रीमेंट किया गया है.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, नाग मिसाइल सिस्टम (एनएएमआईएस) के ट्रैक्ड वर्जन के लिए ये करार किया गया है. दरअसल, नाग एक एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) है. एएनवीटी ने इस स्वदेशी नाग मिसाइल को बीएमपी आईसीवी (इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल) पर तैनात कर दिया है. ऐसे में आर्मर्ड वॉरफेयर यानी टैंकों की आमने सामने की लड़ाई में एनएएमआईएस, एक बेहतरीन सैन्य प्रणाली के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

रूस-यूक्रेन युद्ध में हुआ टैंकों का जमकर इस्तेमाल

रूस-यूक्रेन युद्ध और फिर इजरायल-हमास जंग में टैंकों का इस्तेमाल, दुश्मन के इलाकों में घुसने के लिए इस्तेमाल किया गया है. ऐसे में बेहद जरूरी है कि टैंकों की मारक-क्षमता को काबू में रखा जाए. वर्ष 2020 में गलवान घाटी की झड़प के दौरान पूर्व लद्दाख में भी भारत और चीन के टैंक आमने सामने आ गए थे. उस दौरान, भारतीय सेना ने बीएमपी को पूर्वी लद्दाख में तैनात किया था. नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल से लैस होने से इन बीएमपी को अधिक खतरनाक बना दिया गया है.

फायर एंड फॉरगेट से बढ़ेगी मैक-इन्फैंट्री की ताकत

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री की टैंक रोधी क्षमता के आधुनिकीकरण में नाग प्रणाली एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो विभिन्न प्रकार की सैन्य गतिविधियों में भारतीय सेना की कार्य कुशलता को बढ़ाएगा. (https://x.com/DRDO_India/status/1905257836054978923)

एनएएमआईएस (ट्रैक्ड), दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों के खिलाफ सबसे परिष्कृत टैंक रोधी हथियार प्रणालियों में से एक है, जिसमें फायर एंड फोरगेट, टैंक-रोधी मिसाइल व दृष्टि प्रणाली है, जिससे मारक क्षमता तथा घातकता में बढ़ोतरी होती है. यह हथियार प्रणाली मैकेनाइज्ड ऑपरेशन्स के प्रबंधन में बदलाव लाने और शत्रु के विरुद्ध सैन्य गतिविधियों में लाभ प्रदान करने के लिए तैयार की गई है.

गुरूवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में रक्षा मंत्रालय और एवीएनटी के बीच में ये करार हुआ. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ये करार आईडीडीएम यानी भारतीय-स्वदेशी रूप से परिकल्पित, विकसित और निर्मित श्रेणी के तहत किया गया है. (https://x.com/DRDO_India/status/1878837696497582244)

महिंद्रा के हल्के वाहन करेंगे सेना के लिए फोर्स का काम
महिंद्रा और फोर्स भारत के लाइट व्हीकल, 800 किलोग्राम तक का भार वहन करने की क्षमता रखने के लिए उन्नत शक्ति के इंजन से लैंस हैं. यह सशस्त्र बलों को सभी प्रकार के भूभागों और परिचालन स्थितियों में आवागमन की सुविधा प्रदान करेगा.

रक्षा मंत्रालय ने दोनों प्राइवेट कंपनियों से कुल पांच हजार (5000) हल्के वाहन खरीदने का करार किया है.  

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