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पाकिस्तान वाले The Diplomat पहुंचे इजरायल, तालिबान से संबंधों में अहम भूमिका निभा चुके हैं जेपी सिंह

हाल ही में पाकिस्तान पर भारत की कूटनीतिक जीत को लेकर सिनेमाघरों में रिलीज हुई है फिल्म ‘द डिप्लोमैट’. द डिप्लोमैट में जॉन अब्राहम ने जिस भारतीय राजदूत जे पी सिंह का किरदार निभाया है, उन्हें असल जिंदगी में एक बार फिर बेहद ही अहम जिम्मेदारी मिली है.  इजरायल-हमास के बीच चल रही युद्ध के बीच भारत के तेजतर्रार और काबिल राजदूत जे पी सिंह को इजरायल में राजदूत बनाया गया है.

जे पी सिंह के इजरायल में स्वागत की खास तैयारियां की गई हैं. इजरायल के विदेश मंत्रालय जे पी सिंह के स्वागत के लिए सत्य घटना पर आधारित ‘द डिप्लोमैट’ की स्क्रीनिंग करेगा, जिसमें इजरायली विदेश मंत्री समेत कई बड़े इजरायली अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है.

इजरायल में ‘द डिप्लोमैट’ की स्पेशल स्क्रीनिंग 

साल 2017 के बाद भारतीय राजदूत जे पी सिंह, फिल्म द डिप्लोमैट से एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. उस वक्त जे पी सिंह की कूटनीतिक कोशिशों के बाद भारत की बेटी को पाकिस्तान से सुरक्षित वापस लाया गया था. जे पी सिंह को अब इजरायल का राजदूत नियुक्त किया गया है.  

इजरायली विदेश मंत्रालय के सांस्कृतिक प्रभाग के प्रमुख नूरित तिनारी ने बताया कि “यह (द डिप्लोमैट) फिल्म भारतीय कूटनीति की ताकत का जश्न मनाती है. फिल्म की स्क्रीनिंग एक ऐतिहासिक घटना होगी. इजरायल इस स्क्रीनिंग की मेजबानी करने वाला पहला देश है. इससे भारत से हमारे रिश्ते और मजबूत होंगे.”

नूरित के मुताबिक, “विदेश मंत्रालय में चुनिंदा दर्शकों के लिए आयोजित स्क्रीनिंग में इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सा’आर भी शामिल होंगे. फिल्म देखने के लिए इजरायल में विदेशी राजनयिकों को भी स्क्रीनिंग में बुलाया गया है.”

कौन है जे पी सिंह, जिनके स्वागत के लिए आतुर इजरायल?

2002 बैच के इंडियन फोरेन सर्विस (आईएफएस) अफसर हैं जेपी सिंह. उन्हें बतौर डिप्लोमेट कई वर्षों का अनुभव है. वाकपटुता और कूटनीतिक समझ के चलते, जेपी सिंह को विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों में कई जगह अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गईं.

जेपी सिंह साल 2014 से लेकर 2019 तक पाकिस्तान में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर के पद पर रहे हैं. इसी दौरान उज्मा अहमद का मामला सामने आया था, जहां भारतीय बेटी को सुरक्षित वापसी की जिम्मेदारी जे पी सिंह पर थी. जे पी सिंह के कठिन कदमों के चलते पाकिस्तानी सरकार चित हो गया था और भारत की उज्मा की वापसी हुई थी. 

जॉन अब्राहम ने निभाया है फिल्म में जेपी का किरदार

14 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज की गई फिल्म द डिप्लोमैट में भारत की पाकिस्तान पर रणनीतिक जीत दिखाई गई है. फिल्म असल कहानी पर आधारित है. साल 2017 में जब दिवंगत सुषमा स्वराज विदेश मंत्री थीं तो प्यार के जाल में भारत से पाकिस्तान पहुंचे उज्मा नामक लड़की ने मदद की गुहार लगाई थी. उज्मा, भारतीय उच्चायोग में शरण मांगने के लिए आती है, तो कैसे तत्कालीन राजदूत जेपी सिंह ने उस लड़की की मदद की. लड़की ने बताया कि वह भारतीय है और उसका अपहरण कर लिया गया था, इसके बाद उसे पाकिस्तानी व्यक्ति के साथ शादी करने के लिए मजबूर किया गया.

जेपी सिंह के साहसिक फैसलों की वजह से यह मामला न सिर्फ पाकिस्तान और भारत बल्कि इंटरनेशनल मीडिया में भी सुर्खियों में रहा. पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा जिसके बाद कई हफ्तों की कानूनी जंग के बाद उज्मा को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने भारत लौटने की अनुमति दे दी. 25 मई 2017 को उज्मा बाघा बॉर्डर से भारत लौटीं थीं. पाकिस्तानी कानूनी प्रणाली से जूझते हुए जे पी सिंह ने कैसे लड़की को पाकिस्तान की चंगुल से छुड़ाकर सुरक्षित भारत पहुंचाया, ये सारा घटनाक्रम फिल्म में सिलसिलेवार ढंग से दिखाया गया है.

तालिबान ने बैक चैनल बातचीत में जे पी सिंह की अहम भूमिका 

जेपी सिंह को विदेश मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण भूमिका दी गई जहां उन्होंने अफगानिस्तान में तालिबान के साथ वार्ताओं को शुरू करने में योगदान दिया. पिछले साल जे पी सिंह ने मुल्ला उमर के बेटे से मुलाकात कर हर किसी को चौंका दिया था.

भारतीय राजनयिक जे पी सिंह नें तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्‍ला याकूब मुजाहिद से काबुल पहुंचकर मुलाकात की थी. मुल्‍ला याकूब. तालिबान के सुप्रीम लीड रहे आतंकी मुल्‍ला उमर का बेटा है. मुल्‍ला उमर ने साल 1996 से 2001 तक अफगानिस्‍तान पर राज किया था. भारतीय प्रतिनिधि ने तालिबान के कार्यकारी व‍िदेश मंत्री अमीर खान मुत्‍ताकी और पूर्व राष्‍ट्रपति हामिद करजई से भी मुलाकात की थी. माना जाता है कि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार और भारत के रिश्तों में मजबूती लाने के पीछे भी जे पी सिंह का अहम रोल है.

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