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मोदी का साइप्रस दौरा, टर्की की घिग्गी बंधना तय

कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब बीच में साइप्रस रूकने का ऐलान किया तो हर कोई हैरान रह गया. यूरोप और भूमध्य सागर क्षेत्र के एक बेहद छोटे (लेकिन अहम) देश की यात्रा को पीएम ने आखिर क्यों चुना. लेकिन कम लोग जानते हैं कि साइप्रस के दौरे से पाकिस्तान के परम-मित्र टर्की की सांसे थम गई हैं. वही तुर्की, जो भारत के खिलाफ साजिश रचने के लिए कुख्यात है और जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की मदद की थी.

भारत-पाकिस्तान के टकराव और अब ईरान-इजरायल युद्ध से भूमध्य सागर क्षेत्र में नए जियो-पॉलिटिकल समीकरण बन जा रहे हैं. क्योंकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में जाने के दौरान साइप्रस भी जा रहे हैं (15-16 जून). पिछले चार दशक से, साइप्रस का तुर्की (तुर्किए) से छत्तीस का आंकड़ा है. ऐसे में साफ है कि साइप्रस के जरिए भारत अब तुर्की की अक्ल ठिकाने लगाने जा रहा है.

खास बात ये है कि शुक्रवार को ईरान पर हमला करने के तुरंत बाद इजरायल ने अपने सभी यात्री विमानों को साइप्रस भेज दिया था ताकि ईरान की जवाबी कार्रवाई में सिविल एविएशन को नुकसान न हो. इसी तरह, इजरायल ने अपने अतिरिक्त फाइटर जेट्स को ईरान के हमलों से सुरक्षित रखने के लिए ग्रीस भेज दिया है. हाल के सालों में भारत के ग्रीस से करीबी संबंध बन गए हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ग्रीस उन देशों में शामिल था जिसने भारत की कार्रवाई का समर्थन किया था.

भारत और इजरायल के करीबी संबंध दुनिया से छिपे नहीं रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ इजरायली ड्रोन का जबरदस्त इस्तेमाल किया था. ईरान पर हमला करने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सबसे पहले जिन वैश्विक नेताओं को फोन किया, उनमें प्रधानमंत्री मोदी का नाम सबसे ऊपर था. 

कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का समर्थन करता है साइप्रस
आतंकवाद और कश्मीर के मुद्दे पर साइप्रस हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है. 1998 में जब भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था तब भी साइप्रस, भारत के साथ खड़ा था.  

भारत भी संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत साइप्रस समस्या के समाधान के पक्ष में रहा है. तुर्की जहां पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है, वहीं भारत ने साइप्रस के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है. 

तुर्किए और साइप्रस का विवाद दशकों पुराना है
साइप्रस एक भूमध्यसागरीय द्वीप है जो तुर्किए के दक्षिण में, सीरिया के पश्चिम और इजरायल के उत्तर पश्चिम में है. साइप्रस में ग्रीक और तुर्क अल्पसंख्यक लोग रहते हैं. दोनों समुदायों के बीच लंबे समय से नस्लीय विवाद चला आ रहा है. साल 1974 में ग्रीक समुदाय से जुड़े लड़ाकों ने द्वीप पर तख्तापलट किया था जिसके बाद तुर्की ने तुर्क समुदाय के लोगों की रक्षा का बहाना कर द्वीप पर हमला कर दिया था. इस आक्रमण के बाद घटना के बाद साइप्रस दो हिस्सों में बंट गया, जिनमें से एक में ग्रीक-साइप्रस सरकार है और दूसरे पर तुर्क-साइप्रस वासियों का कंट्रोल है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्रीक-साइप्रस सरकार के शासन वाले साइप्रस गणराज्य को मान्यता प्राप्त है. वहीं, तुर्क साइप्रस वासियों ने अपने इलाके को एक स्वघोषित राष्ट्र का दर्जा दिया है, जिसे सिर्फ तुर्किए स्वीकार करता है. साइप्रस और तुर्की के कब्जे वाले साइप्रस के हिस्से को, संयुक्त राष्ट्र की पेट्रोलिंग वाला एक बफर जोन अलग करता है. 

पहलगाम हमले के बाद शहबाज संग जश्न मनाया था एर्दोगन ने
22 अप्रैल को जिस दिन आतंकियों ने भारतीय पर्यटकों की हत्या की, उस दिन पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ तुर्किए में मौजूद थे. हमले के बाद जहां अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे दुनिया के अधिकतर देश आतंकी हमले की निंदा कर रहे थे, शहबाज और एर्दोगन मुसकुराते नजर आए थे. तुर्की की राजधानी अंकारा में हंस-हंसकर गले मिल रहे थे. ऐसा लग रहा था कि 26 पर्यटकों की हत्या की खुशी मनाई जा रही है. एर्दोगन और शहबाज की उस तस्वीर की जमकर आलोचना की गई थी. 

पहलगाम नरसंहार के बाद तुर्किए ने पहुंचाई थी ड्रोन की खेप
पहलगाम हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान ने एक कार्गो जहाज भरकर ड्रोन की एक बड़ी खेप तुर्किए से मंगाई थी. पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ जो बुनयान अल मसरूर लॉन्च किया था, उसमें तुर्की और चीन के ड्रोन को शामिल किया था.

27 अप्रैल को तुर्की का सैन्य विमान सी-130 हरक्यूलिस भी पाकिस्तान गया था. 7-10 मई के बीच पाकिस्तान ने करीब एक हजार ड्रोन भारत पर लॉन्च किए थे. लेकिन सभी को भारत की एयर डिफेंस ने मार गिराया था. इसके अलावा भारत और पाकिस्तान में तनाव बढ़ने के बाद तुर्की का जंगी जहाज 2 मई को कराची बंदरगाह पहुंचा था.

भारत में तुर्किए का बायकॉट
ड्रोन हमले के दौरान पाकिस्तान को समर्थन देने के चलते ही भारत ने तुर्किए की एविएशन-सर्विस कंपनी सेलिब के साथ करार तोड़ दिया है. भारत में तुर्की का टूरिस्ट-डेस्टिनेशन के तौर पर बॉयकॉट शुरु हो गया है. कई ट्रैवल एजेंसियों ने तुर्किए के लिए बुकिंग बंद कर दी है. ऐसे में पीएम मोदी के साइप्रस जाने का प्लान भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है.  

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