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पैरा-एसएफ MARCOS का अंडरवाटर युद्धाभ्यास, चीन सीमा से सटे सिक्किम में 17 हजार फीट पर हैरत अंगेज ड्रिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा से भले ही दोनों देशों के संबंधों में जमी बर्फ पिघल गई है लेकिन एलएसी पर भारतीय सेना की तैयारियों में कमी नहीं आई है. इसी कड़ी में चीन सीमा से सटे सिक्किम में 17 हजार फीट की ऊंचाई पर थलसेना के पैरा-एसएफ कमांडो और नौसेना के मार्कोस (मरीन कमांडो) ने एक बेहद ही जटिल अंडरवाटर एक्सरसाइज को आयोजित किया है. 

युद्धाभ्यास के तहत, पैरा-एसएफ और मार्कोस ने सिक्किम में 17,000 फीट की ऊंचाई पर एक झील में संयुक्त स्कूबा और युद्ध गोताखोरी अभ्यास किया.  यह अभ्यास 30 अगस्त से 5 सितंबर तक चला, जिसमें भाग लेने वाले जवानों ने खुला सर्किट वायु गोताखोरी, बंद सर्किट शुद्ध ऑक्सीजन गोताखोरी, अत्यधिक ठंडे पानी की स्थिति में 17 मीटर तक गोता लगाया. इस युद्धाभ्यास को रात में किया गया. 

अभ्यास के मुख्य बिंदु:

– ऊंचाई और गहराई: अभ्यास सिक्किम में 17,000 फीट की ऊंचाई पर आयोजित किया गया था, जिसमें गोताखोरों ने 17 मीटर तक गहराई में गोता लगाया.

– गोताखोरी के प्रकार: इस अभ्यास में खुला सर्किट वायु गोताखोरी और बंद सर्किट शुद्ध ऑक्सीजन गोताखोरी शामिल थी, जो विशेष बलों के लिए आवश्यक कौशल हैं.

– रात गोताखोरी: जवानों ने युद्ध रात गोताखोरी का भी अभ्यास किया, जो विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालन करने की उनकी क्षमता को बढ़ाता है.

– संयुक्त अभ्यास: यह अभ्यास भारतीय सेना और नौसेना के बीच समन्वय और एकीकरण को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया था, जो विशेष बलों के बीच तालमेल बढ़ाने में मदद करता है. (https://x.com/easterncomd/status/1964952244366840283)

ऑप्स डिवीजन की वॉर डॉक्ट्रिन रिलीज

गौरतलब है कि पिछले महीने महू (इंदौर) स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण-संवाद सम्मेलन में सेना के तीनों अंगों यानी थलसेना, वायुसेना और नौसेना की स्पेशल फोर्सेज को लेकर एक साझा डॉक्ट्रिन जारी की गई थी. इस साझा ब्लूप्रिंट में बताया गया है कि अगर पैरा-एसएफ (थलसेना), गरुण (वायुसेना) और मार्कोस (नौसेना) के कमांडो को साझा ऑपरेशन की जिम्मेदारी दी जाए, तो उसे कैसे अंजाम देना है. क्योंकि, अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के नेतृत्व में तीनों सेनाओं की स्पेशल फोर्सेज की एक साझा और एकीकृत ऑप-डिवीजन का गठन भी कर दिया गया है. ये एक एलीट फोर्स की तरह काम करती है और इसका चार्टर भी तय कर दिया गया है कि किस तरह दुश्मन की सीमा में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की जा सकती है. 

ऑप डिवीजन का उद्देश्य, दुश्मन के रडार और कम्युनिकेशन स्टेशन सहित सप्लाई रूट्स को तबाह करना है. इसके अलावा, दुश्मन देश के कमांडरों को बंदी बनाने से लेकर दुश्मन की एयर-फील्ड और एयर-स्ट्रीप को भी बर्बाद करना शामिल है. 

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