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तियानमेन स्क्वायर पर जुटेंगे 26 यार, अमेरिका का खून जलाएगा चीन

By Nalini Tewari

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मुंह ताकते रह गए और चीन ने अपने देश में दुनिया 26 राष्ट्राध्यक्षों को आने का न्योता दे डाला. अगले सप्ताह दुनिया की जियोपॉलिटिकल पावर का केंद्र बनने जा रहा है चीन. क्योंकि 3 सितंबर को चीन-जापान युद्ध की 80वीं वर्षगांठ और द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के मौके पर बीजिंग अपना दमखम दिखाएगा. 

चीन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम और हाइपरसोनिक हथियारों जैसे अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन समेत 26 राष्ट्राध्यक्ष एकजुट रहेंगे.

जुलाई के महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें न्योता दिया है, लेकिन चीन ने अमेरिका को ठेंगा दिखाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति को न्योता नहीं दिया है. 

3 सितंबर को शक्ति का केंद्र बनेगा चीन, विक्ट्री डे परेड में दुनिया को दिखाएगा शौर्य

चीन में विजय दिवस परेड होने वाली है. चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति पुतिन और नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन सहित 26 देशों के राष्ट्राध्यक्ष इसमें भाग लेने वाले हैं. सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान जापान के सरेंडर को बीजिंग में विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है. इस दौरान एक विशाल मिलिट्री परेड के जरिए चीन अपनी सैन्य ताकत को दुनिया के सामने पेश करेगा.

चीन के सहायक विदेश मंत्री होंग लेई के मुताबिक पुतिन और किम जोंग के अलावा बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्सांद्र लुकाशेंको, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो और साउथ कोरिया के नेशनल स्पीकर वू वोन-शिक परेड में भाग लेंगे.

पहली बार बहुपक्षीय विदेशी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे किम जोंग उन

किम जोंग उन का बीजिंग के विक्ट्री डे में हिस्सा बनना अमेरिका को जवाब माना जा रहा है. किम जोंग उन पहली बार ऐसे कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं, जो द्विपक्षीय नहीं है. किम, प्योंगयांग से बाहर नहीं निकलते हैं. या तो दौरा करते हैं तो सिर्फ और सिर्फ द्विपक्षीय. किम जोंग पहली बार इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ एक मंच पर नजर आएंगे.

माना जा रहा है कि अमेरिका की दादागीरी खत्म करने के इरादे से एक मंच पर शी जिनपिंग, पुतिन, किम जोंग उन, और ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान नजर आएंगे. पश्चिम देशों के लिए संदेश साफ है.

परेड में कौन-कौन से राष्ट्राध्यक्षों को दिया गया न्योता

1. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

2. उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन

3. कंबोडिया के राजा नोरोडोम सिहामोनी

4. वियतनाम के राष्ट्रपति लुओंग क्यूओंग

5. लाओस पीपुल्स क्रांतिकारी पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव थोंगलौन सिसौलिथ

6. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियान्तो

7. मलेशिया के प्रधान मंत्री अनवर इब्राहिम

8. मंगोलिया के राष्ट्रपति उख्नागीन खुरेलसुख

9. पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ

10. नेपाल के प्रधान मंत्री केपी शर्मा ओली

11. मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ु

12. कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव

13. उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव

14. ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन

15. किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदर झापारोव

16. तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति सेर्दार बर्दीमुहामेदोव

17. बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको

18. अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव

19. आर्मेनिया के राष्ट्रपति वाहग्न खचातुरियन

20. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

21. कांगो गणराज्य के राष्ट्रपति डेनिस सास्सौ

22. जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति इमर्सन नांगाग्वा

23. सर्बिया के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिच

24. स्लोवाकिया के प्रधान मंत्री रॉबर्ट फिको

25. क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के प्रथम सचिव और गणराज्य के राष्ट्रपति मिगुएल डायज़-कैनल बर्मूडे

26. म्यांमार के कार्यवाहक राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग

जापान ने वैश्विक नेताओं से चीन के कार्यक्रम में शामिल न होने की अपील की है. जापान की इस अपील पर चीन भड़क गया है. चीन ने जापान के सामने राजनयिक विरोध दर्ज कराया है.

एससीओ समिट के बाद होगा परेड का आयोजन

चीन के विजय दिवस की परेड शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) समिट के तुरंत बाद बीजिंग में आयोजित की जा रही है. एससीओ शिखर सम्मेलन 31 अगस्त और 1 सितंबर को तियानजिन में आयोजित की गई है, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी हिस्सा ले रहे हैं. एससीओ की बैठक में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित 10 अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के अलावा 20 देशों के शीर्ष नेता एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे.

पीएम मोदी 6 साल बाद चीन पहुंच रहे हैं, जहां एससीओ की बैठक से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की जाएगी. रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी बैठक में पहुंच रहे हैं, माना जा रहा है कि पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन का एक साथ एक मंच पर आना अमेरिका के लिए बड़ा झटका है.

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