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पुतिन का जल्द भारत दौरा, एलएसी विवाद होगा खत्म

रूस-यूक्रेन के युद्ध विराम को लेकर सहमति को लेकर चल रही माथापच्ची के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आने वाले हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर पुतिन जल्द भारत का दौरा करेंगे. पुतिन के भारत दौरे से पहले तैयारियां शुरु कर दी गई हैं. इन बातों का खुलासा खुद रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने किया है.

एक कार्यक्रम के दौरान सर्गेई लावरोव ने जानकारी देते हुए बताया कि “पुतिन जल्द भारत का दौरा करेंगे.” व्लादिमीर पुतिन के भारत आने से पहले चीन ने भारत के साथ अपने संंबंधों को और सुधारने पर जोर दिया है. चीनी सेना ने बयान जारी करके कहा है कि “हमारी सेना ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) के बीच सहयोग तथा सैन्य संबंध को सुदृढ़ बनाने में योगदान देना चाहेगी.”

पीएम मोदी की पहली विदेश यात्रा रूस की थी, अब हमारी बारी- सर्गेई 

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने रसियन इंटरनेशनल अफेयर्स काउंसिल के  “रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर” कार्यक्रम में कहा, कि पिछले साल लगातार तीसरी बार चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपने पहली विदेश यात्रा में रूस आए थे. अब हमारी बारी है. राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे के लिए वर्तमान में व्यवस्था की जा रही है.” रूसी मीडिया ने भी तारीखों का खुलासा न करते हुए कहा है कि “राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारतीय सरकार के प्रमुख के दौरे के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है. रूसी राष्ट्रपति की भारत की यात्रा की तैयारी की जा रही है.”

रूस अपने पार्टनर्स भारत, चीन, नॉर्थ कोरिया, ईरान संग रिश्ते कर रहा मजबूत- लावरोव 

सर्गेई लावरोव ने पुतिन और मोदी की दोस्ती पर बात करते हुए कहा, कि दोनों देशों के प्रमुख संपर्क में रहते हैं. दो महीने में पुतिन और मोदी फोन पर बातचीत करते हैं. अंतर्राष्ट्रीय समिट के दौरान दोनों अलग से बैठक भी करते हैं. सर्गेई लावरोव ने कहा कि, “रूस अब चीन, भारत, ईरान, उत्तर कोरिया जैसे देशों और स्वतंत्र देशों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) के साथ सक्रिय रूप से संबंधों का विस्तार कर रहा है. पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग के संबंध आपसी विश्वास के अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुके हैं. भारत के साथ विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी विकसित हो रही है.’’

पुतिन के भारत दौरे से पहले एलएससी विवाद सुलझाने को तैयार चीन

पिछले साल रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान जब पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी, उससे पहले एलएसी को लेकर बड़ी डेवलेपमेंट हुई थी. अनौपचारिक तौर पर पुतिन की मौजूदगी के बाद भारत-चीन के रिश्तों में सुधार हुआ था. अब जब पुतिन भारत आ रहे हैं तो चीन ने एक बार फिर से संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है. चीन के राष्ट्रीय रक्षा प्रवक्ता सीनियर कर्नल वू कियान ने पूर्वी लद्दाख से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से सैनिकों की वापसी के सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘चीन की सेना सीमा मुद्दे पर निष्पक्ष और न्यायपूर्ण समाधान लागू करने के लिए अपने भारतीय समकक्षों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है.वू ने कहा कि चीन की सेना भी ड्रैगन और हाथी के बीच सहयोग तथा सैन्य संबंध को सुदृढ़ बनाने में योगदान देना चाहेगी.” इसी महीने चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा था कि “दोनों पक्षों के बीच सहयोग ही एकमात्र सही विकल्प है.”

दुनिया में बन रहे कई रणनीतिक समीकरण, लौटेगी शांति या बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा?

दुनिया के अलग-अलग मोर्चों पर कई जंग चल रही है. पहली तो रूस-यूक्रेन युद्ध है ही, इसके अलावा इजरायल-हमास, इजरायल-ईरान, अमेरिकी-ईरान, चीन-ताइवान, साउथ कोरिया-नॉर्थ कोरिया, चीन- फिलीपींस आदि. अगर रणनीतिक समीकरण को देखा जाए तो पीएम मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अच्छी मित्रता है, इसके अलावा पुतिन और नेतन्याहू भी पीएम मोदी के करीबी माने जाते हैं. वहीं पुतिन की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, नॉर्थ कोरिया के तानाशान किम जोंग उन और ईरान के सुप्रीम लीडर से अच्छी बनती है. ऐसे में अलग-अलग देशों में एक दूसरे को जोड़ने और तोड़ने की होड़ मची हुई है. 

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