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सरकार ने ली IPKF की सुध, श्रीलंका में हुआ था ऑपरेशन पवन

श्रीलंका में लिट्टे (एलटीटीई) के खिलाफ लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों को पहली बार वेटरन्स डे पर याद किया गया है. करीब 40 वर्ष बाद भारत सरकार ने इंडियन पीस कीपिंग फोर्स (आईपीकेएफ) के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की है.

खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्कालीन राजीव गांधी सरकार (1984-89) के फैसले के विवाद से इतर भारत के शांति-सैनिकों को याद किया. 

राजनाथ ने वेटरन्स डे पर किया शांति-दूतों को याद

बुधवार को राजधानी दिल्ली में वेटरन्स डे के मौके पर पूर्व-फौजियों के कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने साफ तौर से कहा कि “श्रीलंका में भारतीय सेनाओं को भेजने का जो निर्णय तत्कालीन सरकार ने लिया था, उस पर बहस हो सकती है. उस बहस में, मैं नहीं पड़ना चाहता, मगर ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले हमारे आईपीकेएफ के सैनिकों ने जो बलिदान दिया, उस संघर्ष के दौरान जो उन्होंने, जो कुछ भी किया, मैं मानता हूं उसका सम्मान किया जाना चाहिए, किया जाना चाहिए था.”

1987 में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने भेजा था श्रीलंका

वर्ष 1987 में राजीव गांधी ने श्रीलंका के लिबरेशन टाइगर ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई) के आतंकियों से लड़ने के लिए भारतीय सेना को जाफना भेजा था. भारतीय सेना ने लिट्टे के खिलाफ अपनी लड़ाई को ऑपरेशन पवन (1987-90) नाम दिया था. लेकिन इस ऑपरेशन में भारतीय सेना को बड़ा नुकसान हुआ था, जिसके चलते बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था. ऐसे में सेना के साथ-साथ बाद की सरकारों ने भी ऑपरेशन पवन को भूला दिया. यहां तक की ऑपरेशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों और उनके परिवारवालों की भी सुध नहीं ली गई. 

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज जब सारा देश अपने सैनिकों का स्मरण कर रहा है, उनके योगदान को स्मरण कर रहा है और उनके प्रति आभार व्यक्त कर रहा है, तो मैं आज से लगभग 40 साल पहले आईपीकेएफ के रूप में श्रीलंका में शांति स्थापना के लिए चलाए गए सैन्य अभियान में भाग लेने वाले सभी पूर्व सैनिकों का भी, मैं स्मरण करना चाहता हूं.

राजनाथ सिंह ने कहा कि “ऑपरेशन पवन में भारतीय सेनाओं ने अद्भुत साहस, शौर्य और पराक्रम का परिचय दिया है. कई सैनिकों ने कर्तव्य की राह पर चलते हुए वीरगति प्राप्त की है. उनका साहस और उनका बलिदान हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए तो प्रेरणा होना ही चाहिए, इसमें भी कहीं दो राय नहीं हो सकती है.

वर्ष 2015 में पीएम मोदी पहुंचे थे आईपीकेएफ वॉर मेमोरियल

वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ऑपरेशन पवन में भाग लेने वाले शांति सैनिकों के योगदान को न केवल खुले मन से स्वीकार कर रही है, बल्कि उनके योगदान को हर स्तर पर मान्यता देने की प्रक्रिया भी चल रही है. राजनाथ ने कहा कि हम नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर भी आईपीकेएफ के शांति सैनिकों के योगदान को मान्यता दे रहे हैं और हम उन्हें पूरा सम्मान भी दे रहे हैं.

सह-सेनाध्यक्ष ने पदभार संभालने के बाद लिट्टे ले लोहा लेने वाले वीर सैनिकों का किया था सम्मान

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अगस्त में पहली बार, भारतीय सेना के वाइस चीफ (सह-अध्यक्ष) लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह ने अपने पदभार संभालने के पहले ही दिन ऑपरेशन पवन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों के परिवार वालों को सम्मान देकर अनूठी मिसाल कायम की थी. सह-सेनाध्यक्ष ने श्रीलंका में एक ऑपरेशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों के परिवार वालों के साथ युद्ध-स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की. क्योंकि 36 वर्ष पहले हुए इस ऑपरेशन में खुद लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह भी शामिल थे और बुरी तरह घायल हो गए थे.(लिट्टे से लिया था लोहा, 35 वर्ष बाद सेना को आई याद)

राष्ट्रीय समर स्मारक पर अंकित है बहादुर सैनिकों के नाम

वर्ष 2019 में राष्ट्रीय समर स्मारक पर आजादी के बाद से आतंकियों या फिर दुश्मन देश के खिलाफ लड़कर बलिदान देने वाले सैनिकों के नाम लिखे गए थे. ऐसे में ऑपरेशन पवन में जान न्यौछावर करने वाले सैनिकों के नाम भी शामिल थे. लेकिन कभी भी इन सैनिकों को सम्मान नहीं दिया गया. 

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