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ट्रंप ने आखिरी फैसले को टाला, ईरान ने दुविधा में फंसाया

ईरान के मोर्चे पर बुरी तरह से फंस गया है अमेरिका. ईरान न तो उगला जा रहा है और न ही निगला. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जिद के कारण ईरान पर 28 फरवरी को हमला तो कर दिया गया, सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई, एनएसए अली लारीजानी समेत अधिकतर सैन्य शीर्ष अधिकारियों का खात्मे के बाद भी अमेरिका जो चाहता था, वो हासिल नहीं कर पाया.

शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि वो ईरान पर आखिरी फैसला लेने वाले हैं. वॉर (सिचुएशन) रूम में ट्रंप ने अमेरिकी सैन्य शीर्ष से प्लान ऑफ एक्शन पर बात की. लेकिन 02-03 घंटे की माथापच्ची के बाद वही ढाक के तीन पात, कुछ हल नहीं निकला. ट्रंप ने ईरान को धमकाया और ईरान ने भी पलटवार में कह डाला कि वो बात पर यकीन नहीं करते, मिसाइल के बल पर बात मनवाते हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अभी अंतिम समझौता नहीं हो सका है. अमेरिका और ईरान के बीच यूरेनियम संवर्धन, होर्मुज स्ट्रेट , जब्त पैसे की वापसी और अमेरिकी गारंटी जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं.

अमेरिका के हित में लिया जाएगा फैसला: व्हाइट हाउस

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक बड़ी बैठक की है. यह बैठक सिचुएशन रूम में हुई. इसमें ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ चर्चा की. ट्रंप की दो घंटे तक चली लंबी बैठक के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच समझौता नहीं हो पाया. राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने की शर्त पर अड़े हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम बढ़ाने को लेकर बातचीत चल रही है. इसके साथ ही होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने पर भी चर्चा हो रही है. ईरान ने कहा है कि यह सौदा अभी पक्का नहीं हुआ है.

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने ट्रंप की सीक्रेट बैठक के बाद बताया, कि ट्रंप वही समझौता करेंगे जो अमेरिका के हित में होगा और उनकी तय शर्तों को पूरा करेगा. अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा.

कोई डील फाइनल नहीं: ईरान विदेश मंत्रालय

ईरान ने कहा है कि अभी तक अमेरिका के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि “दोनों देशों के बीच बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान जारी है. इस समय ईरान की सबसे बड़ी प्राथमिकता युद्ध को खत्म करना है.

बघाई ने यह भी कहा कि “अभी यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम के तकनीकी मुद्दों पर कोई अंतिम चर्चा नहीं हो रही है. होर्मुज स्ट्रेट के बारे में उन्होंने कहा कि इसका भविष्य केवल ईरान और ओमान तय करेंगे.”

अपनी शर्तों पर ही होर्मुज खोलेंगे: ईरान

नए समझौते में होर्मुज जलमार्ग को खोलना सबसे बड़ी शर्त है. यह दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है. ईरान को 30 दिनों के भीतर यहां से सभी समुद्री बारूदी सुरंगे हटानी होंगी. ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टैक्स नहीं लगा पाएगा. इसके बदले में अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से नाकेबंदी हटाएगा. अमेरिका प्रतिबंधों में भी ढील देगा ताकि ईरान अपना तेल बेच सके. लेकिन ईरान होर्मुज को लेकर झुकने को तैयार नहीं है.

आपको बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में नेवल ब्लॉकेड लगा दिया था. ऐसे में यहां से गुजरने वाले सभी ऑयल टैंकर, एलपीजी कैरियर्स और दूसरे कॉमर्शियल जहाज की इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवाजाही रूक गई थी. ऐसे में पूरी दुनिया पर तेल का संकट गहरा गया था. ईरान नौसेना और ईरान की मिलिशिया फोर्स, आईआरजीसी ने यहां से गुजरने वाले जहाज पर ड्रोन और मिसाइल से हमला करना शुरु कर दिया था. जंग के दौरान ईरान ने होर्मुज में समुद्री लैंड माइंस भी लगा दी थी. ऐसे में कई जहाज इन बारूदी-सुरंग का भी शिकार हुए.

अमेरिकी राष्ट्रपति और ईरान को कतई अंदाजा नहीं था कि ईरान, होर्मुज स्ट्रेट को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेगा. ऐसे में पूरी दुनिया से दवाब के चलते 40 दिन की जंग के बाद 8 अप्रैल को ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम की घोषणा कर दी थी. युद्धविराम की घोषणा के साथ ट्रंप ने होर्मुज खोलने का भी ऐलान कर दिया था. यहां तक की ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी होर्मुज खोलने की बात स्वीकार की थी. लेकिन आईआरजीसी के दवाब में ईरान ने होर्मुज खोलने से इंकार कर दिया. ऐसे में अमेरिका ने भी होर्मुज पर नेवल ब्लॉकेड की घोषणा कर दी थी.

यूएस नेवी की नाकेबंदी से होर्मुज स्ट्रेट जंग का मैदान बन गया. हालांकि, यूएस नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट से सटी ओमान की खाड़ी में ये नाकेबंदी की थी. अमेरिका ने अपने दो-दो एयरक्राफ्ट कैरियर सहित करीब 20 युद्धपोत यहां तैनात कर दिए. होर्मुज में तैनात यूएस नेवी फ्लीट में करीब 15 हजार नौसैनिक थे. ऐसे में यहां अमेरिका और ईरान की नौसेनाओं के बीच झड़प भी देखने को मिली.

ईरान ने हालांकि, शुरूआत में भारत सहित कुल 5-6 देशों के ऑयल टैंकर और दूसरे कॉमर्शियल जहाजों को यहां से निकलने की इजाजत दी थी. बाद में ये लिस्ट बढ़ती गई. ईरान की तरफ से लगातार ये दावा किया गया कि कॉमर्शियल जहाजों के लिए होर्मुज पूरी तरह खुला है. अमेरिका और इजरायल जैसे दुश्मन देशों के लिए ईरान ने पूरी तरह नाकेबंदी कर रखी थी. इस दौरान भी हालांकि, आईआरजीसी द्वारा कई जहाज पर हमला करने की भी घटनाएं सामने आई.

ईरान ने फिर ऐलान किया कि कॉमर्शियल जहाज गुजर तो सकते हैं लेकिन आईआरजीसी की परमिशन लेने के बाद. कुछ दिन बाद ईरान ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल लेने का ऐलान कर दिया. इसके लिए ईरान ने एक खास पर्शियल गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) नाम की संस्था का गठन भी कर दिया.

ऐसे में ईरान लगातार ट्रंप को चुनौती दे रहा है, वहीं ईरान के मोर्चे पर बुरी तरह से फेल हुए ट्रंप की लोकप्रियता भी लगातार घटती जा रही है. ऐसे में अमेरिका के सामने बड़ी दुविधा है कि अगर वो ईरान पर अटैक करता है तो ईरान पूरी ताकत से पलटवार करेगा, जिसके कारण गल्फ देशों में संकट बढ़ेगा, वहीं अगर ट्रंप अपने सैनिकों को वापस बुलाते हैं तो भी दुनिया भर में अमेरिका के सुपरपावर वाली छवि की किरकिरी होना तय है.

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