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ईरानी एयरक्राफ्ट को गुपचुप छिपाया, मुनीर से खफा ट्रंप

पाकिस्तान ने किया है अमेरिका के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे-पीछे घूम कर चापलूसी करने वाले फेल्ड (फील्ड) मार्शल पीठ में छुरा घोंप दिया है. अमेरिका-ईरान की मध्यस्थता के बहाने राजनीति चमकाने वाले पाकिस्तान ने ईरान के लड़ाकू विमानों को दी थी पनाह. वो भी तब जब अमेरिका और इजरायल, तेहरान पर कहर बनकर टूट रहे थे.

इस्लामाबाद की इस करतूत से अमेरिका बेहद नाराज है. अमेरिका ने पाकिस्तान पर ईरानी सैन्य विमानों को हवाई हमलों से ‘बचाने’ का आरोप लगाया तो वहीं पाकिस्तान बार-बार सफाई देते फिर रहा है.

ईरानी विमानों को पनाह, पाकिस्तान पर भड़का अमेरिका

अमेरिका-ईरान के जंग के दौरान ईरानी मिलिट्री एयरक्राफ्ट को अमेरिका-इजरायल के हमलों से बचाने के लिए पाकिस्तान ने अपने एयरबेस पर शरण दी थी. इस खुलासे के बाद अमेरिका भड़का हुआ है तो वहीं पाकिस्तान बगलें झांकने को मजबूर हो गया है.

बताया जा रहा है कि जिस वक्त ईरान पर अमेरिकी और इजरायली वायुसेना हवाई हमले कर रही थी. तेहरान के नेवी और वायुसेना पर ताबड़तोड़ वार किए जा रहे थे, उस वक्त पाकिस्तान ने अमेरिकी हवाई हमलों से बचने के लिए ईरानी विमानों को अपने एयर फील्ड्स पर खड़ा किया था.

विमानों को हाल ही में रिपेयर किए गए नूरखान एयरबेस और दूसरे पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर खड़ा करने की अनुमति दी गई.

आपको बता दें कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का दावा कर रहा है. लेकिन ईरान को मदद पहुंचाकर पाकिस्तान ने ट्रंप को नाराज कर दिया है.

ईरान ने अपने कई विमानों को पाकिस्तान भेजा: अमेरिकी अधिकारी

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खुलासा किया गया है कि “युद्धविराम लागू होने के कुछ दिनों बाद ईरान ने अपने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजे थे. यह एयरबेस रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान का एक अहम सैन्य ठिकाना है. बताया गया है कि इन विमानों में ईरानी एयरफोर्स का आरसी-130 विमान भी शामिल था. यह विमान निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.”

बताया जा रहा है कि ईरान अपने बचे हुए सैन्य विमानों और संसाधनों को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि उसे अमेरिकी हवाई हमलों का डर था.

दावा किया गया है कि ईरान ने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान भेजा था. युद्ध शुरू होने से पहले एक ईरानी यात्री विमान काबुल पहुंचा था. ईरान का एयरस्पेस बंद होने के बाद वह विमान वहीं खड़ा रहा.

हालांकि तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद इन दावों को गलत बताया, कहा, ये सच नहीं है.

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर दोबारा विचार करने की जरूरत: अमेरिकी सीनेटर

पाकिस्तान का दोगलापन सामने आने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर ये बात सही है, तो ईरान, अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करना जरूरी होगा. इजरायल के प्रति पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के कुछ पूर्व बयानों को देखते हुए, अगर यह सच है तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा.”

पाकिस्तान ने दी दगाबाजी पर सफाई

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश मंत्रालय ने दावों को भ्रामक बताया है. कहा कि “नूर खान एयरबेस घनी आबादी वाले इलाके में है, वहां चोरी-छिपे ऐसा करना नामुमकिन है.”

पाकिस्तान का कहना है कि “सीजफायर के बाद ‘इस्लामाबाद वार्ता’ के दौरान ईरान और अमेरिका, दोनों देशों के विमान पाकिस्तान आए थे. इन विमानों का मकसद राजनयिकों, सुरक्षा टीमों और प्रशासनिक कर्मचारियों की आवाजाही में मदद करना था.”

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