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इंडो-पैसिफिक में शांति की जिम्मेदारी नौसेना की, राजनाथ ने बढ़ाया नेवी का अधिकार-क्षेत्र

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भारतीय नौसेना के कंधों पर रखी है. खास बात ये है कि अभी तक भारतीय नौसेना को हिंद महासागर में फर्स्ट रेस्पॉन्डर के तौर पर जाने जाती थी. लेकिन रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना का अधिकार-क्षेत्र बढ़ा दिया है.

कारवार में चल रहे नेवल कमांडर्स कॉन्फेंस में रक्षा मंत्री ने साझा किया चार्टर

एशिया के सबसे बड़े नेवल बेस कारवार (कर्नाटक) में आयोजित भारतीय नौसेना के कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (5-7 अप्रैल) को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान अप्रत्याशित भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच सशस्त्र बलों की भावी भूमिकाओं को फिर से परिभाषित करना आवश्यक है.

वैश्विक विशेषज्ञों की मान्यता का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी है और भारत की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी. राजनाथ ने कहा कि “हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया के लिए एक केंद्रबिंदु बन गया है.”

चीन की ताइवान, फिलीपिंस और ब्रूनई जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से चल रही है अदावत

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की दादागीरी दुनिया से छिपी नहीं है. ताइवान से लेकर फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम से चीन की समुद्री अदावत जगजाहिर है. ऐसे में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, दुनिया के एक बेहद ही संवेदनशील फ्लैश पॉइंट के तौर पर उभरा है.

नेवी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में समकालीन सुरक्षा प्रतिमानों पर ध्यान केन्द्रित करने, नौसेना की लड़ाकू क्षमता को उन्नत करने की दिशा में आगे की राह तैयार करने और रणनीतिक, परिचालन एवं प्रशासनिक पहलुओं पर ध्यान देने के बारे में विचार-विमर्श किया गया.

कारवार में चल रहा है अर्धवार्षिक सम्मेलन

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कर्नाटक के कारवार में आयोजित इस वर्ष (2025) के  प्रथम नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के उद्घाटन चरण के दौरान समुद्री सुरक्षा की स्थिति,  भारतीय नौसेना की परिचालन संबंधी तत्परता और भावी परिदृश्य की समीक्षा की. रक्षा मंत्री ने नौसेना के कमांडरों के साथ बातचीत भी की.

रक्षा मंत्री के साथ चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे.

राजनाथ सिंह ने दोहराया कि भारत, संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के अनुसार एक स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित व्यवस्था का पक्षधर है. उन्होंने कमांडरों से बदलती परिस्थितियों का आकलन करने और सतर्क व तैयार रहते हुए तदनुसार योजना, संसाधन एवं अभ्यास सुनिश्चित करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा, “सुरक्षा एक सतत अनुकूलन प्रक्रिया है, जिसमें आकलन, योजना और नए विचारों के साथ आगे बढ़ते रहने की आवश्यकता है। हमें इस बात का विश्लेषण करने की आवश्यकता है कि भारत अपनी भूमिका को और अधिक प्रभावी कैसे बना सकता है.”

यह सम्मेलन शीर्ष स्तरीय एवं अर्धवार्षिक आयोजन है, जिसमें नौसेना के शीर्ष कमांडरों के बीच महत्वपूर्ण रणनीतिक, परिचालन और प्रशासनिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाता है. यह हिंद महासागर क्षेत्र में ‘पसंदीदा सुरक्षा साझेदार’ के रूप में भारत की भूमिका पर जोर देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिससे क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता में नौसेना के योगदान को बल मिलता है.

सम्मेलन का दूसरा चरण दिल्ली में (7-10 अप्रैल)

इस सम्मेलन का दूसरा चरण 07 से 10 अप्रैल, 2025 के दौरान नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें परिचालन, सामग्री, लॉजिस्टिक्स, मानव संसाधन विकास, प्रशिक्षण और प्रशासन से संबंधित प्रमुख पहलुओं की व्यापक समीक्षा की जाएगी. तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को  बढ़ावा देने और समन्वय संबंधी प्रयासों को आगे बढ़ाने हेतु चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, थलसेनाध्यक्ष और वायुसेनाध्यक्ष भी इस सम्मेलन के दौरान नौसेना कमांडरों के साथ बातचीत करेंगे.

नौसेना के कमांडर विदेश सचिव श्री विक्रम मिस्री और श्री अमिताभ कांत के साथ विदेश नीति एवं अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे. सरकार के आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण के अनुरूप आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण एवं आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में भारतीय नौसेना के प्रयास इस कार्यक्रम के मुख्य फोकस हैं.

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