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खालिदा जिया के बेटे की बांग्लादेश वापसी, क्या भारत से सुधरेंगे संबंध

बांग्लादेश में बिगड़े और बेहद नाजुक हालात में 17 वर्ष बाद वापसी हुई है पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी के एक्टिंग चेयरमैन तारिक रहमान की. 12 फरवरी को बांग्लादेश में चुनाव होने हैं और तारिक रहमान को प्रधानमंत्री का चेहरा बताया जा रहा है. 

बांग्लादेश में हिंसा के दौर में तारिक रहमान का निर्वासन खत्म करके लंदन से वापस लौटना सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है. खासतौर से भारत के लिए क्योंकि खालिदा जिया के सुर पाकिस्तान से ज्यादा मिलते थे, लिहाजा तारिक का झुकाव भी पाकिस्तान की ओर है. 

भारत अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से तारिक अनवर की वापसी पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि तारिक का ढाका लौटना बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मचाने वाला फैसला है. 

शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है, तो शेख हसीना खुद भारत में शरण लिए हुए हैं. मौजूदा समय में पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी बांग्लादेश में हावी है. सत्ता में अगर तारिक आते हैं, भारत के साथ संबंध सुधारने का एक मौका होगा.  

खालिदा जिया के बेटे को माना जा रहा पीएम चेहरा, बेटी बोली, बांग्लादेश को नए सिरे से संवारेंगे

तारिक रहमान सिलहट के उस्मानी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अपनी पत्नी जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा रहमान के साथ पहुंचे तो मानों पूरा बांग्लादेश एक झलक के लिए उमड़ पड़ा. बीएनपी के कार्यकर्ता और समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया गया. 

जिस वक्त 60 वर्षीय तारिक की स्वदेश वापसी हुई है, मौका बेहद संवेदनशील है. ढाका पहुंचते ही तारिक रहमान ने सबसे पहला फोन अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस को लगाया. तारिक ने यूनुस से सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी हासिल की.

छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद तारिक रहमान की सुरक्षा सरकार ने बढ़ा दी है. तारिक की सुरक्षा में सेना के पूर्व ब्रिगेडियर को लगाया गया है.

इस बीच ढाका लौटने पर तारिक रहमान की बेटी जाइमा अनवर ने पोस्ट पर लिखा- “मैं जब 11 साल की थी, तब हमारे परिवार को मजबूरन लंदन आना पड़ा. मैंने अपना 17 साल लंदन में जिया है लेकिन मेरी यादें बांग्लादेश से ही जुड़ी हुई हैं. हम अब वापस आ गए हैं और बांग्लादेश को नए सिरे से संवारेंगे.”

दावा किया जा रहा है कि तारिक के साथ उनकी बेटी जाइमा भी चुनावी मैदान में उतर सकती हैं. 

बीएनपी ने बनाई भारत विरोधी जमात-ए-इस्लामी से दूरी, भारत संग नरमी

शेख हसीना के अपदस्थ होने के बाद से जब से अंतरिम मुखिया मोहम्मद यूनुस ढाका में आए हैं, तब से भारत विरोधी भावनाएं पनप रही हैं. हिंदुओं को मारा-काटा जा रहा है, तो भारत विरोधी नारेबाजी हो रही है. वजह है कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी, जो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की कठपुतली है.

शेख हसीना की पार्टी का चुनाव लड़ना बैन है. वहीं बीएनपी चीफ खालिदा जिया जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही हैं. ऐसे में जमात पूरी तैयारी में है कि वो इस चुनाव में बाजी मार ले और बांग्लादेश में अपनी सरकार बना ले. अब यहां ट्विस्ट ये आ गया कि जमात-ए-इस्लामी को टक्कर देने के लिए खालिदा जिया के बेटे तारिक अनवर वापस आ गए हैं. 

जमात-ए-इस्लामी का सत्ता में आने का मतलब भारत में क्षेत्रीय असुरक्षा का बढ़ना. ऐसे में भारत के लिए जमात से बेहतर विकल्प बीएनपी का है. पहले भारत और बीएनपी के रिश्ते अच्छे नहीं थे, लेकिन हाल के वर्षों में बीएनपी के भारत विरोधी तेवर में कमी आई है. हाल के दिनों में बीएनपी के किसी नेता चाहे वो तारिक अनवर हों या फिर कोई और, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या फिर भारत के विरोध में ऐसा कुछ नहीं कहा है. उल्टा बीएनपी ने यूनुस सरकार के नीतियों पर जरूर चोट की है.

बीएनपी जानती है कि भारत विरोध करके बांग्लादेश की सत्ता हासिल करना मुश्किल है. लेकिन बीएनपी के नेता भारत के साथ-साथ पाकिस्तान की भी बात नहीं कर रहे. ऐसे में में बीएनपी ये दिखाने की कोशिश में है कि वो तटस्थ है. दोनों देशों से न्यूट्रल रिश्ते बनाने में विश्वास रखता है.

पीएम मोदी ने लिया खालिदा जिया का हालचाल, बीएनपी ने कहा शुक्रिया

हाल ही में भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खालिदा जिया का हाल चाल पूछकर और मदद की पेशकश करके हर किसी को चौंका दिया था. ये कदम भारत- बीएनपी के साथ रिश्ते सही करने की कोशिश का था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबके सामने खालिदा जिया के स्वास्थ्य की चिंता जताई थी और हर मदद देने का आश्वासन दिया था.

वहीं बीएनपी ने भी प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को दिल से शुक्रिया कहा था और भारत का आभार जताया था.

माना जा रहा है कि अगर बीएनपी सत्ता में वापस आती है तो भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश के साथ रिश्ते एक बार फिर से पटरी पर लौटेंगे और विदेश नीति में सुधार होगा.

17 साल से लंदन में क्यों थे तारिक रहमान

तारिक रहमान को साल 2008 में सियासी कारणों से बांग्लादेश छोड़कर जाना पड़ा था. इसके बाद बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार आ गई. शेख हसीना की सरकार में तारिक के खिलाफ 20 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए गए. उनकी मां खालिदा जिया को जेल भेज दिया गया. लेकिन 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद खालिदा जिया को राहत मिली. यूनुस सरकार, खालिदा जिया को जेल से वापस लाई और तारिक रहमान के खिलाफ केस रद्द कर दिए गए. 

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