वेनेजुएला में अमेरिकी सेना की एयरस्ट्राइक और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अमेरिकी देशों को धमकाया है. मिडिल ईस्ट का ईरान तो पहले से ही ट्रंप के टारगेट पर है, लेकिन एक बार फिर से ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात दोहराई है.
डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर ये ऐलान किया है कि वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई आखिरी नहीं है.
क्यूबा, कोलंबिया, कनाडा, पनामा नहर और ग्रीनलैंड पर ट्रंप की नीयत पर पूरी दुनिया सकते में है
हमें ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत: ट्रंप
वेनेजुएला में सफल सैन्य कार्रवाई से गदगद ट्रंप इस कदर जोश में हैं कि उन्होंने एक बार फिर ग्रीनलैंड पर आंखे तरेर ली हैं. एयरफोर्स वन पर मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने दोहराया कि आर्कटिक द्वीप पर अमेरिका का नियंत्रण जरूरी है.
ट्रंप ने कहा, “हमें ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है. यह बेहद रणनीतिक महत्व रखता है क्योंकि यह रूसी और चीनी जहाजों से घिरा हुआ है. हमें इसे प्रतिद्वंदियों से बचाना बेहद जरूरी है.”
चीन-रूस से घिरा है ग्रीनलैंड, इसे बचाना जरूरी: ट्रंप
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “आर्कटिक में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों की वजह से ग्रीनलैंड बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर बर्फ पिघलने से नए जल मार्ग और सैन्य अवसर खुल रहे हैं.”
ट्रंप ने इससे पहले दावा किया था कि उन्हें भरोसा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल कर लेगा. ये भी कहा था कि ग्रीनलैंड के 57,000 लोग अमेरिका के साथ रहना चाहते हैं.
पिछले साल 20 जनवरी को जब ट्रंप ने अमेरिका का कार्यभार संभाला था तो उनकी जुबान पर जो था वो ग्रीनलैंड और पनामा नहर पर कब्जा करना.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा था, “ग्रीनलैंड एक अद्भुत जगह है. यदि यह हमारे देश का हिस्सा बनता है, तो यहां के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा. हमें इसे सुरक्षित रखेंगे और दुनिया से बचाएंगे. मेक ग्रीनलैंड ग्रेट अगेन.”
ग्रीनलैंड में क्यों है ट्रंप की दिलचस्पी, रूस-चीन से ज्यादा खनिजों पर हैं नजर
इससे पहले भी जब ट्रंप अपने पिछले कार्यकाल में थे, तब भी ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं.
ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है ग्रीनलैंड, आर्कटिक क्षेत्र में स्थित एक विशाल और अर्ध-स्वायत्त डेनिश (डेनमार्क) क्षेत्र है. यहां अमेरिका की वायु सेना का अड्डा है.ट्रंप, खनिजों से भरपूर इस क्षेत्र को खरीदने की कोशिश में हैं, लेकिन डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने कह दिया है कि यह द्वीप बिक्री के लिए नहीं है.
पिछले साल ग्रीनलैंड में पकड़ा गया था अमेरिकी जासूस, डेनमार्क ने अमेरिकी राजदूत को लताड़ा था
पिछले साल अगस्त में डेनमार्क की खुफिया एजेंसी ने खुलासा किया था कि अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड की खुफिया जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है. तीन अमेरिकियों ने ग्रीनलैंड में गुप्त तौर पर एजेंडा चलाया और ग्रीनलैंड को प्रभावित करने की कोशिश की. ये अमेरिकी डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच संंबंध खराब करने की कोशिश में थे. ग्रीनलैंड की जनता के बीच जाकर उन्हें प्रभावित कर रहे थे और डेनमार्क के साथ संबंधों को कमजोर कर रहे थे.
डेनमार्क के विदेश मंत्रालय ने सख्ती से कहा था, “हम जानते हैं कि विदेशी ताकतें ग्रीनलैंड और डेनमार्क में इसकी स्थिति को लेकर रुचि रखती हैं, इसलिए अगर कोई बाहरी ताकत डेनमार्क के भविष्य को प्रभावित करने की कोशिश करती है, तो यह हैरानी की बात नहीं है. लेकिन डेनमार्क के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह की दखलंदाजी बिल्कुल अस्वीकार्य है”
ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को दी चेतावनी, कहा- कड़ी नजर रख रहे
एयरफोर्स वन से ट्रंप ने ईरान को वॉर्निंग दी है. ट्रंप ने कहा, “हम ईरान पर बहुत कड़ी नजर रखे हुए हैं. अगर वे लोगों को वैसे ही मारते रहेंगे जैसा उन्होंने पहले किया है तो मुझे लगता है कि अमेरिका की ओर से उन्हें बहुत करारा जवाब मिलेगा.”
ट्रंप ने कहा, अगर प्रदर्शनों के दौरान और लोगों की मौत होती है तो अमेरिका की ओर से ‘बहुत कड़ी कार्रवाई’ की जाएगी.
दरअसल ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा है. एक सप्ताह के अंदर 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ये मौतें नहीं रूकीं तो ईरान पर एक्शन लिया जाएगा.

