ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारतीय सेना अपना स्थापना दिवस मनाने जा रही है. राजस्थान की राजधानी जयपुर में ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन्स को खासतौर से प्रदर्शित किया गया है. इनमें लाहौर और कराची के रडार स्टेशन को तबाह करने वाली हारपी ड्रोन शामिल हैं.
इसके अलावा इजरायल से लिए हारोप और दूसरे लोएटरिंग म्युनिशन का भी प्रदर्शन आर्मी डे परेड में किया जा रहा है. साथ में ऊंचाई और दुर्गम क्षेत्रों में सेना के हथियार और रसद इत्यादि लिफ्ट कर सैनिकों को अग्रिम चौकियों तक पहुंचाने वाले खास लॉजिस्टिक ड्रोन भी शामिल हैं. बड़ी संख्या में सर्विलांस ड्रोन, जिनके जरिए हमारे देश की सीमाओं की निगहबानी की जाती है, वे भी आर्मी डे परेड का हिस्सा हैं.
सेना की नई ड्रोन-शक्ति की झलक
ड्रोन्स के अलावा इस वर्ष सेना दिवस परेड का खास आकर्षण है, एक शीशे वाली बस. इस बस-नुमा वर्कशॉप को जंग के मैदान में ले जाने के लिए तैयार किया गया है ताकि सैनिकों द्वारा इस्तेमाल होने वाले ड्रोन्स की मरम्मत के साथ-साथ, नए ड्रोन्स को तैयार किया जा सके. इसे ड्रोन-शक्ति का नाम दिया गया है.
शुक्रवार को आर्मी डे परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान, इन सभी ड्रोन्स और अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स (यूजीवी) भी दिखाई पड़े.
स्वदेशी सैपर्स-स्कॉउट बिछाएगी लैंड माइन्स
विकसित भारत-2047 के संकल्प के अनुरूप, भारतीय सेना ने मिलिट्री टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी बड़ा कदम रखा है. ऐसे में दुश्मन की सीमा में घुसने से पहले लैंड-माइन्स को डिटेक्ट करने वाले स्वदेशी सैपर्स-स्काउट को हिस्सा बनाया गया है.
सैपर्स-स्कॉउट को डिजाइन करने वाले भारतीय सेना के मेजर राजप्रसाद के मुताबिक, ये स्वदेशी यूजीवी, माइन्स को खोजने के साथ-साथ अपने सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए बारूदी सुरंग को बड़े क्षेत्र में बिछाने में भी सक्षम है. इसके अलावा, ऐसे खास रोबोट्स भी दिखाई पड़ेंगे, उन्हें घायल सैनिकों और गोला-बारूद को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिये इस्तेमाल किया जाएगा.

