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ग्रीनलैंड पर चाहिए भारत का साथ, रूस-चीन नहीं अमेरिका से बताया डेनमार्क ने खतरा

ग्रीनलैंड को लेकर लगातार मिल रही अमेरिकी धमकी के बीच डेनमार्क ने भारत से मदद मांगीं है. ग्रीनलैंड, डेनमार्क का ही स्वायत्त क्षेत्र है. डेनमार्क की रक्षा समिति के अध्यक्ष और सांसद रास्मस जारलोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को झूठा बताते हुए कहा, ग्रीनलैंड को न तो रूस से और न ही चीन से खतरा है. दुनिया के सबसे शांत क्षेत्र को ट्रंप अशांत कर रहे हैं. ग्रीनलैंड पर जबरन कब्जे को लेकर डेनमार्क के सांसद ने भारत का समर्थन मांगा है.

डेनिश सांसद की मांग, भारत दे हमारा साथ

ग्रीनलैंड पर इन दिनों अमेरिका और डेनमार्क में तनातनी बढ़ चुकी है. अगले सप्ताह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो डेनमार्क के दौरे पर जा रहे हैं, और वो ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश करेंगे.

इन सबके बीच डेनमार्क ने लिया है भारत का नाम. डेनिश सांसद रास्मस जारलोव ने कहा, “ग्रीनलैंड भारत से बहुत दूर है, लेकिन यहां बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत दांव पर लगे हैं. क्या भारत यह स्वीकार करेगा कि कोई विदेशी ताकत उसके किसी इलाके पर सैन्य बल से या स्थानीय लोगों को रिश्वत देकर कब्जा करने की कोशिश करे? मुझे लगता है कि भारत ऐसी किसी भी हरकत से बहुत नाराज होगा, और हर देश को ऐसा ही होना चाहिए, इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि भारत भी हमारा साथ देगा, क्योंकि यह पूरी दुनिया के हित में है.”

ग्रीनलैंड में चीन का नामोनिशान नहीं, हमें चीन से नहीं अमेरिका से है खतरा: डेनिश सांसद

जारलोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इस दावे को खारिज किया कि ग्रीनलैंड रूस या चीन से घिरा हुआ है और उनसे खतरा है.

जारलोव ने कहा, “ग्रीनलैंड पर कोई खतरा नहीं है. असली खतरा सिर्फ अमेरिका से है. चीन के खतरे की बात झूठी है. वहां चीन की कोई गतिविधि नहीं है, न कोई दूतावास, न खनन, न सैन्य मौजूदगी. ग्रीनलैंड में चाइनीज रेस्तरां ढूंढना भी मुश्किल है.अगर वाकई खतरा होता तो अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपनी सेना 99 फीसदी कम नहीं की होती. पहले ग्रीनलैंड में 15,000 अमेरिकी सैनिक थे, अब सिर्फ 150 हैं. आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि ग्रीनलैंड पर रूस या चीन का कोई बड़ा खतरा नहीं है.”

अपने वफादार सहयोगियों को ही धमका रहा अमेरिका: डेनिश सांसद

डेनमार्क के रक्षा समिति के अध्यक्ष जारलोव ने कहा, “अमेरिका ने नया तेवर अपना लिया है और अपने ही सहयोगी देशों को धमकी दे रहा है, जिन्होंने अमेरिका के खिलाफ कभी कुछ नहीं किया, बल्कि बहुत वफादार सहयोगी रहे हैं. ग्रीनलैंड पर कोई खतरा नहीं है, यहां किसी से कोई दुश्मनी नहीं है और अमेरिका के हमले की कोई वजह नहीं है.”

डेनिश सांसद बोले, “अमेरिका पहले से ही ग्रीनलैंड में सैन्य और अन्य तरीकों से पहुंच रखता है. वहां कोई ड्रग रूट नहीं है, कोई गैरकानूनी सरकार नहीं. कोई ऐतिहासिक मालिकाना हक नहीं, कोई समझौता भी नहीं टूटा, कुछ भी ऐसा नहीं है जो इस तनाव का कोई कारण हो.”

ट्रंप ने फिर दी डेनमार्क को धमकी, कहा, प्यार से मान जाओ

ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर अपने ताजा बयान में डेनमार्क को धमकाया है. ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड की जरूरत है, और अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य बल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. ट्रंप ने कहा है कि अगर डेनमार्क प्यार से माना तो ठीक, वरना अमेरिका जबरन इस द्वीप पर कब्जा करेगा.

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