By Nalini Tewari
यूरोपियन यूनियन के साथ भारत की चल रही ट्रेड डील पर बातचीत और यूरोप के देशों से भारत की बढ़ती नजदीकी पर अमेरिका में हलचल बढ़ गई है. विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत हुई है. ये बातचीत ऐसे वक्त में हुई है, जब दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए नई दिल्ली में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कार्यभार संभाल लिया है और उन्होंने उम्मीद जताई है कि भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील जल्द से जल्द हो जाएगी.
दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय कारोबार के अलावा खनिज, न्यूक्लियर सहयोग, डिफेंस और एनर्जी में सहयोग को लेकर भी बातचीत हुई है.
जयशंकर-रुबियो के बीच क्या बात हुई
रुबियो और जयशंकर के बीच फोन कॉल के दौरान भारत-अमेरिका के व्यापारिक और आर्थिक सहयोग पर बातचीत हुई. इस दौरान रुबियो ने कहा कि अमेरिका सिविल न्यूक्लियर को लेकर भारत के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है. साथ ही अमेरिकी कंपनियों के लिए ज्यादा अवसर, ऊर्जा सुरक्षा की मजबूती और जरूरी खनिजों की सप्लाई को सुनिश्चित करने पर भी जोर है. दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग बढ़ाने और स्थानीय मुद्दों को बातचीत से हल करने पर भी जोर दिया.
जयशंकर ने क्या बताया, सर्जियो गोर का दावा, अगले महीने हो सकती है भारत-अमेरिका की बैठक
एस जयशंकर ने एक्स पर लिखा, अभी-अभी सेक्रेटेरी रूबियो के साथ एक अच्छी बातचीत खत्म हुई. ट्रेड, जरूरी मिनरल्स, न्यूक्लियर कोऑपरेशन, डिफेंस और एनर्जी पर बात हुई. इन और दूसरे मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमति बनी.
भारत में अमेरिकी राजदूत गोर ने जयशंकर और रुबियो के बीच बातचीत के अंश जारी किए हैं. गोर ने कहा, कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत सकारात्मक रही है. अगले महीने व्यापार को लेकर बातचीत पर आगे बढ़ने अनुमान है और दोनों देशों के बीच बैठक हो सकती है.
ट्रंप के टैरिफ और भारत-पाकिस्तान सीजफायर के फर्जी दावे के बाद बिगड़े संबंध
पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम नरसंहार के बाद भारत के पाकिस्तान पर किए गए सैन्य एक्शन ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका संग रिश्ते बेपटरी होने लगे. वजह थे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. ट्रंप ने बार-बार हर मौके पर ये दावा करना शुरु कर दिया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कराई है. जबकि भारत की नीति एकदम स्पष्ट है कि दो देशों के बीच तीसरे देश की मध्यस्थता के खिलाफ है भारत.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में खड़े होकर ये बयान दिया कि ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए किसी तीसरे देश ने नहीं कहा. उन्होंने ट्रंप का नाम लिए बिना मध्यस्थता के दावे को खारिज कर दिया.
पीएम मोदी के इस बयान के कुछ ही घंटे बाद ट्रंप ने रूस के साथ तेल खरीदने को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत को कुल टैरिफ थोप दिया. लेकिन भारत ने अमेरिका के सामने झुकने से मना कर दिया. भारत ने साफ तौर पर कह दिया कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है.
अब ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाने की बात कही है. भारत, ईरान का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी देश है.
यूरोप से बढ़ रही भारत की नजदीकी, अमेरिका के पेट में उठी मरोड़
पिछले कुछ महीनों में भारत और यूरोपीय देशों के बीच नजदीकी बढ़ी है. जर्मन चांसलर ने अपना भारत दौरा किया है. वहीं पिछले सप्ताह विदेश मंत्री एस जयशंकर यूरोपीय देश लग्जमबर्ग और पेरिस के दौरे पर थे. लग्जमबर्ग में पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से जयशंकर ने बात की थी.
वीमर प्रारूप की पहली बैठक में एस जयशंकर ने भारत और यूरोप के बीच गहरे संबंधों पर बात की थी. साथ कहा था कि दुनिया इस समय उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. यूरोप भी कई रणनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. कुछ वैश्विक घटनाएं ऐसी हैं जो पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित कर सकती हैं.
जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया था कि समान सोच वाले देशों को एकजुट होना चाहिए.
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप सिर्फ भारत-चीन-रूस पर ही दबाव बनाने की कोशिश नहीं कर रहे, उनके टारगेट पर यूरोप भी है. ट्रंप अपने करीबी देशों के साथ भी संबंध खराब करने पर तुले हुए हैं, जिससे वैश्विक अस्थिरता और अनिश्चितता बढ़ गई है.
भारत का यूरोप के साथ संबंध बढ़ाना अमेरिका को जवाब माना जा रहा है. अमेरिकी टैरिफ के जवाब में झुकने के बजाय भारत नया बाजार तलाश कर रहा है. रूस के साथ भारत के प्रगाढ़ संबंध तो हैं ही, अब चीन से भी संबंध सुधरे हैं. कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, ब्रिटेन समेत ईयू के साथ भी संबंध अच्छे हो रहे हैं.
यही कारण है कि इस साल गणतंत्र दिवस 2026 में बतौर चीफ गेस्ट यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व को आमंत्रित किया गया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे.
खुले इंडो पैसिफिक के लिए भारत संग प्रतिबद्ध: अमेरिकी विदेश मंत्रालय
अमेरिकी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि “विदेश मंत्री मार्को रूबियो कि भारतीय विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से बात हुई. उन्होंने नए साल की शुभकामनाएं दीं. मार्को रूबियो ने भारत को ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ बिल पास करने पर बधाई दी. अमेरिका ने भारत के साथ नागरिक परमाणु सहयोग को बढ़ाने, अमेरिकी कंपनियों के लिए अवसरों का विस्तार करने, साझा ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने और महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए इस महत्वपूर्ण विकास का फायदा उठाने में रुचि दिखाई.”
“मार्को रूबियो और एस जयशंकर ने चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में अपनी साझा रुचि पर चर्चा की. दोनों ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत की प्रतिबद्धता के बारे में बताया.”

