अमेरिका के किसी भी वक्त वाले एक्शन के बीच ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत से मदद मांगी है. अब्बास अराघची ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से फोन पर बात की है. जयशंकर और अराघची ने ईरान में मौजूदा हालात और बदलती हुई परिस्थितियों पर चर्चा की है.
ये बातचीत ऐसे वक्त में हुई है जब मिडिल ईस्ट में बेहद तनावपूर्ण स्थिति है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने पिछले 10 दिनों में बुधवार को दूसरी एडवाइजरी जारी करके भारतीय नागरिकों को तुरंत तेहरान छोड़ने को कहा है.
ईरान के हालात और चिंताओं पर हुई बात: एस जयशंकर
विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से ही हुई बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी है. एस जयशंकर ने लिखा कि “उन्हें ईरान के विदेश मंत्री का फोन आया और दोनों नेताओं के बीच ईरान और उसके आसपास के हालात पर चर्चा हुई. बातचीत में क्षेत्र में तेजी से बदल रही स्थिति और उससे जुड़ी चिंताओं पर बात की गई.”
ईरान और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में तनाव के कारण भारत समेत सभी देशों की चिंता बढ़ी हुई है. भारत लगातार ईरान के हालात पर नजर बनाए हुए है. ईरान में स्थानीय मुद्दों को लेकर 28 दिसंबर से खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं. इन विरोध प्रदर्शनों में 2500 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, बावजूद इसके प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है, वहीं ईरान की कट्टरपंथी सरकार ने अमेरिका के आगे झुकने को मना कर दिया है. ईरान ने कहा है कि बातचीत के साथ-साथ वो सैन्य जवाब देेने के लिए तैयार हैं.
दिल्ली में ईरानी दूतावास ने कहा, “देश चुप रहे, तो अमेरिका का खतरा और बढ़ेगा”
दिल्ली में ईरानी दूतावास ने अमेरिकी धमकी पर पलटवार किया है. ईरानी दूतावास ने एक्स पर लिखा, “अमेरिका के एकतरफा फैसलों से दुनिया की व्यवस्था कमजोर हो रही है. इसमें गलत तरीके से टैरिफ लगाना और कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से बाहर होना शामिल है. अगर देश चुप रहेंगे, तो खतरा और बढ़ेगा. ये फैसले समय के साथ हर देश को प्रभावित करेंगे, चाहे वह छोटा हो या बड़ा.”
ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25% टैरिफ की धमकी दी
ईरान से अमेरिकी टकराव के लपेटे में दूसरे देश आ गए हैं. ईरान से तनातनी की भड़ास अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है जो ईरान के साथ व्यापार करते हैं. अमेरिका के इस दबाव का असर भारत पर भी पड़ा है, क्योंकि भारत ईरान का तीसरा मुख्य पार्टनर है. भारत के अलावा चीन, ब्राजील, तुर्किए और रूस भी उन देशों में शामिल हैं जो तेहरान के साथ व्यापार करते हैं.
तेहरान में मौजूद भारतीय दूतावास के अनुसार, भारत ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि 0.44 अरब डॉलर का आयात किया, जिससे कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (लगभग 14,000 – 15,000 करोड़ रुपये) हो गया है.
जयशंकर-रुबियो के बीच ईरान को लेकर हुई थी बात
ईरानी विदेश मंत्री अराघची से बातचीत से एक दिन पहले अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और जयशंकर के बीच बातचीत हुई थी. इस बातचीत में वैश्विक संघर्षों को लेकर भी बात हुई थी, जिसमें ईरान, रूस-यूक्रेन समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
भारत ने 10 दिनों में दूसरी एडवाइजरी जारी की
विदेश मंत्रालय ने बुधवार को अपनी ताजी एडवाइजरी में भारतीय नागरिकों को तेहरान से फौरन निकलने को कहा है.विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय नागरिकों को अगले आदेश तक ईरान यात्रा न करने की भी सलाह दी है. यह एडवाइजरी तेहरान में भारतीय दूतावास ने जारी की.
एडवाइजरी में लिखा, “टूरिस्ट को सलाह दी जाती है कि वे कमर्शियल फ्लाइट्स समेत ट्रांसपोर्ट के मौजूद तरीकों से ईरान छोड़ दें.”
दूतावास ने दोहराया है कि सभी भारतीय नागरिकों को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और विरोध प्रदर्शनों वाले इलाकों से बचना चाहिए. ईरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहना चाहिए और किसी भी घटनाक्रम के लिए स्थानीय मीडिया पर नजर रखनी चाहिए.
इससे पहले भी 5 जनवरी 2026 को जारी एडवाइजरी में विदेश मंत्रालय ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से अपील की थी कि वो ईरान में प्रदर्शन वाली जगहों से दूर रहें, प्रदर्शन में हिस्सा न लें और उपलब्थ साधनों से ईरान छोड़ दें.
ईरान में लगभग 10 हजार भारतीय रहते हैं. इनमें मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले छात्र, मेडिकल प्रोफेशनल और कारोबारी शामिल हैं.


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