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गाजा बहाना, ट्रंप का मोदी न्योता छलावा

By Nalini Tewari

क्या सच में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के साथ रिश्तों को फिर से सुधारना चाहते हैं, या एक बार फिर से उन्होंने रची है भारत के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने की साजिश. 

क्या सच में गाजा पीस प्लान में ट्रंप, पीएम नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करके स्टेज का गौरव बढ़ाना चाहते हैं, या एक मंच पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ या फिर उस फेल्ड (फील्ड) मार्शल असीम मुनीर के सामने लाकर कोई चाल चलना चाहते हैं. 

ट्रंप चाहते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी गाजा बोर्ड ऑफ पीस बोर्ड का हिस्सा बनें, लेकिन वहीं ट्रंप ने भारत के कट्टर दुश्मन पाकिस्तान को भी इस बोर्ड में शामिल किया है. ऐसे में ट्रंप का पीएम मोदी को लिखी गई चिट्ठी एक चाल से ज्यादा नहीं लग रही. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा की कि भारत, ट्रंप की इस कूटनीति की काट कैसे निकालता है. 

वहीं इस बोर्ड को लेकर ये भी खुलासा हुआ है कि अगर कोई देश गाजा पीस बोर्ड का स्थायी सदस्य बनना चाहता है तो उसे 1 अरब डॉलर यानि 9 हजार करोड़ रु खर्च करने होंगे.

ट्रंप ने लिखा प्रधानमंत्री मोदी को पत्र, दिया न्योता

अमेरिका की नए भारतीय राजदूत सर्जियो गोर ने बताया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय पीएम को न्योता दिया है. गोर ने एक्स पर लिखा, “मुझे गर्व है कि मैं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आमंत्रण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दे रहा हूं ताकि वे बोर्ड ऑफ पीस में भाग लें, जो गाजा में स्थायी शांति लाएगा. यह बोर्ड प्रभावशाली शासन का समर्थन करेगा जिससे स्थिरता और समृद्धि प्राप्त होगी.” 

डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को जो पत्र लिखा है, उसका मजमून कुछ इस तरह से है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि “यह मेरे लिए अत्यंत गौरव की बात है कि मैं आपको, भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में, मध्य पूर्व में शांति को मजबूत करने के एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और भव्य प्रयास में शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहा हूं, और साथ ही वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक साहसिक नई दृष्टिकोण अपनाने के लिए भी.”

“29 सितंबर, 2025 को मैंने गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना, 2025 की घोषणा की थी, जिसमें एक 20 सूत्रीय रोडमैप शामिल था, जिसे विश्व के सभी प्रमुख नेताओं अरब विश्व, इजरायल, यूरोप सहित ने शीघ्रता से अपनाया. इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए, 17 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2803 को अपनाया जिसमें इस पहला का स्वागत और समर्थन किया गया.”

“अब समय आ गया है कि इन सभी सपनों को वास्तविकता में बदला जाए. इस योजना के केंद्र में शांति बोर्ड है, जो अब तक का सबसे प्रभावशाली और परिणाम लाने वाला बोर्ड होगा, जिसे एक नई अंतरराष्ट्रीय संगठन और संक्रमणकालीन शासन प्रशासन के रूप में स्थापित किया जाएगा.”

“हमारा यह प्रयास उन प्रतिष्ठित राष्ट्रों के समूह को एक साथ लाएगा जो स्थायी शांति निर्माण की महान जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हैं. नेतृत्व करने, सम्मानपूर्वक और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं समृद्ध भविष्य सुनिश्चित करने के लिए. हम निकट भविष्य में अपने उत्कृष्ट और प्रतिबद्ध साझेदारों, जिनमें अधिकांश अत्यधिक सम्मानित विश्व नेता हैं को एक साथ बुलाएंगे.”

भारत के अलावा और कौन-कौन से देश को अमेरिका ने दिया न्योता

भारत के अलावा अर्जेंटीना, कनाडा, मिस्र, तुर्की, अल्बानिया और साइप्रस समेत कई देशों को भी इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है. साथ ही पाकिस्तान को भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है. 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को यह न्योता मिला है. पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता रहेगा.

ट्रंप का खेला, परमानेंट सदस्य बनने पर खर्च करने होंगे करोड़ों

ट्रंप प्रशासन बोर्ड ऑफ पीस में स्थाई सदस्य बने रहने के लिए किसी भी देश को करोड़ों रुपये वसूलना चाहता है. बताया जा रहा है कि बोर्ड का स्थायी सदस्य बनने के लिए देश 1 अरब डॉलर (9 हजार करोड़ रुपए) का भुगतान करना होगा. बोर्ड के सदस्य देशों का कार्यकाल 3 साल का होगा. हालांकि, अगर कोई देश चार्टर लागू होने के पहले साल के अंदर 1 अरब डॉलर नकद देता है, तो उसे स्थायी सदस्यता मिल सकती है. हालांकि बोर्ड में शामिल होने की कोई फीस नहीं है, लेकिन 1 अरब डॉलर देने पर देश को इस बोर्ड का परमानेंट सदस्य बनाया जाएगा.

क्या पीएम मोदी-शहबाज शरीफ को एक मंच पर लाना चाहते हैं ट्रंप

पिछले साल पहलगाम में हुए नरसंहार के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए पाकिस्तान की कमर तोड़ दी. पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों के साथ साथ भारतीय सेना ने पाकिस्तान के न्यूक्लियर बेस तक बम बरसा दिए. तो हड़कंप अमेरिका तक मच गया. पाकिस्तान बार-बार अमेरिका से गुहार लगाने लगा कि भारत को रोका जाए, लेकिन भारत से साफ कर दिया था कि द्विपक्षीय देशों के बीच कोई तीसरा नहीं चाहिए. जिसके बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने सीधे भारत से गिड़गिड़ाना शुरु कर दिया, जिसके बाद भारत सीजफायर के लिए मान गया.

ट्रंप ने इस सीजफायर के लिए खुद ही क्रेडिट लेना शुरु कर दिया. वहीं पीएम मोदी ने पूरी दुनिया के सामने कह दिया कि ऑपरेशन सिंदूर रोकने के लिए किसी भी देश के राष्ट्राध्यक्ष ने नहीं कहा था. 

इसके बाद से ट्रंप कई बार कोशिश कर चुके हैं कि पीएम मोदी को पाकिस्तान के साथ एक मंच पर लाया जाए, और मीडिया के सामने दोनों देशों के बीच हाथ मिलवाकर भारत को असहज स्थिति में लाया जाए. 

पिछले साल जून के महीने में जब प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के दौरे पर थे, तो उस वक्त भी ट्रंप ने फोन करके पीएम मोदी को व्हाइट हाउस में चाय पर बुलाया था. लेकिन पीएम मोदी ने बेहद ही कूटनीतिक कदम के चलते इस न्योते को टाल दिया था. दरअसल उस वक्त ट्रंप ने पाकिस्तानी जनरल असीम मुनीर को भी व्हाइट हाउस का मेहमान बनाया था. अगर पीएम मोदी अमेरिका जाते तो ट्रंप जानबूझकर मीडिया के सामने पीएम मोदी और असीम मुनीर का आमना सामना करवाते. लेकिन ट्रंप की चाल फेल हो गई. 

वहीं पिछले साल यूएनएससी की बैठक में भी पीएम मोदी की जगह एस जयशंकर ने हिस्सा लिया था. अब इस पीस बोर्ड के जरिए ट्रंप, भारत-पाकिस्तान को एक मंच पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. उस पाकिस्तान को जहां इजरायली दुश्मन हमास आतंकियों की मेहमाननवाजी की जाती है. लश्कर और जैश के आतंकी इजरायल को चोट पहुंचाने वाले हमास आतंकियों से ट्रेनिंग लेते हैं. पाकिस्तान को इस बोर्ड में शामिल करना ही छलावा लग रहा है, क्योंकि हाल ही में भारत में इजरायली राजदूत ने भी पाकिस्तान की मंशा पर शक जाहिर किया था.

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