इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ के आसमान में ऑपरेशन सिंदूर की विजय की गर्जना सुनाए देनी जा रही है. भारतीय वायुसेना के फ्लाई-पास्ट में इस वर्ष लड़ाकू विमानों एक नई सिंदूर फोर्मेशन में उड़ान भरते दिखाई पड़ेंगे. इन लड़ाकू विमानों में रफाल, सुखोई, मिग-29 और जगुआर शामिल हैं.
वायु सेना के मुताबिक, 26 जनवरी को कर्तव्य पथ के आसमान में फ्लाई पास्ट का आगाज ध्वज फोर्मेशन से होगा. इस फोर्मेशन में चार (04) मी-17 हेलीकॉप्टर हिस्सा लेंगे. सबसे आगे वाले हेलीकॉप्टर में राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) होगा, और बाकी तीन (0) में थलसेना, वायुसेना और नौसेना के फ्लैग होंगे. दूसरे फोर्मेशन प्रहार की है. प्रहार फोर्मेशन में तीन (03) एएलएच (एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर) होंगे. इनमें से एक हेलीकॉप्टर, ऑपरेशन सिंदूर का झंडा लेकर उड़ान भरेगा.
कर्तव्य पथ के आसमान में दिखेगी वायुसेना के व्यूह-रचना की झलक
वायुसेना के विंग कमांडर राजीव देशवाल ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद ये पहला गणतंत्र दिवस समारोह है. ऐसे में ऑपरेशन सिंदूर की व्यूह-रचना भी फ्लाई पास्ट का हिस्सा होगी. ऐसे में फ्लाई-पास्ट में एक खास स्पियरहेड फोर्मेशन होगी. भाले रूपी हथियार की इस फोर्मेशन में वायुसेना के 02-02 रफाल (राफेल), सुखोई (सु-30) और मिग-29 फाइटर जेट हिस्सा लेंगे. एक जगुआर फाइटर जेट भी इस फोर्मेशन में दिखाई देगा. ये चारों वे फाइटर जेट हैं, जिन्होनें पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में हिस्सा लिया था.
पहलगाम नरसंहार के बाद भारतीय वायुसेना के रफाल और सुखोई फाइटर जेट ने ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई) के दौरान, पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के हेडक्वार्टर सहित पाकिस्तानी वायुसेना के सैन्य ठिकानों को तबाह किए थे.
दो चरणों में होगा वायुसेना का फ्लाई-पास्ट
विंग कमांडर देशवाल के मुताबिक, इस बार का फ्लाई-पास्ट दो चरण में होगा. पहला चरण, कर्तव्य पथ पर वायुसेना के मार्चिंग दस्ते के समय होगी, जिसमें सिंदूर फोर्मेशन दिखाई देगी. दूसरा चरण, कर्तव्य पथ पर मार्च-पास्ट खत्म होने के बाद होगा. इस चरण में रफाल लड़ाकू विमान मुख्य आर्कषण रहेगा.
वायुसेना के मार्चिंग-दस्ते में 114 वायु योद्धा होंगे, जिसका नेतृत्व करेंगे स्क्वाड्रन लीडर जगदेश कुमार. ध्वजारोहण में राष्ट्रपति के साथ होंगी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता धनखड़. वायुसेना के मिलिट्री बैंड में पहली बार अग्निवीरों को भी शामिल किया गया है. इनमें पुरूषों के साथ महिला-अग्निवीर भी शामिल हैं.

