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तेहरान पहुंचे डिप्टी NSA पवन कपूर, ट्रंप के वॉर प्लान को बड़ा झटका

अमेरिका के साथ बढ़े तनाव के बीच ईरान के सबसे पावरफुल शख्स अली लारीजानी से भारतीय डिप्टी एनएसए पवन कपूर ने मुलाकात की है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी और भारतीय डिप्टी एनएसए पवन कपूर के साथ ये बैठक तेहरान में हुई है.

यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अहम मानी जा रही है, खासकर तब जब यूएस नेवी का बड़ी जंगी बेड़ा तेहरान की ओर तेजी से बढ़ रहा है. 

भारतीय डिप्टी एनएसए और ईरानी अधिकारी की मुलाकात

बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को धमकाया है कि अगर परमाणु समझौता नहीं किया गया तो ईरान पर पिछले साल जून से ज्यादा घातक अटैक किया जाएगा. दबाव बनाने के लिए अमेरिकी नेवी ने अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ईरान की ओर मोड़ दिया गया है. अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो ने भी ईरान पर सैन्य ऑपरेशन का संकेत दिया है.

इस बीच ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने डिप्टी एनएसए पवन कपूर से बैठक की है. और मिडिल ईस्ट के तनाव पर बात की है. 

मुंबई में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने एक्स पर दोनों की फोटो शेयर करके जानकारी साझा की है. ईरानी कॉन्सुलेट जनरल ने कहा, “ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने भारत गणराज्य के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर पवन कपूर से मुलाकात की और बातचीत की.”

बेहद ताकतवर नेता है लारीजानी, अमेरिका को पीछे हटने को किया था मजबूर

हाल ही में जब ईरान में भयंकर प्रदर्शन का दौर चल रहा था, तो ट्रंप के आदेश पर किसी भी वक्त यूएस और इजरायल किसी भी वक्त सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का तख्तापलट कर सकते थे. लेकिन कहा जा रहा है कि सर्वोच्च परिषद का प्रमुख बनने के बाद लारीजानी ने ईरान को ऐसा सशक्त बनाया है कि जिसके कारण अमेरिका चाहकर भी तेहरान पर हमला नहीं कर पाया.

दरअसल सुरक्षा परिषद संभालने के बाद लारीजानी ने सबसे पहले ईरान के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले सऊदी से संपर्क साधा. लारीजानी ने पिछले 6 महीने में कम से कम 3 बार सऊदी के टॉप लीडरशिप से मुलाकात की. सितंबर 2025 में उन्होंने सऊदी के क्राउन प्रिंस से भी मुलाकात की थी. ईरान के सभी पड़ोसी देशों का दौरा किया. इनमें इराक, लेबनान और पाकिस्तान का दौरा शामिल है. बताया जा रहा है कि लारीजानी ने सभी पड़ोसी देशों और सऊदी अरब तक को अपने पाले में कर लिया था.

ऐसी खबरें आई थीं कि सऊदी अरब, कतर, ओमान समेत खाड़ी देशों ने ट्रंप को समझाया कि उन्हें जिद छोड़नी चाहिए, नहीं तो मिडिल ईस्ट की जंग की आग दुनिया को ले डूबेगी. सऊदी अरब ने तो यहां तक कह दिया कि अगर अमेरिका सैन्य एक्शन लेना चाहता है, तो वो अपना एयरस्पेस ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल नहीं होने देंगे. 

लारीजानी की कूटनीति काम आई. लारीजानी ने खाड़ी देशों के माध्यम से अमेरिका पर दबाव बनाया, जिसके कारण ट्रंप को अपने सुर नरम करने पड़े. खाड़ी देशों के प्रभाव से ईरान को तैयारी का थोड़ा वक्त मिल गया है. ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत होने जा रही है.

अमेरिका ने लारीजानी पर लगाया है प्रतिबंध

अमेरिका ने लारीजानी पर बैन लगा दिया है. यह बैन ट्रंप के उस फैसले के तुरंत बाद लगाया गया, जब ट्रंप ने ईरान पर स्ट्राइक को होल्ड करने का आदेश दिया. वहीं अमेरिका में रह रही लारीजानी की बेटी पर भी एक्शन लिया गया. अमेरिका की एमोरी यूनिवर्सिटी ने लारीजानी की बेटी फातिमा लारीजानी को नौकरी से हटा दिया.

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