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भारत रोक सकता है अमेरिका-ईरान जंग, यूरोप से आई आवाज

भारत रोक सकता है अमेरिका-ईरान का युद्ध. ये कहना है यूरोपीय देश फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब का. प्रेसिडेंट अलेक्जेंडर ने कहा है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष फौरन रुक जाना चाहिए. हमें फौरन युद्धविराम चाहिए. मिडिल ईस्ट में चल रही जंग को रोकने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है.

28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में युद्ध जारी है. ईरान के सभी बड़े नेताओं और अधिकारियों के मारे जाने के बावजूद तेहरान पीछे नहीं हटा है. वो लगातार हमले कर रहा है. खाड़ी के लगभग सभी देश जहां-जहां अमेरिकी सैनिकों की तैनाती है, और सैन्य बेस हैं वहां ईरानी सेना अटैक कर रही है. दुबई स्थिति अमेरिकी दूतावास तक में हमला बोला गया है. अमेरिका के अलावा मिडिल ईस्ट में बने ब्रिटेन और फ्रांस के सैन्य बेस पर भी हमला हुआ है. जिसनें फ्रेंच सैनिक की मौत हुई थी, जबकि कई सैनिक घायल हो गए.

मिडिल ईस्ट संघर्ष को रोकन में भारत निभा सकता है अहम भूमिका:  राष्ट्रपति स्टब

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि नाटो देशों को मिडिल ईस्ट की जंग में उतरना चाहिए. लेकिन ट्रंप से नाटो देशों ने इस मामले में कन्नी काट ली है. इन सबके बीच फिनलैंड के राष्ट्रपति ने भारत की तारीफ करते हुए आस लगाई है कि भारत इस युद्ध को रोक सकता है. अलेक्जेंडर स्टब ने कहा है कि भारत ने मिडिल ईस्ट में शांति की बात की है. भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले ही बातचीत और शांति की बात कर चुके हैं, ताकि हालात शांत किए जा सकें. मुझे ऐसा लगता है कि मिडिल ईस्ट में चल रही जंग को रोकने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है.

स्टब ने कहा कि “ग्लोबल कोशिशों को दुश्मनी रोकने और बातचीत के रास्ते खोलने पर फोकस करना चाहिए, भारत तनाव कम करने के मकसद से की जा रही डिप्लोमैटिक कोशिशों में शायद मदद कर सकता है. हमें सीजफायर की जरूरत है. मैं सोच रहा हूं कि क्या भारत सच में इसमें शामिल हो सकता है. हमने देखा कि विदेश मंत्री जयशंकर ने चीजों को शांत करने के लिए सीजफायर की अपील की थी.”

फिनलैंड को क्यों लगता है भारत रोक सकता है युद्ध, इसके ये हैं कारण

स्टब ने ये बयान यूं ही नहीं दिया, इसके पीछे तर्क भी है. दरअसल विदेश मंत्री जयशंकर लगातार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से संपर्क में हैं. वो भी ऐसे समय में जब ईरानी नेताओं से संपर्क करना बेहद मुश्किल है. जयशंकर-अराघची के बीच हाल के दिनों में कई बार बातचीत हुई है. इन बातचीत में मिडिल ईस्ट के हालात,  समुद्री रास्तों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा जरूरतों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई.

ईरान भी भारत के साथ संबंधों को प्राथमिकता देता है, चाहे वो सांस्कृतिक हों या फिर व्यापारिक. होर्मुज की खाड़ी जहां दूसरे देशों के क्रूड ऑयल और नेचुरल रिसोर्स के जहाज फंसे हुए हैं, वहां भारतीय जहाजों को आराम से निकलने दिया जा रहा है.

इतना ही नहीं, भारत के ईरान के साथ-साथ इजरायल और अमेरिका से भी गहरे संबंध हैं. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू एकदूसरे के करीबी मित्र हैं. दोनों एकदूसरे को बहुत सम्मान देते हैं. जिस दिन युद्ध की शुरुआत हुई यानि 28 फरवरी को, उससे ठीक एक दिन पहले पीएम मोदी ने अपना इजरायल का दौरा पूरा किया था. युद्ध के शुरुआती दिनों में ही पीएम मोदी ने नेतन्याहू से फोन पर बात करके कूटनीतिक और संवाद से समाधान निकालने पर जोर दिया था.

पीएम मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से भी फोन पर लंबी बात की थी. जिसमें पीएम मोदी ने भारतीयों की सुरक्षा की बात की थी और कहा था कि बातचीत करके संघर्ष रोका जाना चाहिए. पीएम मोदी ने खाड़ी देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी फोन पर बात की है और वहां हो रहे नुकसान पर चर्चा की है.

ऐसे में फिनलैंड के राष्ट्रपति का मानना है कि भारत को मध्यस्थ बनाकर युद्ध को रोकना जरूरी है.

कई देश अंतर्राष्ट्रीय कानून नजरअंदाज कर रहे: अलेक्जेंडर स्टब

स्टब ने यह भी कहा कि “आज कई देश अंतरराष्ट्रीय कानून को नजरअंदाज कर रहे हैं. ऐसे में दुनिया की व्यवस्था को दोबारा मजबूत करने की जरूरत है, जहां नियम और संस्थाएं सही तरीके से काम करें. दुनिया के करीब 200 देशों की सहमति जरूरी होगी और इसमें भारत जैसे बड़े देशों की भूमिका बहुत अहम हो सकती है.”

स्टब 5 से 7 मार्च तक दिल्ली में चले रायसीना डायलॉग में भी शामिल हुए थे, इस दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की भूमिका की सराहना की थी.

आपको बता दें कि स्टब, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी हैं. ट्रंप-स्टब दोनों गोल्फ पार्टनर्स हैं. कई घंटों घंटों तक एकसाथ गोल्फ खेल चुके हैं. पिछले साल जब ट्रंप ने भारत पर मनमाना टैरिफ थोपा था, तो उस वक्त भी स्टब ने भारत की आवाज उठाते हुए ट्रंप से बातचीत में कहा था कि उन्हें भारत को लेकर विदेशनीति में बदलाव करना चाहिए. स्टब ने कहा था कि “विदेश नीति सहयोगी नहीं रही तो अमेरिका और पश्चिमी देश अपना खेल हार जाएंगे.”

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