ईरान की विषम परिस्थितियों में अमेरिकी पायलट को छुड़ाने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाहवाही कर रहे हैं. लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के एक दावे से सनसनी फैल गई है. ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिकी पायलट और दूसरे क्रू मेंबर को रेस्क्यू के बहाने अमेरिका ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम पर कब्जा करना चाहता था.
दरअसल अमेरिका ने अपने गायब हुए पायलट को रेस्क्यू करने के लिए ईरान के दक्षिणी इस्फ़हान प्रांत में ऑपरेशन चलाया था. इस्फहान में ही ईरान का एक न्यूक्लियर सेंटर है. माना जाता है कि इस सेंटर पर ईरान का वो यूरेनियम है, जिसपर अमेरिका नियंत्रण चाहता है.
अब ईरान का कहना है कि हमें इस बात की आशंका है कि अमेरिका ने अपने पायलट को बचाने की आड़ में यूरेनियम चुराने की कोशिश की.
ईरानी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की मंशा पर उठाए सवाल
सोमवार के ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिका पर सवाल उठाए. बगाई ने कहा कि “ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को चुराने के लिए अमेरिका की एक संभावित योजना के बारे में लगाए जा रहे अनुमान सच हो सकते हैं.”
इस्माइल बगाई ने कहा, “एक पायलट को बचाने की आड़ में एनरिच्ड यूरेनियम चुराने के उद्देश्य से किए गए किसी धोखे वाले ऑपरेशन की संभावना को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.”
बगाई के मुताबिक “अमेरिकी ऑपरेशन की परिस्थितियां बेहद संदेहास्पद हैं. हम नजर रख रहे हैं.”
जिस इलाके में अमेरिकी पायलट के कथित तौर पर मौजूद होने की बात कही जा रही थी, वह कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत में था, जबकि उस जगह और उस इलाके के बीच काफी दूरी थी, जहां कथित तौर पर अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन किया. इसलिए यह संभव है कि तथाकथित पायलट रेस्क्यू ऑपरेशन वास्तव में एनरिच्ड यूरेनियम चुराने के उद्देश्य से किया गया एक धोखे वाला ऑपरेशन था, और इस अनुमान को किसी भी परिस्थिति में खारिज नहीं किया जाना चाहिए.
ईरान में जोखिम लेकर अमेरिका ने अपने पायलट को बचाया
शुक्रवार 3 अप्रैल 2026 को ईरान में सैन्य कार्रवाई के दौरान अमेरिका के एफ 15ई विमान को ईरान ने मार गिराया था. जिसके एक पायलट की सरगर्मी से तलाश की जा रही थी. इस विमान के दो क्रू मेंबर्स ने विमान से इजेक्ट किया एक पायलट को फौरन कुछ घंटों में ही अमेरिका-इजरायल ने रेस्क्यू कर लिया था. लेकिन अमेरिकी कर्नल लापता हो गए थे. इस पायलट (कर्नल) को पकड़ने के लिए ईरान ने जाल बिछाया था.
दूसरे पायलट को ईरान जिंदा पकड़ना चाहता था, इसके लिए नागरिकों को इनाम की पेशकश की थी. वहीं अपने पायलट को बचाने के लिए अमेरिका ने कई विमानों को रवाना किया. इस दौरान ईरान ने दावा किया कि उसने दो अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलिकॉप्टरों पर भी हमला किया.
अमेरिका सैनिकों ने दूसरे पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया. उधर ईरान की सेना भी अमेरिकी पायलट की तलाश कर रही थी. आखिरकार ईरानी सेना के साथ भारी गोलीबारी के बीच अमेरिकी सेना अपने पायलट को सुरक्षित बचाने में सफल रही. अमेरिकी फोर्सेस ने इस कर्नल को रेस्क्यू करने के लिए शाहरेजा शहर से लगभग 23 किलोमीटर उत्तर में कथित रूप से एक बेकार पड़े हवाई पट्टी का इस्तेमाल किया था.
ट्रंप ने अपनी सेना की तारीफ करते हुए पीठ थपथपाई और कहा कि सैन्य इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि दो अमेरिकी पायलटों को दुश्मन के इलाके के काफी अंदर से, अलग-अलग अभियानों में बचाया गया है.
ट्रंप ने लिखा, “अमेरिकी सेना ने पायलट को बचाने के लिए दुनिया के सबसे शक्तिशाली हथियारों से लैस दर्जनों विमान भेजे. अधिकारी घायल हुए हैं, लेकिन वे पूरी तरह ठीक हो जाएंगे. यह साबित करता है कि हमने ईरानी आसमान पर पूर्ण वायु श्रेष्ठता और प्रभुत्व हासिल कर लिया है. इस ऑपरेशन में एक भी अमेरिकी जवान घायल नहीं हुआ.”

