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ईरान संकट के बीच तुलसी का इस्तीफा, पति की बीमारी बताया कारण

ईरान युद्ध के बीच अमेरिका के खुफिया विभाग की चीफ तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया है. आने वाली 30 जून को तुलसी गबार्ड अपना पद पूरी तरह छोड़ देंगी. गबार्ड ने इस्तीफा ऐसे वक्त में सौंपा है, जब ईरान के साथ दोबारा जंग शुरु होने की आहट है. और अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ईरान दोबारा तेजी से ड्रोन और मिसाइल बना रहा है, तेहरान ने कई घातक मिसाइलें रूस-चीन की मदद से बना भी ली हैं.

हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि गबार्ड के इस्तीफे के पीछे कोई भी राजनीतिक कारण नहीं है, पर्सनल वजहों से तुलसी गबार्ड ने अपना पद छोड़ने का फैसला किया है. ट्रंप ने घोषणा की है कि गबार्ड की जगह आरोन लुकास को कार्यवाहक खुफिया प्रमुख बनाया जाएगा.

भले ही तुलसी गबार्ड ने अपने पति के गंभीर बीमारी के कारण इस्तीफा दिया है, लेकिन पिछले कुछ महीनों से तुलसी गबार्ड को हटाए जाने की चर्चा तेज थी. व्हाइट हाउस के साथ तनाव के संकेत तब दिखाई दिए जब ट्रंप ने पिछले साल जून में सुझाव दिया कि ईरान द्वारा परमाणु हथियार बनाने के कोई सबूत नहीं होने के उनके आकलन में गलती थी. तुलसी गबार्ड ट्रंप और उनके शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच प्रमुख विदेश नीति के मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं से अनुपस्थित रहती थीं, जिनमें वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने वाला अमेरिकी सैन्य अभियान, ईरान युद्ध और क्यूबा शामिल हैं.

तुलसी गबार्ड ने बताई इस्तीफे की वजह

अमेरिका की सबसे बड़ी खुफिया एजेंसी का शीर्ष बदला जा रहा है. अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस की निदेशक तुलसी गबार्ड अपना पद छोड़ रही हैं. लेकिन इस बड़े फैसले के पीछे न तो ईरान युद्ध है और न ही ट्रंप प्रशासन से अनबन. तुलसी गबार्ड ने दुखद पारिवारिक कारण से इस्तीफा देने का मन बनाया है. तुलसी गबार्ड के पति अब्राहम को हाल ही में हड्डियों के कैंसर (बोन कैंसर) जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी का पता चला है. ऐसे मुश्किल समय में अपने पति का साथ देने और उनके इलाज में मदद करने के लिए गबार्ड अपना पद छोड़ेंगी.

गबार्ड ने सोशल मीडिया पर भी अपना इस्तीफा साझा करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पति के साथ रहना ही उनके लिए सबसे जरूरी है.

गबार्ड ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दी गई चिट्ठी में लिखा, “मैं आपके द्वारा मुझ पर जताए गए भरोसे और पिछले डेढ़ साल तक राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय का नेतृत्व करने का अवसर देने के लिए बेहद आभारी हूं. लेकिन दुर्भाग्यवश मुझे 30 जून 2026 से अपना इस्तीफा देना पड़ रहा है.”

“पति अब्राहम को हाल ही में हड्डियों के कैंसर के एक बेहद दुर्लभ रूप का पता चला है और आने वाले समय में उन्हें गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. इस समय मुझे सार्वजनिक सेवा से हटकर उनके साथ रहना और इस कठिन लड़ाई में उनका पूरा साथ देना जरूरी लगता है.”

तुलसी गबार्ड ने अपने पत्र में पति के प्रति भावुक संदेश भी लिखा. उन्होंने कहा, “अब्राहम पिछले 11 वर्षों की शादी में हमेशा मेरे मजबूत सहारे रहे हैं. पूर्वी अफ्रीका में संयुक्त विशेष अभियान मिशन के दौरान मेरी तैनाती, कई राजनीतिक अभियानों और अब इस पद पर सेवा के दौरान उन्होंने हर मुश्किल में मेरा साथ दिया. पति का प्यार और समर्थन हमेशा उन्हें ताकत देता रहा है और ऐसे समय में उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकतीं.”

ट्रंप ने की गबार्ड की तारीफ, नए चीफ की घोषणा

तुलसी गबार्ड के पद छोड़ने के बाद अमेरिका की खुफिया एजेंसियों का काम प्रभावित न हो, इसके लिए नई नियुक्ति की घोषणा भी कर दी गई है. राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया है कि “गबार्ड के विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और उपनिदेशक आरोन लुकास अब नए कार्यवाहक निदेशक होंगे. आरोन लुकास अब अमेरिका के खुफिया प्रमुख की जिम्मेदारी संभालेंगे.”

ट्रंप ने कहा, “तुलसी गबार्ड ने अपने पद पर बहुत ही शानदार काम किया है, लेकिन अब उनके जाने के बाद लुकास पर देश की सुरक्षा से जुड़ी यह अहम जिम्मेदारी होगी.”

तुलसी गबार्ड के काम से नाखुश था व्हाइट हाउस

गबार्ड के इस्तीफे को लेकर विपक्ष के सीनेटर ने कहा, “उन्हें व्हाइट हाउस ने बाहर कर दिया. व्हाइट हाउस उनसे काफी समय से नाखुश था.”

दरअसल हाल ही में खुफिया विभाग ने एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें कहा गया था कि ईरान एक बार फिर तेजी से खड़ा हो रहा है. ड्रोन्स और मिसाइलें बना रहा है. इतना ही नहीं पिछले साल खुफिया विभाग की रिपोर्ट में बताया गया था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से दूर था, एक रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि पिछले साल जून 2025 में अमेरिका द्वारा किए गए ईरान के न्यूक्लियर प्लांट से तेहरान को ज्यादा नुकसान नहीं हुई था.

जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति हर जगह ये ढिंढोरा पीट रहे थे, अमेरिकी एयरस्ट्राइक में ईरान का न्यूक्लियर प्लांट कई वर्ष पीछे चला गया है.

इसके अलावा गबार्ड से नाखुशी के अन्य कारणों में से एक उनकी टास्कफोर्स, जिसे डायरेक्टर्स इनिशिएटिव्स ग्रुप के नाम से जाना जाता है, की गतिविधियां थीं. इस समूह ने पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की मृत्यु से संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक करने, चुनाव मशीनों की सुरक्षा की जांच करने और कोविड-19 की उत्पत्ति की पड़ताल करने का काम किया है.

इसके अलावा एक अन्य विवाद का कारण गबार्ड द्वारा पिछले अगस्त में 37 वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों की सुरक्षा मंजूरी रद्द करना था, जिससे विदेश में गुप्त रूप से काम कर रहे एक खुफिया अधिकारी का नाम उजागर हुआ था.

गबार्ड ने खुफिया समुदाय से राजनीतिकरण को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से कई पहल कीं और पूर्व सीआईए निदेशक जॉन ब्रेनन सहित पूर्व खुफिया अधिकारियों की सुरक्षा मंजूरी रद्द करने को मंजूरी दी.

गबार्ड के इस्तीफे से अमेरिकी प्रशासन सन्न, कैसी प्रतिक्रियाएं मिलीं

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गबार्ड को एक सच्ची देशभक्त बताया है. वेंस ने इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इंसान के लिए परिवार हमेशा सबसे पहले आता है और वे उनके पति के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करेंगे.”

सीनेटर लिंडसे ग्राहम, कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टोड ब्लैंच और टर्निंग पॉइंट की सीईओ एरिका किर्क ने भी गबार्ड के काम की जमकर तारीफ की है.

वहीं कैलिफोर्निया के सीनेटर एडम शिफ ने तुलसी गबार्ड नीतियों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि गबार्ड ने अपने पद का राजनीतिकरण किया और सुरक्षा एजेंसियों को कमजोर किया.

तुलसी गबार्ड के फैसलों पर एक नजर

अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए तुलसी गबार्ड ने कहा कि उन्होंने अमेरिकी खुफिया तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठाए. उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में खुफिया एजेंसियों के खर्च में कटौती कर अमेरिकी टैक्सपेयर्स के लिए सालाना 70 करोड़ डॉलर से अधिक की बचत की गई. इसके अलावा इंटेलिजेंस कम्युनिटी में चल रहे डीईआई  कार्यक्रमों को समाप्त करने की दिशा में भी कार्रवाई की.

गबार्ड ने अपने कार्यकाल के दौरान ट्रंप-रूस जांच, जॉन एफ. कैनेडी और रॉबर्ट एफ. कैनेडी हत्याकांड से जुड़े पांच लाख से अधिक सरकारी दस्तावेजों को डीक्लासिफाई किया. गबार्ड ने आरोप लगाया कि ओबामा प्रशासन के अधिकारियों ने 2016 चुनाव में रूसी हस्तक्षेप से जुड़ी खुफिया सूचनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल कर ट्रंप की पहली जीत को कमजोर करने की कोशिश की थी.

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