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इवांका ट्रंप को मारने की IRGC साजिश, तुर्की से गिरफ्तार हुआ आरोपी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश रचने वाले संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया गया है. इवांका की हत्या की साजिश का खुलासा होने से अमेरिकी एजेंसियों के हाथ-पांव फूल गए हैं, क्योंकि ईरान के युद्ध की आंच अब राष्ट्रपति ट्रंप के घर तक पहुंच गई है.

अमेरिकी एजेंसी ने मोहम्मद अल-सादी नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है, जिसने कबूल किया है कि उसने ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए ट्रंप परिवार को निशाना बनाने की साजिश रची. अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक मोहम्मद अल सादी का संबंध आईआरजीसी और कताइब हिजबुल्लाह से रहा है.

सादी के ठिकानों की तलाश के दौरान एजेंसियों के होश फाख्ता हो गए जब उन्हें इवांका ट्रंप के फ्लोरिडा स्थित घर का नक्शा मिला.

इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश, एफबीआई ने आतंकी को गिरफ्तार किया

इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश रचने के आरोप में एक संदिग्ध आतंकी को एफबीआई ने गिरफ्तार किया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) और ईरान समर्थित आतंकी नेटवर्क से जुड़ा ये आतंकी ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था. बदला लेने के लिए शख्स ने राष्ट्रपति ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की प्लानिंग की.

 32 साल के मोहम्मद बाकेर साद दाऊद अल-सादी इराकी नागरिक है, उसे तुर्किए में गिरफ्तार किया गया था और बाद में अमेरिका भेज दिया गया. जांच एजेंसियों का दावा है कि उसने इवांका ट्रंप की हत्या की फुलप्रूफ प्लानिंग की थी. सादी के पास से फ्लोरिडा में मौजूद इवांका ट्रंप के घर का नक्शा भी मिला. इवांका वहां अपने पति जेरेड कुशनर के साथ रहती हैं.

सुलेमानी की मौत का बदला लेना चाहता था आतंकी

बताया गया है कि अल-सादी ने साल 2020 में बगदाद में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ट्रंप परिवार को निशाना बनाने की कोशिश की थी.

जांच एजेंसियों के अनुसार, अल-सादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फ्लोरिडा के उस इलाके की तस्वीर भी पोस्ट की थी, जहां इवांका और जेरेड कुशनर का करीब 2.4 करोड़ डॉलर का घर है. उसने अरबी में लिखा था कि न आपके महल और न ही सीक्रेट सर्विस आपको बचा पाएगी. उसने यह भी कहा था कि निगरानी और तैयारी पहले से चल रही है.

वॉशिंगटन में इराकी दूतावास के पूर्व डिप्टी मिलिट्री अटैची इंतिफाध कंबर ने कहा कि “अल-सादी खुलकर बदले की बातें करता था. उनके मुताबिक, अल-सादी कहता था कि सुलेमानी की मौत के बाद हमें इवांका को मारना चाहिए.”

ईरानी ब्रिगेडियर का बेटा, सुलेमानी को मानता था आदर्श

अल-सादी का कासिम सुलेमानी से काफी करीबी रिश्ता था. उसके पिता ईरानी ब्रिगेडियर जनरल अहमद काजमी की 2006 में मौत हो गई थी. इसके बाद वह सुलेमानी को पिता जैसा मानने लगा. वह बगदाद में बड़ा हुआ और बाद में आईआरजीसी की ट्रेनिंग के लिए तेहरान भेजा गया.

बताया गया कि बाद में उसने धार्मिक यात्राओं की एक ट्रैवल एजेंसी शुरू की, जिसके जरिए वह अलग-अलग देशों में घूमता था और आतंकी नेटवर्क से संपर्क बनाता था. ट्रैवेल एजेंसी का इस्तेमाल कथित तौर पर दुनिया भर में आतंकी नेटवर्क से संपर्क बनाने के लिए किया गया.

जांच एजेंसियों के मुताबिक कासिम सुलेमानी की मौत के बाद बदले की भावना से काम कर रहा था. सुलेमानी के बाद आईआरजीसी के कमांडर इस्माइल कानी के साथ भी अल-सादी करीबी संबंध थे.

यूरोप में भी कर चुका है हमले, बेल्जियम, लंदन, एम्स्टर्डम का वांटेड

अमेरिकी न्याय विभाग ने उस पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों और हमले की कोशिशों का आरोप लगाया है. एफबीआई के मुताबिक, आतंकी सादी एम्स्टर्डम में बैंक पर पेट्रोल बम हमला किया था इसके अलावा लंदन में दो यहूदी लोगों पर चाकू हमला और टोरंटो में अमेरिकी दूतावास के पास भी फायरिंग कर चुका है. शामिल है.

जांच में खुलासा हुआ है कि सादी ने बेल्जियम में यहूदी प्रार्थना स्थल को बम से उड़ाने और रॉटरडैम में एक मंदिर में आग लगाने की साजिश रची थी. अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि उसका संबंध अमेरिका में मिडिल ईस्ट संघर्ष से जुड़े कई असफल हमलों से भी था.

सोशल मीडिया पर एक्टिव, सैन्य ठिकाने, मैप धड़ल्ले से करता था शेयर

अल-सादी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था. उसने पेरिस के एफिल टॉवर, कुआलालंपुर के पेट्रोनास टावर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय जगहों पर ली गई तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं.

अमेरिकी अदालत के दस्तावेजों के अनुसार उसने अपने सोशल मीडिया खातों पर सैन्य ठिकानों, नक्शों और कासिम सुलेमानी के साथ बैठकों से जुड़ी तस्वीरें भी साझा की थीं. उसके पास इराक का विशेष सेवा पासपोर्ट भी था, जिससे वह आसानी से कई देशों की यात्रा कर सकता था.

अमेरिकी एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि क्या वो सिर्फ एक मोहरा था, क्या इन सबके पीछे कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहा था. फिलहाल अल सादी को न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है.

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