अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 106 दिनों से चल रहा युद्ध आखिरकार समाप्त हो गया है. दोनों देशों ने एक एमओयू पर सहमति बनाई है और पाकिस्तान की मध्यस्थता में 19 जून को जिनेवा में वार्ता का ऐलान किया है. इस समझौते या फिर डील को लेकर हालांकि, दोनों देशों ने खुलकर साफ कुछ नहीं कहा है. दोनों देशों ने अपने अपने दावे जरूर किए हैं.
रविवार (14 जून) की रात को अमेरिका और ईरान ने इस एमओयू (समझौते के ज्ञापन) पर इलेक्ट्रोनिक सिग्नेचर किए, जिसकी घोषणा सबसे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दी. इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी डील की बात कहकर युद्ध को हर मोर्चे पर खत्म करने की पुष्टि की. साथ ही ये भी कहा कि ईरान पर लगा नेवल ब्लॉकेड समाप्त हो गया है और पूरी दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट खुल गया है.
एमओयू के 03 चरण
ईरान ने हालांकि, फूंक-फूंक कर कदम रखा और अपनी सरकारी मीडिया के माध्यम से डील की शर्तों को सार्वजनिक किया. ईरान के मुताबिक, ये डील तीन चरणों में की जाएगी. पहला चरण, एमओयू के घोषणा यानी 14 जून से शुरु हो जाएगा. इसके तहत दोनों देशों के बीच युद्ध तुरंत रुक जाएगा. ईरान पर लगे प्रतिबंध खत्म हो जाएंगे.
दूसरे चरण जिनेवा में डील साइन होने के 30 दिन तक चलेगा. इस दौरान, होर्मुज पूरी तरह खुल जाएगा और ईरान को कुल 24 बिलियन डॉलर की फ्रीज संपत्ति से 12 बिलियन डॉलर मिल जाएंगे.
तीसरे चरण कुल 60 दिन का होगा, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा होगी और बाकी जब्त 12 बिलियन डॉलर भी मिल जाएंगे.
कहां फंसा है पेंच
सबसे बड़ा पेंच फंसा है इजरायल को लेकर. एमओयू से ये साफ नहीं है कि डील को लेकर इजरायल की सहमति ली गई है. लेकिन एमओयू की घोषणा के बाद जिस तरह से इजरायल सरकार के मंत्रियों के बयान सामने आए हैं, उससे ऐसा लगता है कि ट्रंप ने अपने जिगरी दोस्त (इजरायली प्रधानमंत्री) बेंजामिन नेतन्याहू को बाहर रखा है. लेकिन एमओयू को लेकर ईरान ने दावा किया है कि लेबनान को भी डील में शामिल किया गया है.
लेबनान और इजरायल के अलावा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी थोड़ा संशय बना हुआ है. क्योंकि ईरान लगातार दावा कर रहा है कि होर्मुज पूरी तरह से आईआरजीसी (ईरान की मिलिशिया) के कंट्रोल में रहेगा. ईरान ने युद्ध के दौरान हुई तबाही का हर्जाना भी अमेरिका से मांगा है, जो करीब 300 बिलियन डॉलर है. लेकिन अमेरिका की तरफ से इस पर कोई हामी नहीं भरी गई है.
इसके अलावा परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी जबरदस्त सस्पेंस बना हुआ है. क्या ईरान अपने एनरिच यूरेनियम, अमेरिका को सरेंडर कर देगा, ये भी बड़ा सवाल है. ईरान ने हालांकि दावा किया है कि परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन संवर्धित यूरेनियम को सरेंडर करने के लिए तैयार नहीं है.
जिनेवा में होगी फाइनल वार्ता
एमओयू के पेच के चलते, अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल, जिनेवा में वार्ता से पहले एक बार कतर में मिल रहे हैं. उस दौरान, डील को लेकर तस्वीर थोड़ी साफ हो पाएगी. उसके बाद 19 जून को जिनेवा में पाकिस्तानी की अगवानी में वार्ता होगी. लेकिन यहां भी एक पेंच फंसा है. ईरान के मुताबिक, फाइनल डील को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से स्वीकृति लेनी होगी. इसके अलावा, एमओयू के तीनों चरणों को एक स्वतंत्र मैकेनिज्म के जरिए मॉनिटर किया जाएगा, जिसके बाद ही फाइनल डील पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.

